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रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा इलाके में स्थित बधवार पहाड़ आज देश के बड़े सौर ऊर्जा केंद्रों में अपनी पहचान बना चुका है. कभी यहां भारतीय सेना के युद्ध अभ्यास और तोपों की गड़गड़ाहट सुनाई देती थी, लेकिन आज हजारों सोलर पैनलों से ढका यह पहाड़ देश को स्वच्छ ऊर्जा देने में अहम भूमिका निभा रहा है.
यहां से बनने वाली बिजली दिल्ली मेट्रो तक पहुंचती है, लेकिन विडंबना देखिए कि इसी परियोजना के आसपास बसे गांवों के लोग आज भी बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं. जिस जमीन से देश को रोशनी मिल रही है, उसी के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का जीवन अंधेरे में रहने को मजबूर है.
बता दें कि बधवार पहाड़ पर करीब 1590 हेक्टेयर जमीन में स्थापित अल्ट्रा मेगा सोलर पावर प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 750 मेगावाट है. इसे 250-250 मेगावाट की तीन इकाइयों में विकसित किया गया है. हजारों सोलर पैनलों के जरिए यहां सूर्य की रोशनी से बिजली का उत्पादन किया जाता है, जिसका एक हिस्सा दिल्ली मेट्रो को भी उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन इस चमकदार तस्वीर का दूसरा पहलू भी है.
इस परियोजना से कई गांव ऐसे हैं, जिन पर भारी प्रभाव पड़ रहा है. इनमें डढ़वा, बरसयता, इटार, तमारा, बधवार और मनीकवार सहित आसपास के गांव शामिल बताए जा रहे हैं. इन गांवों के ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना की स्थापना के दौरान उन्हें 24 घंटे बिजली, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ.
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उनके क्षेत्र में 750 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, तो फिर आसपास के गांवों को नियमित बिजली क्यों नहीं मिल पा रही? स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि परियोजना में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के दावे किए गए थे, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला. वहीं, ग्रामीणों ने सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद गर्मी की तपन बढ़ने की बात भी कही है.
इस परियोजना का असर किसानों की जिंदगी पर भी पड़ने का दावा किया जा रहा है. किसानों का कहना है कि सोलर प्लांट का क्षेत्र उनके घर और खेतों के बीच आ जाने से खेतों तक पहुंचने का रास्ता काफी लंबा हो गया है. जहां पहले खेत घर से कुछ ही दूरी पर थे, वहीं अब कई किसानों को खेत तक पहुंचने के लिए 15 से 20 किलोमीटर तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना स्थापना के दौरान रास्ते की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक स्थायी समाधान नहीं हो सका. इस समस्या को लेकर स्थानीय विधायक की ओर से भी कई बार पत्राचार किया गया, बावजूद इसके किसानों को राहत नहीं मिली. ग्रामीणों का दावा है कि रास्ते की समस्या के चलते कई परिवारों के सामने खेती और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है.
बधवार पहाड़ पर लगे हजारों सोलर पैनल देश को स्वच्छ ऊर्जा देने की कहानी बयां कर रहे हैं, लेकिन इनके आसपास बसे गांवों की तस्वीर कुछ अलग नजर आती है. ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना स्थापित होने के बावजूद उन्हें विकास का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया. अपनी समस्याओं को लेकर ग्रामीण लगातार प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं और अब उन्होंने कलेक्टर के सामने भी अपनी बात रखी है.
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जब यह मामला मामला रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के पास पहुंचा तो उन्होंने कहा कि यह विषय अभी उनके संज्ञान में आया है. यदि ग्रामीणों को वास्तव में इस तरह की समस्याएं हैं, तो उनके प्रतिवेदन के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी और समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
(रिपोर्टः अजय मिश्रा, रीवा)