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आमतौर पर आंखों में जलन या कुछ चुभने जैसा महसूस होने पर लोग इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन दक्षिण कोरिया के एक बुजुर्ग किसान के साथ ऐसा करना भारी पड़ सकता था. 71 साल के इस शख्स को करीब दो महीने से दोनों आंखों में परेशानी हो रही थी.
उसे आंखें लाल रहने, धुंधला दिखाई देने और पलकों के अंदर कुछ फंसा होने जैसा एहसास होता था. इसी बीच वह मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए अस्पताल पहुंचा. डॉक्टरों ने जब उसकी आंखों की जांच शुरू की तो मामला कुछ और ही निकला. उसकी आंख को देखकर एक बार को डॉक्टर भी हैरान रह गए.
कांगवॉन नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने जांच के दौरान देखा कि उसकी पलकों और आंखों के बीच की जगह में छोटे-छोटे कीड़े रेंग रहे थे. यह देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए. इसके बाद मरीज को लोकल एनेस्थीसिया दिया गया और बेहद सावधानी से आंखों से कीड़ों को निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई. डॉक्टरों ने बारीक चिमटी की मदद से कुल 11 जिंदा कीड़े बाहर निकाले. इनकी लंबाई करीब 11 से 20 मिलीमीटर के बीच थी.
आंखों से निकाले गए कीड़ों की माइक्रोस्कोप से जांच की गई. इसके बाद पता चला कि ये थिलाजिया कैलिपीडा (Thelazia callipaeda) नाम के परजीवी कीड़े हैं. ये आमतौर पर जानवरों में पाए जाते हैं और कभी-कभी इंसानों की आंखों को भी संक्रमित कर सकते हैं. इस मामले को और ज्यादा असामान्य बनाने वाली बात यह थी कि कुछ मादा कीड़ों के शरीर में अंडे भी मौजूद थे. वहीं, कुछ में लार्वा भी विकसित हो चुके थे. इससे पता चला कि ये कीड़े बुजुर्ग की आंखों में काफी समय से मौजूद थे और वहां प्रजनन की स्थिति तक पहुंच गए थे. इस केस की जानकारी 24 अक्टूबर को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' में प्रकाशित की गई थी.
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC के अनुसार, इस तरह के परजीवी कीड़े उन मक्खियों के जरिए इंसानों तक पहुंचते हैं, जो जानवरों और इंसानों की आंखों से निकलने वाले आंसू जैसे तरल पदार्थ पर बैठती हैं. इन मक्खियों के जरिए परजीवी के लार्वा आंखों तक पहुंच सकते हैं. इसके बाद वे धीरे-धीरे विकसित होकर बड़े कीड़े बन जाते हैं. कुत्ते और दूसरे कैनाइन जानवर इस परजीवी के मुख्य होस्ट माने जाते हैं. हालांकि, कभी-कभी इंसान भी इसकी चपेट में आ जाते हैं. इस संक्रमण को मेडिकल भाषा में 'थिलाजियासिस' कहा जाता है. इसकी वजह से आंखों में लालिमा, जलन, लगातार पानी आना और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
डॉक्टरों के लिए राहत की बात यह रही कि आंखों से सभी कीड़े निकालने के बाद बुजुर्ग की हालत में सुधार हुआ. इलाज करने वाली टीम के अनुसार, फॉलोअप जांच में दोबारा संक्रमण के कोई संकेत नहीं मिले. मामले की प्रमुख लेखिका और आंखों की डॉक्टर जी यून सॉन्ग ने बताया कि मरीज अब ठीक है. कीड़े निकलने के बाद उसकी आंखों की परेशानी भी दूर हो गई. अब उसके पहले से तय मोतियाबिंद के ऑपरेशन की तैयारी की जा सकती थी.
डॉक्टरों ने इस मामले के जरिए लोगों को एक जरूरी बात समझाने की कोशिश की है. आंखों में लगातार जलन, लालिमा या कुछ फंसा होने जैसा महसूस हो तो इसे मामूली परेशानी समझकर छोड़ना ठीक नहीं है. कई बार सामान्य दवाओं से आराम नहीं मिलता, क्योंकि परेशानी की असली वजह कुछ और हो सकती है. ऐसे में समय पर आंखों की जांच कराना जरूरी है. इस बुजुर्ग किसान का मामला भी यही बताता है कि आंखों से जुड़ी लगातार बनी रहने वाली परेशानी को हल्के में नहीं लेना चाहिए. समय पर जांच होने से न सिर्फ सही बीमारी का पता चलता है, बल्कि बड़ी समस्या से भी बचा जा सकता है.