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मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार आगामी 13 दिसंबर को अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करने जा रही है. इस मौके को खास बनाने और सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा सीधे जनता तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है. इसके तहत राज्य सरकार अपने पिछले तीन सालों की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाएगी. जिसके लिए अलग-अलग विभागों की उपलब्धियों की एक विशेष बुकलेट तैयार की जाएगी.
इस अभियान को सफल बनाने और जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. सभी प्रभारी मंत्री, सांसद और विधायक स्थानीय स्तर पर अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे, जिनमें सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे और विकास कार्यों की जानकारी देंगे.
मंत्रियों के जनता के बीच जाने से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उनके कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा करेंगे और रिपोर्ट तैयार करेंगे. इस आंतरिक समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत खुद मुख्यमंत्री से होगी, जो सबसे पहले अपने पास मौजूद विभागों का विस्तृत ब्यौरा और प्रगति रिपोर्ट तैयार करेंगे. इसके बाद अन्य मंत्रियों के विभागों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा. इसकका मकसद विकास कार्यों में रह गई कमी को समय रहते ठीक करना है.
तीन साल के इस कार्यकाल के दौरान सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, सुशासन, महिला सशक्तिकरण, कृषि और रोजगार जैसे क्षेत्रों में कई बड़े नीतिगत निर्णय लिए हैं. अब इन उपलब्धियों को जनता के सामने रखकर सरकार 2027 के भावी लक्ष्यों और 'विकसित मध्य प्रदेश' के रोडमैप को गति देने की तैयारी में जुट गई है.
मध्य प्रदेश की सियासत में जल्द ही बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं, जहां प्रदेश के प्रभारी मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव किया जा सकता है. मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों में बदलाव और प्रभार के जिले बदलने को लेकर मध्य प्रदेश ने केंद्रीय संगठन को प्रस्ताव दिए थे. हालांकि, इसमें से अभी सिर्फ प्रभार के जिले बदलने को लेकर मंजूरी मिली है. दिसंबर के पहले पखवाड़े तक प्रभार के जिले बदले जाने की योजना है और इसके बाद नए साल में मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा होगी. (इनपुट- रंजन भगत)