MP में पेपर लीक का अंत? 4 फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएगी सरकार, व्यापमं से पटवारी भर्ती तक जानिए कब-कब हुई धांधली
Paper Leak In MP: मध्य प्रदेश सरकार ने परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक होने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए चार फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का फैसला किया है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में इसका गठन किया गया है.
युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई घोषणाओं के अनुरूप राज्य सरकार ने चार प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन किया है. मध्य प्रदेश ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. ये विशेष अदालतें भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, धोखाधड़ी और अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाएंगी.
3 महीने के अंदर ट्रायल पूरा करने का टारगेट
सरकार ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ही ट्रायल पूरे कर लिए जाएंगे, ताकि आरोपियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके. इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए विशेष सरकारी अभियोजक (Special Public Prosecutors) नियुक्त किए गए हैं. साथ ही निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हर जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है.
जानिए कब-कब लीक हुआ पेपर
2009 में शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है. इसकी शुरुआत 2009 में व्यापम (मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड) के तहत हुए PMT पेपर लीक से हुई, जो आगे चलकर 2013 में सामने आए बड़े व्यापम घोटाले में तब्दील हो गई. इस घोटाले में 13 अलग-अलग परीक्षाओं मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं से लेकर पुलिस भर्ती तक में गड़बड़ियां हुईं, जिससे लगभग 32 लाख छात्र प्रभावित हुए. इस मामले में 2,000 गिरफ्तारियां हुईं और 23 संदिग्ध मौतें हुईं. इसे भारत का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला माना जाता है.
2009 से 2025 तक की टाइमलाइन
व्यापम का नाम बदलकर MPPEB/MPESB कर दिया गया, लेकिन खेल वही रहा. साल 2020 से 2026 के बीच 73 परीक्षाएं आयोजित की गईं, जिनमें से 12 से ज्यादा परीक्षाओं में पेपर लीक या धोखाधड़ी के मामले सामने आए. 2021 में कृषि और नर्सिंग क्षेत्रों की तीन बड़ी भर्ती परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, क्योंकि उनके प्रश्न-पत्र सीधे सर्वर से ही चुरा लिए गए थे.
20 से अधिक परीक्षाओं में गड़बड़ी
MPTET ग्रेड-3 परीक्षा का पेपर एक ट्रेन में बेचा जा रहा था, जबकि MP बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा की छह परीक्षाओं के पेपर परीक्षा शुरू होने से 50 मिनट पहले ही एक टेलीग्राम ग्रुप पर लीक हो गए. 2023–2025 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया SIT जांच के दायरे में आ गई, और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के पेपर भी व्हाट्सएप पर धड़ल्ले से घूमने लगे. कुल मिलाकर 2009 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश में 20 से अधिक सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं और बोर्ड परीक्षाओं पर पेपर लीक का असर पड़ा है.
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि तीन महीने के भीतर ट्रायल को पूरा करने के उद्देश्य से फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना से अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा होगा. पहले अदालतों में लंबी कानूनी प्रक्रियाओं के कारण अक्सर आरोपी जमानत पर छूट जाते थे, जबकि मामले सालों तक लंबित रहते थे. हालांकि, विशेष जांच दल (SIT) द्वारा त्वरित जांच और फास्ट-ट्रैक अदालतों के फैसलों से न केवल पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं का सरकारी परीक्षा प्रणाली पर भरोसा भी बहाल होगा.