)
मध्य प्रदेश के इंदौर के सबसे बड़े सरकारी एमवाय अस्पताल में सुरक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आई है. ओपीडी खुलने से पहले जब सफाई कर्मचारी ओपीडी परिसर पहुंचे, तो उन्होंने अंदर काले रंग का सांप रेंगते देखा. सांप को देखकर स्टाफ में हड़कंप मच गया. बाद में कर्मचारियों ने काफी मशक्कत के बाद सांप को ओपीडी से बाहर निकाला. इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जानकारी के मुताबिक, यह घटना न्यू ओपीडी की है. सुबह करीब 8 बजे स्टाफ के लोगों ने अस्पताल की खिड़की पर एक सांप देखा और तुरंत सिक्योरिटी गार्ड को इसकी सूचना दी. सांप को हटाने की कोशिशें की गईं, लेकिन वह काफी देर तक दरवाजे और फर्श पर घूमता रहा. आखिरकार, एक महिला गार्ड और दूसरे सिक्योरिटी स्टाफ की मदद से उसे बाहर झाड़ियों की तरफ भेज दिया गया. इस घटना से अफरा-तफरी मच गई.
एमवाय अस्पताल में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है. सात मंज़िला विशाल इमारत के चारों ओर काफी खुली जगह होने के कारण जानवर अक्सर परिसर में आ जाते हैं. पहले भी हॉस्पिटल के वार्डों में बिल्लियों और चूहों को बेरोकटोक घूमते हुए देखा गया है.
इस अस्पताल का इतिहास विवादों से भरा रहा है. लगभग छह महीने पहले अस्पताल परिसर में एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक घटना हुई थी, जिसमें चूहों ने नवजात शिशुओं के अंगों को कुतर दिया था. उस समय प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए सात से ज़्यादा कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था. इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने इससे कोई ठोस सबक नहीं सीखा है, जिससे मरीज़ों की सुरक्षा लगातार खतरे में बनी हुई है. प्रबंधन ने बाउंड्री वॉल, साफ-सफाई या कीड़े-मकोड़ों की रोकथाम के लिए कोई पक्का और मजबूत सिस्टम लागू नहीं किया. इस तरह मरीज़ों की जान को खतरे में डालने वाली घटनाओं का बार-बार होना अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है.
बता दें कि इंदौर का MY हॉस्पिटल न सिर्फ मालवा-निमाड़ बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण है. लेकिन, OPD में जहरीले सांप का मिलना और पहले नवजात शिशुओं को चूहों से नुकसान पहुंचने के मामले यह दिखाती हैं कि सिस्टम को सिर्फ कागजी कार्रवाई और स्टाफ को सस्पेंड करके बेहतर नहीं बनाया जा सकता. जब तक हॉस्पिटल मैनेजमेंट साफ-सफाई, सुरक्षा और कीड़े-मकोड़ों व चूहों से बचाव के लिए कोई मजबूत और पक्का मास्टर प्लान नहीं बनाता, तब तक हजारों मरीज़ों और डॉक्टरों की जान हमेशा खतरे में रहेगी. अब यह देखना बाकी है कि इस घटना के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन क्या ठोस कदम उठाते हैं.