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Jaisalmer Farmers Project: राजस्थान के जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतिम छोर जीरो हेड पर किसानों का सिंचाई पानी की मांग को लेकर धरना जारी है. किसानों का कहना है कि उनकी एक ही मांग सिंचाई का पानी है.
किसानों के मुताबिक, 28 तारीख को हुई परामर्शदात्री बैठक में रेगुलेशन तय किया गया था और जैसलमेर जोन के लिए पानी की बारी निर्धारित की गई थी, लेकिन 30 तारीख की शाम तक जैसलमेर जोन का पानी करीब 1800 क्यूसेक था, लेकिन इसके बाद रेगुलेशन शुरू होते ही पानी शून्य हो गया है और पिछले चार दिनों से उनके हिस्से में 1800 क्यूसेक में से एक क्यूसेक पानी भी नहीं पहुंच रहा है.
आश्वासन के बावजूद पानी नहीं आने का आरोप
किसानों का कहना है कि पहले भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना आंदोलन स्थगित किया था. किसानों के मुताबिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि नहरें निर्धारित समय के अनुसार चलेंगी और किसानों को उनकी बारी का पूरा पानी मिलेगा. लेकिन अब किसानों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद पानी नहीं आया और उन्हें दोबारा धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा.
2012 से सामने आ रही ये समस्या
किसानों ने बताया कि यह समस्या पहली बार नहीं आई है. वर्ष 2012 से लगातार जैसलमेर जोन के किसानों को पानी के मामले में आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन हर बार कुछ समय बाद स्थिति फिर वही हो जाती है कि कभी पानी आगे कर दिया जाता है, तो कभी पीछे, कभी रेगुलेशन में बदलाव होता है, तो कभी पानी दूसरी जगह चला जाता है.
किसानों का यह भी कहना है कि उन्हें अधिकारियों की ओर से यह बताया जा रहा है कि पंजाब के पोंग बांध से पानी कम आ रहा है और पानी उपलब्ध होने के बाद जैसलमेर जोन को दिया जाएगा, लेकिन किसानों का सवाल है कि उन्हें पानी मिलने की कोई निश्चित समय सीमा क्यों नहीं बताई जा रही है. किसानों का कहना है कि अगर पानी कई दिन बाद आएगा, तो तब तक खेतों में खड़ी फसलों की स्थिति क्या होगी.
भरोसा दिलाकर आंदोलन करवाया था स्थगित
पिछली बार उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किसानों के बीच पहुंचकर नहरें चलाने का भरोसा दिलाया था. इसी भरोसे पर किसानों ने अपना आंदोलन स्थगित किया था, लेकिन अब किसानों का कहना है कि बुधवार सुबह पानी खोलने और निर्धारित अवधि तक नहर चलाने का आश्वासन भी पूरा नहीं हुआ. अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बावजूद पानी नहीं आया, जिसके चलते उन्हें दोबारा जीरो हेड पर बैठना पड़ा.
स्थानीय किसान शंकर सिंह ने बताया कि जनप्रतिनिधियों से भी अपनी पैरवी मजबूती से करने की अपील की है. सरकार उनकी है, जनप्रतिनिधि उनके द्वारा चुने हुए हैं. इसके बावजूद अगर उन्हें अपने हक के पानी के लिए धरने पर बैठना पड़े, तो यह चिंता का विषय है. जनप्रतिनिधियों से उम्मीद है कि वे उच्च स्तर पर किसानों की समस्या को मजबूती से उठाएंगे और जल्द समाधान करवाएंगे.
किसानों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन के भरोसे धरना समाप्त नहीं करेंगे. जब तक पानी धरातल पर नहीं पहुंचेगा और निर्धारित समय के अनुसार नहरें नहीं चलेंगी, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात किसानों ने कही है.