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मध्य प्रदेश के अस्पतालों में सफाई व्यवस्थाओं से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं दमोह के जिला अस्पताल का भी यही हाल है. आलम ये है कि मरीजों के तीमारदार हैं, उन्हें सफाई करनी पड़ रही है. इस अस्पताल का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
इस वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि एक मां को वार्ड के अंदर साफ-सफाई करनी पड़ रही है. यह महिला अपने बेटे का इलाज कराने के लिए अस्पताल आई थी. जब यह वीडियो वायरल हुआ तो सियासत शुरू हो गई. वहीं पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने वीडियो शेयर कर सरकार पर हमला बोला.
ZEE मीडिया की पड़ताल
वीडियो की पड़ताल करने के लिए ZEE मीडिया की टीम अस्पताल पहुंची. तब वहां बाकायदा सफाई होते दिखाई दी. लेकिन अस्पताल के अंदर के हाल जाना तो पता चला कि महिलाओं के लिए बनाए गए टायलेट कई दिनों से बंद पड़े मिले. महिलाएं यहां वहां भटकती हुई दिखाई दी.
व्हील चेयर की भी समस्या
इतना ही नहीं वार्डों के भीरत गंदगी का आलम यह था कि अस्पताल में व्हील चेयर तो है लेकिन उसे चलाने के लिए स्टाफ तक नहीं मिला. इसके अलावा, वहां तीमारदार खुद अपने मरीज को लेकर भटकते दिखाई दिए. मरीजों को इधर-उधर ले जाने के लिए अन्य मरीजों का इंतजार करते हैं. परिजन मरीजों के पीछे-पीछे भागते हैं. ताकि व्हील चेयर खाली हो, उसे लेकर चले जाते हैं.
पांच दिन से बाथरूम बंद
वहीं जब ZEE मीडिया की टीम ने मरीजों के परिजनों से बात की तो उन्होंने बताया कि यहां पर बाथरूम पांच दिन से बंद है. हम लोगों को बहुत दिक्कतें हो रही है. गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कतें हो रही हैं. एक और परिजन ने बताया कि व्हील चेयर नहीं मिलती है. एक-एक घंटा तक गाढ़ी को ढूंढते रहते हैं. यहां पर कोई स्टाफ का आदमी नहीं आता है.
दो दिन तक इलाज नहीं
एक अस्थमा के मरीज ने बताया कि सांस लेने में दिक्कत थी. उन्होंने आगे कहा कि पर्ची बनवाने के लिए कल से लेकर आज तक इसी में निकल गया है. दो दिन हो गए हैं. अभी तक मेरा कोई भी इलाज नहीं हो पाया है. रात भर मुझे नीचे फर्श पर पड़े रहना पड़ा. इसके बावजूद अब भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. डॉक्टर साहब आए थे, उन्होंने इलाज लिखकर खुद बोला था कि 'इसे पलंग दो और लेटाओ'. लेकिन वहां मौजूद नर्स लोग कोई मदद नहीं कर रही हैं. न ही कोई व्यवस्था कर रही हैं.
कब से कब तक सफाई?
जब सफाई को लेकर सफाई कर्मियों से बात की गई. इसको लेकर एक महिला सफाईकर्मी ने बताया कि सुबह 7 बजे से लेकर 2 बजे तक ड्यूटी करती हैं. उन्होंने कहा कि कोई निश्चित जगह तय नहीं है. इसलिए सभी वार्डों में सफाई करती हैं. अगर किी वार्ड में सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचता है, तो वहां जाकर भी सफाई करती हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में नियमित रूप से सफाई की जाती है. सुबह सफाई करने के बाद 11 से 12 बजे के आसपास सफाई होती है.
पिछले महीने का वीडियो
वहीं जब ZEE NEWS की टीम ने अस्पताल के प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह से बात की, तो उन्होंने बताया कि अस्पताल NQA के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप क्वालिफाइड है. इसलिए सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है. जिससे अस्पताल में संक्रमण न फैले. साथ ही मरीजों को स्वच्छ वातावरण और सभी जरूरी सुविधाएं मिलें. उन्होंने वायरल वीडियो पर कहा कि पिछले महीने का पुराना वीडियो है.
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सुपरवाइजर को नोटिस
सुरेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि जांच में पता चला है कि किसी भी स्टाफ ने मरीज के तीमारदार को सफाई करने के लिए नहीं कहा था. आगे बताया कि SBO में तैनात सफाईकर्मी विद्या ने अपनी मर्जी से वहां पर पोछा लगाया था. इतना ही नहीं अधिकारी ने यह भी दावा कि स्टाफ तीनों शिफ्टों में लगातार सफाई करता है. वीडियो में महिला ने स्टूल की सफाई के दौरान कुछ छींटे रह जाने पर खुद ही सफाई की थी. उन्होंने कहा कि इस मामले में सफाई सुपरवाइजर को नोटिस दिया गया है.
(रिपोर्टः महेंद्र दुबे, दमोह)