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राजधानी दिल्ली में इंडिया गठबंधन के सांकेतिक सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम में राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव की वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से 13.3 करोड़ नाम हटाए जाने का मतलब है कि चुनाव आयोग खुद लोकसभा चुनाव को अवैध ठहरा रहा है और बीजेपी के सांसद अवैध तरीके से चुनकर आए हैं. राहुल ने ज्ञानेश कुमार को चेतावनी देते हुए कहा कि विपक्ष उन्हें अपना पहला निशाना मानता है. वहीं, मल्लिकार्जुन खरगे ने छह गंभीर आरोपों वाला प्रस्ताव पढ़कर सुनाया और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के साथ उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर होने वाली मॉक पार्लियामेंट में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा,'चुनाव आयोग खुद कह रहा है कि 2024 का लोकसभा चुनाव एक अवैध चुनाव है और जो लोग लोकसभा में पहुंचे हैं, यानी BJP के लोग वे अवैध तरीके से लोकसभा में पहुंचे हैं.' उन्होंने कहा,'मैं बस एक छोटी सी बात कहना चाहता हूं. 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. यानी हर सात भारतीयों में से एक. भारत के 15% मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. पिछले लोकसभा चुनाव में, इन मतदाताओं ने वोट दिया था. विपक्ष और चुनाव जीतने वालों के बीच वोटों का अंतर 3% था. यानी, चुनाव 3% वोटों के अंतर से जीता गया था और अब चुनाव आयोग खुद कह रहा है कि उन 15% मतदाताओं को वोट नहीं देना चाहिए था. इसका मतलब यह है कि चुनाव आयोग खुद कह रहा है कि 2024 का लोकसभा चुनाव एक अवैध चुनाव है और जो लोग लोकसभा में पहुंचे हैं, यानी BJP के लोग वे अवैध तरीके से लोकसभा में पहुंचे हैं.
राहुल गांधी ने आगे कहा,'हो सकता है कि मोदी जी और शाह जी सबसे ऊपर हों. हम उनसे निपट लेंगे, लेकिन आप उनके मोहरे हैं, इसलिए आप हमारा पहला निशाना हैं. अगर ज्ञानेश कुमार जी, या उनके नीचे काम करने वाले 5-7 लोग यह सोचते हैं कि उन्हें 'इम्युनिटी' बचा लेगी, तो मैं उन्हें प्यार और स्नेह के साथ सलाह देना चाहूंगा कि वे देखें कि देश में क्या चल रहा है. कृपया बाहर के लोगों का मिजाज समझें. आप कल ही देख लेंगे. कल आप देखेंगे कि दिल्ली की सड़कों पर एक राजनीतिक हथियार उतारा जाने वाला है. एकजुट विपक्ष आपको दिखा देगा कि इस देश की जनता का मिजाज क्या है. आप चुनावों में धांधली करते रह सकते हैं. आप CBI, ED और देश की हर एक संस्था को नियंत्रित कर सकते हैं और उनका दुरुपयोग होने दे सकते हैं, लेकिन हम आपको गारंटी देते हैं कि यह सब बस कुछ समय के लिए है.'
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसी प्रोग्राम ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया. गठबंधन ने उन पर आरोप लगाया कि वे 'बीजेपी द्वारा राष्ट्रीय और राज्य चुनावों को चुराने के लिए रची गई एक कुटिल और दुर्भावनापूर्ण आपराधिक साजिश' में शामिल थे. साथ ही, उन्होंने मांग की कि उन पर अदालत में देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए. खरगे ने यह प्रस्ताव पढ़कर सुनाया और बताया कि इसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोप लगाए गए हैं, जिनमें वोटर लिस्ट में हेरफेर, संसदीय निगरानी के बिना वोटर रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव करना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करना शामिल है.
आगे आरोप लगाया गया कि ज्ञानेश कुमार ने जानबूझकर कानून के नियमों को तोड़ा है. उन्होंने दूसरों को मतदाता सूची तक पहुंच दी, जिससे वे अपनी मर्जी से वोटर्स के नाम हटा या जोड़ सके और चुनाव के नतीजों में हेरफेर कर सके. प्रस्ताव में कहा गया,'वे चुनावी प्रक्रिया पर पहले से सोची-समझी साजिश के तहत हमला करने के मुजरिम हैं. यह चुनावी प्रक्रिया भारत के लोकतंत्र की बुनियाद है. यह एक आपराधिक काम है और देश के संविधान के खिलाफ देशद्रोह के बराबर है.'