विजयाराजे सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य-वसुंधरा राजे तक: सिंधिया राजपरिवार का दशक पुराना संपत्ति विवाद क्या है? BJP के 2 दिग्गज नेताओं के रिश्ते पर कितना असर?
सिंधिया राजपरिवार के बीच संपत्ति विवाद दशकों पुराना है, लेकिन लंबे समय से चल रही कानूनी खींचतान साल 2015 में तब एक नए मोड़ पर पहुंची, जब वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे ने सिंधिया राजपरिवार की कुल संपत्ति में समान हिस्सेदारी की मांग को लेकर दीवानी मुकदमा दायर किया. अब इसमें नया मोड़ आ गया है.
ग्वालियर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सिंधिया राजपरिवार के 2015 से चल रहे संपत्ति विवाद को लेकर बहस पूरी हो गई है. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ समझौते के आधार पर केस खत्म करने और नागरिक प्रक्रिया संहिता का आदेश 23 नियम 3 (Order 23 Rule 3) के तहत समझौता डिक्री पारित करने की मांग की है. हालांकि, पद्मा राजे (वसुंधरा राजे की बड़ी बहन) की बेटी प्रतिमा देवी ने इस समझौते पर आपत्ति जताते हुए फैसला सुनाने से पहले गवाही और एविडेंस पेश करने का मौका मांगा है.
कोर्ट में बुधवार (9 अक्टूबर) को सुनवाई के दौरान सीलबंद दस्तावेज खोले गए. अब ग्वालियर जिला कोर्ट 14 अक्टूबर को यह तय करेगा कि प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर निर्णय से पहले साक्ष्य दर्ज किए जाएं या सीधे समझौते के तहत फैसला सुनाया जाए. कोर्ट यह तय करेगा कि फैसला करने से पहले गवाही और अन्य एविडेंस दर्ज करना जरूरी है या नहीं.
2015 से चले आ रहे इस विवाद का पूरा इतिहास?
ग्वालियर की पूर्व रियासत से जुड़ा यह संपत्ति विवाद कई दशकों से विभिन्न अदालतों में लंबित रहा है. राजमाता विजयाराजे सिंधिया और उनके बेटे दिवंगत माधवराव सिंधिया के दौर से शुरू हुई कानूनी खींचतान साल 2015 में तब एक नए मोड़ पर पहुंची, जब वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे ने सिंधिया राजपरिवार की कुल संपत्ति में समान हिस्सेदारी की मांग को लेकर दीवानी मुकदमा दायर किया. इसके बाद साल 2026 में दोनों पक्षों (ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ) के बीच आपसी सहमति बनने पर मुकदमे को समझौते के आधार पर समाप्त करने का आवेदन कोर्ट में पेश किया गया.
समझौता हुआ, तो फिर अब नया विवाद क्यों?
जब ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे के बीच पारिवारिक सहमति बन गई और केस बंद करने की अर्जी दी गई, तब पद्मा राजे की बेटी प्रतिमा देवी ने आपत्ति दर्ज कराई. प्रतिमा देवी का तर्क है कि इस समझौते में उनकी मां पद्मा राजे और उनके लीगल वारिसों के अधिकारों और हितों को नजरअंदाज किया गया है. इसलिए, उन्होंने मांग रखी है कि कोर्ट पहले उनकी आपत्तियों पर सुनवाई करे और उन्हें अपने पक्ष के समर्थन में गवाही, एविडेंस और दस्तावेज पेश करने का पर्याप्त अवसर दे.
Order 23 Rule 3 CPC क्या है, जिसके तहत मांगी जा रही है समझौता डिक्री?
नागरिक प्रक्रिया संहिता (Civil Procedure Code - CPC) का आदेश 23 नियम 3 (Order 23 Rule 3) अदालत को यह अधिकार देता है कि यदि किसी सिविल केस में सभी पक्षकार सर्वसम्मति से लिखित और हस्ताक्षरित समझौते पर पहुंच जाते हैं, तो कोर्ट बिना किसी विस्तृत सुनवाई के उसी समझौते के आधार पर 'समझौता डिक्री' पारित कर केस खत्म कर सकता है. वसुंधरा राजे की ओर से कोर्ट में दलील दी गई है कि सभी मुख्य पक्षों के बीच समझौते के बाद अलग से गवाही की जरूरत नहीं है, जबकि प्रतिमा देवी इस आधार को चुनौती दे रही हैं.
ग्वालियर से राजस्थान और दिल्ली तक फैली संपत्तियां
सिंधिया राजपरिवार की अनुमानित हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियां ग्वालियर से राजस्थान और दिल्ली तक कई राज्यों में फैली हैं. इसमें ग्वालियर का भव्य जयविलास पैलेस शामिल है, जो 350 से अधिक कमरों का महल है. इसके अलावा उषकिरण पैलेस, रानी महल, मोती महल परिसर के हिस्से और ग्वालियर के अलावा आसपास के जिलों में जमीन हैं. राजस्थान में धौलपुर महल, भरतपुर और जयपुर के पास रियासती संपत्तियां शामिल हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ग्वालियर हाउस और सिंधिया विला है, जबकि मुंबई के वर्ली में सिंधिया हाउस और पुणे में भी ऐतिहासिक संपत्तियां हैं.
14 अक्टूबर को कोर्ट तय करेगा विवाद का भविष्य
14 अक्टूबर को ग्वालियर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट यह फैसला करेगा कि केस तुरंत बंद होगा या कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. यदि कोर्ट ज्योतिरादित्य सिंधिया और वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे की दलील स्वीकार कर सीधे डिक्री पारित करता है, तो 2015 से चला आ रहा मुकदमा कानूनी रूप से खत्म हो जाएगा. यदि कोर्ट प्रतिमा देवी को एविडेंस और गवाही दर्ज कराने की अनुमति देता है, तो समझौते पर अंतिम मुहर लगने में समय लग सकता है और मामले की सुनवाई नए सिरे से एविडेंस के आधार पर आगे बढ़ेगी.
पारिवारिक समझौते के बीच राजनीतिक मायने
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह बीजेपी के दो बड़े नेता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच समझौता होगा. दशकों पुराने पारिवारिक संपत्ति विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलने से न केवल सिंधिया राजवंश के भीतर सालों से चली आ रही दूरियां खत्म हो रही हैं, बल्कि भाजपा के भीतर इन दोनों बड़े सियासी चेहरों के बीच रणनीतिक और व्यक्तिगत संबंध भी अधिक मजबूत और स्पष्ट होंगे.