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पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने वारसॉ में कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के दफ्तरों में छापेमारी का आदेश दिया है. इस घटना के बाद, राष्ट्रपति कैरोल नवा्रोकी को अपनी उड़ान के बीच से ही विमान वापस मोड़ना पड़ा. यूरोपीय मीडिया के मुताबिक, यह अदालत तय करती है कि संसद के बनाए गए कानून पोलैंड के संविधान के मुताबिक हों.
पोलैंड की सरकार और ट्रिब्यूनल के टॉप जजों के बीच बढ़ते टकराव के बीच, वहां दंगा-रोधी पुलिस को तैनात किया गया है. यह विवाद प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और उनके पूर्ववर्ती, दक्षिणपंथी 'लॉ एंड जस्टिस' (PiS) पार्टी के नेताओं के बीच है.
पुलिस की यह तैनाती तब हुई, जब न्याय मंत्री वाल्डेमार जुरेक ने कहा कि उन्होंने ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष बोगदान श्विएचकोव्स्की और उपाध्यक्ष बार्टलोमी सोचांस्की को मिली कानूनी छूट (इम्युनिटी) को हटाने का अनुरोध किया है, ताकि उन पर आपराधिक आरोप लगाए जा सकें.
प्रधानमंत्री टस्क ने जूडिशरी को राजनीति से आजाद करने का वादा किया है. शुक्रवार को, जब वारसॉ में अदालत परिसर के बाहर PiS समर्थक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब टस्क ने इस कदम का बचाव किया.
PiS समर्थित कैरोल नवाप्रोकी, अपने चीफ ऑफ स्टाफ के अनुसार, अब संवैधानिक न्यायालय के अंदर पहुंच गए हैं. नवाप्रोकी ने वारसॉ में चल रहे इस टकराव को संभालने के लिए सेनेगल की अपनी यात्रा को बीच रास्ते से ही रद्द कर दिया. वे डकार में होने वाले 'समर यूथ ओलंपिक गेम्स' के लिए जा रहे थे. अदालत की इमारत में प्रदर्शनकारियों को घुसने से रोकने के लिए दंगा-रोधी पुलिस तैनात की गई थी.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, संवैधानिक न्यायालय ने लिखा कि जिन दो जजों पर सरकार मुकदमा चलाना चाहती है, वे अभी भी अदालत के कानूनी रूप से नियुक्त सीनियर जज हैं.
अदालत ने कहा,'इन गतिविधियों में शामिल सभी लोग तख्तापलट का अपराध कर रहे हैं.'
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, टस्क ने लिखा: 'कानून के शासन को बहाल करना हमारा कर्तव्य है. 'लॉ एंड जस्टिस' पार्टी के वर्षों के अराजक शासन के बाद, यह एक मुश्किल और कभी-कभी दर्दनाक प्रक्रिया है, जिसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है. इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.'
PiS (पीआईएस) की अगुआई वाली सरकार 2015 में सत्ता में आई और उसने अदालत में बहुमत हासिल करने के लिए तेजी से जजों की नियुक्ति की, क्योंकि अदालत के पास कानूनों की वैधता पर फैसला करने की ताकत है.
यूरोप की अहम अदालतों-यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय और यूरोपीय संघ के न्यायालय ने बाद में फैसला सुनाया कि PiS के बहुमत ने तीन जजों को गलत तरीके से चुना था, क्योंकि वे उन पदों पर नियुक्त किए गए थे जिन्हें पिछली संसद की ओर से पहले ही वैध तरीके से भरा जा चुका था.
यूरोपीय अदालतों ने फैसला दिया कि पोलैंड का संवैधानिक न्यायालय अब एक 'स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायाधिकरण' नहीं रहा. टस्क की सरकार ने इन्हीं फैसलों का हवाला देते हुए इस न्यायाधिकरण के फैसलों को पब्लिश करना बंद कर दिया है.
टस्क PiS के दौर में किए गए बदलावों को पलटने में नाकाम रहे हैं. इसका एक कारण यह है कि नवाक्रोकी और उनके पूर्ववर्ती आंद्रेज डुडा (जिन्हें PiS का समर्थन हासिल था) ने अपने राष्ट्रपति वीटो का इस्तेमाल करके टस्क की कोशिशों को रोक दिया.
नवाक्रोकी ने मार्च के बाद संसद की ओर से चुने गए संवैधानिक न्यायालय के पांच जजों को शपथ दिलाने से भी इनकार कर दिया है. उनका तर्क है कि इन जजों के चयन की प्रक्रिया में कमियां थीं.