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मध्य प्रदेश के रीवा शहर में खाद्य सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. शहर के पडरा मोहल्ले स्थित एक होटल में टॉयलेट के पानी से फास्ट फूड तैयार किए जाने का खुलासा हुआ है. खाद्य विभाग की जांच में सामने आई इस गंभीर लापरवाही ने जनस्वास्थ्य और होटल प्रबंधन के कामकाज के तरीकों को लेकर बड़ी चिंताएं खड़ी कर दी हैं. बताया जा रहा है कि लोग यहां का फास्ट फूड बड़े चाव से खाते थे, जबकि उन्हें इस बात की बिल्कुल भी भनक नहीं थी कि इसे बनाने में किस तरह के पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है.
इस खुलासे के बाद खाद्य विभाग ने संबंधित होटल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. विभाग ने होटल का लाइसेंस रद्द करने और उसका कामकाज बंद कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस खुलासे से इलाके में हड़कंप मच गया है. सवाल यह उठता है कि जो प्रतिष्ठान लोगों की सेहत के साथ इतनी लापरवाही से खिलवाड़ करते हैं, उन पर पहले से निगरानी क्यों नहीं रखी गई? क्या अब खाद्य विभाग शहर के अन्य होटलों और फास्ट-फूड आउटलेट्स की भी जांच करेगा, या यह कार्रवाई सिर्फ इसी एक प्रतिष्ठान तक सीमित रहेगी?

इस घटना के सामने आने से पूरे इलाके और शहर के निवासियों के बीच भारी आक्रोश और चिंता फैल गई है. इस खुलासे ने खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर जनस्वास्थ्य के प्रति इतनी घोर लापरवाही इतने लंबे समय तक कैसे चलती रही? स्थानीय नागरिकों ने अब प्रशासन से मांग की है कि वे अपनी कार्रवाई को केवल इसी एक होटल तक सीमित न रखें, बल्कि शहर के अन्य सभी होटलों और सड़क किनारे खाने-पीने का सामान बेचने वालों की भी गहन जांच करें.
आज के समय में बाहर का खाना खाते समय सावधानी बरतना और अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहना बहुत जरूरी हो गया है. रीवा जैसी घटनाएं यह आईना दिखाती हैं कि कई बार स्वाद के पीछे छिपी लापरवाही हमारे जीवन और स्वास्थ्य के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकती है. ऐसे में खाद्य विभाग और प्रशासन द्वारा उठाए गए सख्त और निर्णायक कदम आम जनता की सेहत की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी हैं. यह जरूरी है कि इस तरह की कार्रवाई केवल किसी एक जगह तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे राज्य में सभी खाद्य-सेवा प्रतिष्ठानों की नियमित और पारदर्शी जांच होनी चाहिए.
रीवा से अजय मिश्रा की रिपोर्ट