1 नवंबर को मिलना था प्रमोशन, उससे पहले उठी अर्थी: 13 साल की बेटी ने दी जवान पिता को अंतिम विदाई
Rajasthan News: चित्तौड़गढ़ के गंगरार क्षेत्र में सेना के जवान जितेंद्र सिंह चौहान का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. 22 साल देश सेवा करने वाले जवान को बेटी कीर्तिराज और भाई ललित सिंह ने मुखाग्नि दी. 1 नवंबर को उनका प्रमोशन होना था.
Chittorgarh News: जिस बेटे को गांव ने देश की सरहदों की रक्षा के लिए विदा किया था, शुक्रवार को उसी बेटे की अंतिम विदाई के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा. चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार क्षेत्र के सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव में भारतीय सेना के जवान जितेंद्र सिंह चौहान का पार्थिव शरीर पहुंचा तो हर आंख नम हो गई. तिरंगे में लिपटे जवान को अंतिम बार देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही. किसी ने हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि दी, तो किसी ने फूल बरसाकर अपने गांव के सपूत को आखिरी सलाम किया. देशभक्ति के नारों के बीच परिवार का दर्द हर किसी को भावुक कर रहा था.
जिला अस्पताल से गांव तक निकली अंतिम यात्रा
जितेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल से उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किया गया. सुबह करीब नौ बजे सेना की गाड़ी गंगरार पेट्रोल पंप पहुंची, जहां पहले से मौजूद ग्रामीणों ने जवान के अंतिम दर्शन किए. इसके बाद फूलों से सजी सेना की गाड़ी के साथ अंतिम यात्रा शुरू हुई.
यात्रा गंगरार कोट पुलिया से शारणेश्वर महादेव मंदिर, पुराने बस स्टैंड, परशुराम सर्किल और आरएससीबी के बाहर से होते हुए अंबेडकर सर्किल पहुंची. यहां से नेशनल हाईवे के रास्ते टोल प्लाजा होते हुए पार्थिव शरीर सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव ले जाया गया. यात्रा के दौरान जगह-जगह लोग श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े दिखाई दिए. युवाओं ने हाथों में तिरंगे लेकर भारत माता की जय और जितेंद्र सिंह अमर रहें के नारे लगाए. घरों और रास्तों से पुष्पवर्षा कर जवान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया.
पति के अंतिम दर्शन कर भावुक हुईं पत्नी
जैसे ही जितेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, परिवार के लिए खुद को संभालना मुश्किल हो गया. पत्नी श्याम कंवर पति के अंतिम दर्शन करते हुए अपने आंसू नहीं रोक सकीं. माला अर्पित करते समय वह भावुक होकर रोने लगीं. सेना की ओर से जब जितेंद्र सिंह की वर्दी परिवार को सौंपी गई, तब भी माहौल गमगीन हो गया.
पिता रघुनाथ सिंह अपनी छोटी पोती सौम्या को गोद में लिए हुए थे. एक तरफ बेटे को खोने का गम और दूसरी तरफ परिवार के भविष्य की चिंता, इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया. रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने परिवार को संभालने का प्रयास किया और दुख की इस घड़ी में साथ खड़े रहे.
बेटी कीर्तिराज और भाई ललित सिंह ने दी मुखाग्नि
सूरत सिंह जी का खेड़ा गांव में पूरे सम्मान के साथ जितेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार किया गया. उनकी 13 वर्षीय बेटी कीर्तिराज और छोटे भाई ललित सिंह ने मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी. जिस बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया, उसी बेटी ने अपने पिता को अंतिम विदाई देने का कठिन कर्तव्य निभाया. अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम रहीं.
इस मौके पर एसडीएम नेहा मिश्रा, विधायक सुरेश धाकड़, पूर्व जिला महामंत्री देवी सिंह राणावत, पूर्व जिला प्रमुख भेरू सिंह चौहान और जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष नारायण सिंह बड़ौली सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे. सभी ने जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाया.
असम से जयपुर और फिर चित्तौड़गढ़ पहुंचा पार्थिव शरीर
जितेंद्र सिंह असम में तैनात थे. सेना की प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार रात करीब 11 बजे उनका पार्थिव शरीर एयर एंबुलेंस से जयपुर लाया गया. इसके बाद सड़क मार्ग से शुक्रवार सुबह करीब चार बजे चित्तौड़गढ़ पहुंचाया गया. यहां जिला अस्पताल की मोर्चरी में पार्थिव शरीर रखा गया और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अंतिम यात्रा निकाली गई. सेना के अनुसार, जितेंद्र सिंह का निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ. वह भारतीय सेना की 629 साटा बैटरी, असम में आरटी हवलदार के पद पर तैनात थे.
22 साल की सैन्य सेवा, युवाओं को देते थे सेना में जाने की प्रेरणा
जितेंद्र सिंह चौहान जून 2004 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे. इसके बाद उन्होंने करीब 22 वर्षों तक अलग-अलग स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं. गांव के लोगों के अनुसार, छुट्टी पर घर आने के दौरान वह युवाओं को सेना में भर्ती होकर देश सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे. उनके लिए सेना की नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम थी.
परिवार और गांव के लोगों के लिए एक नवंबर की तारीख खास होने वाली थी. इसी दिन जितेंद्र सिंह को हवलदार से नायब सूबेदार पद पर पदोन्नति मिलनी थी. घर में इस उपलब्धि को लेकर उम्मीदें और खुशियां थीं, लेकिन उससे पहले ही उनके निधन की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया.
जितेंद्र सिंह अपने पीछे पत्नी श्याम कंवर, बेटियों कीर्तिराज और सौम्या सहित परिवार को छोड़ गए हैं. उनका छोटा भाई ललित सिंह राजस्थान पुलिस में कार्यरत है. शुक्रवार को गांव की मिट्टी में पंचतत्व में विलीन हुए जितेंद्र सिंह की सैन्य सेवा और देश के प्रति समर्पण को ग्रामीण लंबे समय तक याद रखेंगे.