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मध्य प्रदेश के शाजापुर शहर के डॉ. भीमराव अंबेडकर शासकीय बालक महाविद्यालयीन छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता और अव्यवस्थाओं को लेकर शुक्रवार को छात्रों ने जमकर हंगामा किया. छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में दिए जाने वाले खाने में अक्सर कीड़े-मकोड़े और इल्लियां निकलते हैं, जबकि पीने के पानी में भी चींटियां और कीड़े पाए जा रहे हैं. इससे छात्रों में भारी आक्रोश है. मामले की जानकारी मिलने पर नायब तहसीलदार राकेश यादव मौके पर पहुंचे औऱ हॉस्टल में रहने वाले छात्रों से बात की और उनकी शिकायतें सुनीं.
छात्रों ने हॉस्टल अधीक्षक सत्यनारायण कुंभकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उन्हें जो खाना दिया जाता है, वह प्रशासन द्वारा तय किए गए मेन्यू के अनुसार नहीं होता है. इसके अलावा सुबह के नाश्ते की गुणवत्ता पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता है. छात्रों का आरोप है कि उनके खाने में अक्सर कीड़े-मकोड़े और लार्वा मिलते हैं, जबकि पीने के पानी में भी चींटियां और अन्य कीड़े पाए गए हैं. इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है.
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी वे भोजन या अन्य व्यवस्थाओं के बारे में अधीक्षक से शिकायत करते हैं, तो उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है और उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता. इसके अलावा छात्रों ने उनके भोजन के लिए आवंटित फंड पर भी सवाल उठाए. उनका दावा है कि हर महीने भोजन के लिए पैसे निकाले जाते हैं फिर भी उन्हें तय मेनू के अनुसार खाना नहीं मिलता है.
छात्रों ने मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार राकेश यादव के सामने अपनी चिंताएं रखीं. इसके बाद हॉस्टल के सभी छात्रों की ओर से उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) को एक ज्ञापन सौंपा गया. इस ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, हॉस्टल अधीक्षक को हटाने और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है. छात्रों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि वे हॉस्टल में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, पीने के पानी की व्यवस्था और सरकार द्वारा तय किए गए मेनू के पालन की जांच करें. अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और हॉस्टल की स्थितियों को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है.
छात्रों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह का समझौता होना बेहद चिंता का विषय है. अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस ज्ञापन को कितनी गंभीरता से लेता है, जिम्मेदार अधीक्षक के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है, और हॉस्टल की जर्जर हालत में कब सुधार किया जाता है.
मनोज जैन की रिपोर्ट