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राजस्थान के बाड़मेर जिले की शिव तहसील की ग्राम पंचायत झांपली कल्ला में सरपंच चुनाव के बाद एक वीडियो ने निर्वाचन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सामने आए वीडियो में कुछ लोग शराब पार्टी करते नजर आ रहे हैं. खास बात यह है कि वीडियो में दिखाई दे रहे कुछ लोगों के गले में निर्वाचन ड्यूटी के आईडी कार्ड भी नजर आ रहे हैं.
बताया जा रहा है कि ये लोग चुनाव प्रक्रिया में तैनात पोलिंग पार्टी के सदस्य हैं. वीडियो मतगणना स्थल से जुड़ा बताया जा रहा है. हालांकि, वीडियो की तारीख, स्थान और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की आधिकारिक पहचान की पुष्टि प्रशासन की ओर से होना बाकी है.
गौरतलब है कि झांपली कल्ला ग्राम पंचायत में सरपंच पद के चुनाव में उगमदान विजयी घोषित हुए, जबकि करणीदान को हार का सामना करना पड़ा. परिणाम घोषित होने के तरीके को लेकर भी विवाद है. करणीदान पक्ष की ओर से बिना आवश्यक हस्ताक्षर करवाए हार घोषित करने के आरोप लगाए गए हैं.
अब शराब पार्टी का वीडियो सामने आने के बाद निर्वाचन ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों के आचरण पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह है कि चुनाव जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारी यदि ड्यूटी के दौरान या मतगणना स्थल पर शराब पार्टी करते नजर आएं, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी. जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन आयोग को वीडियो की जांच कर संबंधित कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए.
खैरथल में तीसरे चरण के चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों के दावेदार और संभावित प्रत्याशी मतदाताओं के बीच पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में जुटे हैं. कोई विकास के दावे कर रहा है, तो कोई क्षेत्र की तस्वीर बदलने का भरोसा दिला रहा है, लेकिन इन दावों के बीच जमीनी हकीकत क्या है, इसकी पड़ताल करने ज़ी मीडिया तिजारा क्षेत्र की बड़ी पंचायत जेरोली गांव में पहुंचा. तिजारा कस्बे से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जेरोली गांव में ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान विकास की तस्वीर कुछ और ही नजर आई.
गांव की टूटी-फूटी सड़कें और बदहाल रास्ते ग्रामीणों की परेशानियों को बयां कर रहे हैं. ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी मातृभाषा में गांव की समस्याओं को खुलकर सामने रखा. ग्रामीणों का कहना है कि जेरोली एक बड़ी पंचायत है, इसके बावजूद सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अब तीसरे चरण के चुनाव से पहले गांव में विकास के मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है. ग्रामीणों का साफ कहना है कि इस बार मतदान करते समय केवल दावों और वादों को नहीं, बल्कि गांव में हुए वास्तविक विकास कार्यों को ध्यान में रखा जाएगा.
Reporter- Durag Singh Rajpurohit