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Station Master Vinod Chaudhary: आमतौर पर आपने मूर्तिकारों को भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाते हुए देखा होगा, लेकिन इटारसी जंक्शन के स्टेशन मास्टर विनोद चौधरी पिछले करीब 15 वर्षों से अपनी ड्यूटी के साथ-साथ मिट्टी के गणेश भगवान की मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि वे हर साल इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार कर लोगों को फ्री में बांटते हैं. इस बार इसकी थीम BRICS से जोड़कर रखा गया है.
दरअसल, दिल्ली में आयोजित BRICS समिट की थीम को गणेश प्रतिमाओं के जरिए खास अंदाज देखने को मिला है. प्रतिमाओं के बेस पर BRICS से जुड़े चार सिद्धांतों को उकेरा जा रहा है. इसके साथ ही 'स्वच्छ जल', 'सुंदर भारत', 'सुंदर पृथ्वी' और 'स्वच्छ वायु' जैसे संदेशों वाले स्लोगन भी लिखे जा रहे हैं. इन प्रतिमाओं के जरिए लोगों को पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है. इसका मकसद है कि आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी घर-घर तक पहुंचाना है.
गणेश प्रतिमाओं की खासियत
इन गणेश प्रतिमाओं की खास बात यह है कि सिर्फ उनकी थीम ही नहीं है. प्रतिमाओं में गणेश जी के हाथ में सीड बॉल भी रखी जा रही है. इनमें मीठी नीम, सहजन और जामुन सहित अलग-अलग पौधों के बीज रखे गए हैं. प्रतिमा के विसर्जन के बाद जब इन बीजों को मिट्टी और नमी मिलेगी तो इनके अंकुरित होकर पौधे बनने की संभावना है. इस तरह गणपति की विदाई के बाद भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश जारी रहेगा.
इस बार 251 मूर्ति बनाने का लक्ष्य
बता दें कि इस बार विनोद चौधरी ने 251 मिट्टी के गणेश बनाने का लक्ष्य रखा है. हालांकि, पिछले वर्षों में वे करीब 500 प्रतिमाएं तक तैयार कर चुके हैं. अब तक 200 से अधिक प्रतिमाएं तैयार हो चुकी हैं. खास बात यह है कि इन प्रतिमाओं को बेचा नहीं जाएगा, बल्कि लोगों को फ्री में बांटा जाएगा. स्टेशन मास्टर की इस पहल का मकसद लोगों की आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना और मिट्टी के गणेश की स्थापना के लिए लोगों को प्रेरित करना है.
24 घंटे बनाई जा रही हैं प्रतिमाएं
स्टेशन मास्टर विनोद चौधरी का कहना है कि प्रतिमाएं तैयार करने का काम पिछले करीब 8 से 10 दिनों से लगातार चल रहा है. शिफ्ट के अनुसार एक समय में 5 से 7 लोग इस काम में जुटे रहते हैं. इसमें ड्यूटी पर तैनात रेलवे कर्मचारी, परिवार के सदस्य और आसपास के पड़ोसी व मोहल्ले के लोग भी सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रतिमाएं तैयार करने में पूरी तरह से मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि विसर्जन के बाद जल प्रदूषण न हो.
क्या कहते हैं स्टेशन मास्टर?
स्टेशन मास्टर विनोद चौधरी का कहना है कि, हम पिछले लगभग 15 साल से माटी के गणेश बना रहे हैं. प्योर माटी से हम हर साल करीब 400, 251 या 301 गणेश प्रतिमाएं बनाने का लक्ष्य रखते हैं. इस बार हमने 251 मिट्टी के गणेश बनाने का लक्ष्य लिया है. उन्होंने कहा कि हर साल गणेश प्रतिमाओं के जरिए पर्यावरण संरक्षण, मतदान या किसी अन्य सामाजिक विषय को लेकर संदेश देने का प्रयास किया जाता है, ताकि ये बातें ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकें.
लोगों को संदेश देने का प्रयास
विनोद चौधरी ने आगे बताया कि, इस बार हमने BRICS की थीम रखी है. BRICS से जुड़े चार सिद्धांतों को हमने गणेश प्रतिमाओं के बेस पर उकेरा है. इसके साथ ही स्वच्छ जल, सुंदर भारत, सुंदर पृथ्वी और स्वच्छ वायु जैसे विषयों पर अलग-अलग स्लोगन लिखकर लोगों को संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद अपने शहर और आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित रखने के लिए लोगों को जागरूक करना है. इसके लिए पक्षियों, पशुओं और पेड़ों से जुड़े संदेश भी प्रतिमाओं के माध्यम से दिए जा रहे हैं. विनोद चौधरी ने कहा कि, हमारा प्रयास है कि मिट्टी के गणेश बनाए जाएं, ताकि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन से जल प्रदूषित न हो.