सागर में मिथाइल अल्कोहल से मौत की आशंका, 12 से 24 घंटे बाद होता है असर; डॉक्टर से जानिए कितना है खतरनाक
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 30 से अधिक नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें से 10 आरोपियों को हिरासत में भी लिया जा चुका है. जहरीली पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है, जबकि 120 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है.
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है और करीब 120 से ज्यादा मरीजों का इलाज जारी है. इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में लगातार मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी जहरीली शराब पीने से हालत बिगड़ी है. संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. इसके बाद प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि किसी भी व्यक्ति में उल्टी, धुंधला दिखना, सिरदर्द या बुखार जैसे लक्षण दिखें, तो वह बिना समय गंवाए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे.
इस बीच सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार शुरुआती 2 से 3 शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिथाइल अल्कोहल (म्यूथैनॉल) के सेवन की आशंका जताई गई है. मरीजों के शरीर में नीलापन और अत्यधिक अकड़न जैसे गंभीर लक्षण देखे गए हैं. आखिर यह मिथाइल अल्कोहल क्या है और कितना खतरनाक है? यह शरीर में जाकर जहर कैसे बनता है और इसके लक्षण इतनी देर से क्यों सामने आते हैं. चलिए आपको आसान भाषा में समझाते हैं.
क्या होता है मिथाइल अल्कोहल और यह जहरीली शराब में कैसे पहुंचता है?
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिदुपुर (वैशाली) में पोस्टेड डॉ. ब्रजनंदन पासवान ने बताया कि मिथाइल अल्कोहल यानी म्यूथैनॉल (Methyl Alcohol या Methanol) एक तीखा, पारदर्शी और जहरीला केमिकल है, जिसका उपयोग केवल औद्योगिक कार्यों जैसे पेंट, वार्निश, एंटीफ्रीज और सॉल्वेंट्स में होता है. अवैध शराब कारोबारी शराब को ज्यादा स्ट्रॉन्ग बनाने और लागत कम करने के लिए इसमें औद्योगिक मिथेनॉल मिला देते हैं. स्वाद और गंध में मिथाइल एथिल अल्कोहल जैसी ही लगती है, इसलिए पीने वाले को इसके जहरीले होने का अंदाजा तुरंत नहीं हो पाता.
शरीर में कितनी देर में दिखता है मिथाइल अल्कोहल का असर?
डॉ. ब्रजनंदन पासवान ने बताया कि मिथेनॉल का सबसे खतरनाक पहलू इसका 'लेटेंट पीरियड' है. मिथेनॉल जब शरीर के अंदर जाता है, तो शुरुआत में केवल सामान्य नशा महसूस होता है. असली तबाही तब शुरू होती है जब यह लीवर में पहुंचता है. लीवर का 'एंजाइम' मिथेनॉल को तोड़कर 'फॉर्मिक एसिड' और फॉर्मेल्डिहाइड में बदल देता है. मिथेनॉल को जहरीले फॉर्मिक एसिड में बदलने में 12 से 24 घंटे का समय लगता है. इसी वजह से शराब पीने के कई घंटों बाद तक व्यक्ति सामान्य महसूस करता है और जब तक लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक शरीर के अंदरूनी अंगों को भारी नुकसान पहुंच चुका होता है.
शरीर नीला क्यों पड़ता है और मिथाइल अल्कोहल के क्या-क्या होते हैं लक्षण?
सागर मामले में कलेक्टर और डॉक्टरों ने बताया कि मरीजों का शरीर नीला पड़ा और उसमें अकड़न आई. डॉ. ब्रजनंदन पासवान के मुताबिक, मिथाइल अल्कोहल पीने के शुरुआती 6 घंटे में हल्का सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती और चक्कर आने की समस्या होती है, जो आमतौर पर सामान्य शराब के नशे जैसी होती है. 6 से 12 घंटे में आंखों के आगे अंधेरा या धुंधलापन छाने लगता है और फॉर्मिक एसिड ऑप्टिक नर्व (आंखों की नस) को सुखाने लगता है. 12 से 24 घंटे और इसके बाद कई मामलों में शरीर नीला पड़ने लगता है और सांसे लेने में तकलीफ के अलावा जोड़ों में कड़न होती है. ये समस्या खून में ऑक्सीजन की भारी कमी की वजह से होता है. फॉर्मिक एसिड शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन का उपयोग करने से रोक देता है, जिससे खून में ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता है और त्वचा का रंग नीला पड़ने लगता है.
मिथाइल अल्कोहल कितना जानलेवा है?
डॉक्टर के मुताबिक, मिथेनॉल की बेहद कम मात्रा भी जानलेवा साबित हो सकती है. केवल 10 से 30 ML मिथेनॉल पीने से इंसान हमेशा के लिए अंधा हो सकता है. 30 से 100 ML मिथेनॉल शरीर के अंदर जाते ही मल्टी-ऑर्गन फेलियर (लीवर, किडनी और ब्रेन डेड) कर देती है, जिससे 24 से 48 घंटे में मौत हो सकती है.
मेडिकल इमरजेंसी होने पर तुरंत क्या करें?
सागर प्रशासन ने प्रभावित गांवों और आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी किया है और लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है. यदि किसी ने पिछले 24-48 घंटों में शराब पीया है और उसे उल्टी, सिरदर्द या धुंधला दिख रहा है, तो तुरंत अस्पताल पहुंचे. अस्पताल में समय रहते मिथेनॉल को जहर में बदलने से रोका जा सकता है. गंभीर मरीजों के खून से फॉर्मिक एसिड को बाहर निकालने के लिए तुरंत 'इमर्जेंसी डायलिसिस' की जरूरत पड़ सकती है.