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Amazon में छंटनी का भूत एक बार फिर से जाग उठा है. बुधवार की सुबह-सुबह कर्मचारियों के फोन की घंटी बजी और इनबॉक्स में एक ऐसा ईमेल आया जिसने उनकी दुनिया ही हिलाकर रख दी. सबसे हैरानी की बात यह है कि यह छंटनी ठीक उसी दिन हुई जिस दिन अमेजन ने अपने नए और धमाकेदार Alexa डिवाइसेज मार्केट में उतारे. आखिर क्या है इस अचानक हुई छंटनी के पीछे का असली कारण और क्यों अमेजन के ही इंजीनियर्स अब टेंशन में आ गए हैं?
सुबह-सुबह आया HR का वो खौफनाक ईमेल
रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, अमेजन ने अपने 'डिवाइसेज एंड सर्विसेज' (Devices and Services) डिपार्टमेंट से करीब 250 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. यह वही डिपार्टमेंट है जो Kindle ई-रीडर्स, फायर टैबलेट्स और हमारे-आपके घरों में इस्तेमाल होने वाले Echo डिवाइसेज बनाता है.
हमेशा की तरह इस बार भी छंटनी का तरीका काफी ठंडा और अचानक था. बुधवार (28 अक्टूबर) की सुबह कर्मचारियों को टेक्स्ट मैसेज और ईमेल भेजे गए. डिवाइसेज एंड सर्विसेज की एचआर वाइस प्रेसिडेंट चेरी रॉबिन्सन (Cherie Robinson) की तरफ से भेजे गए इस मेल में लिखा था कि कंपनी ने "thorough review of our structure" की है, जिसके चलते कुछ रोल्स को खत्म करने का यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है. कंपनी का कहना है कि इस कदम से उन्हें ज्यादा कुशलता से काम करने और अपने प्रॉडक्ट रोडमैप के साथ तालमेल बिठाने में मदद मिलेगी.
सॉफ्टवेयर डेवलपर्स पर पड़ी सबसे गाज
इस छंटनी का सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगा है जो दिन-रात कोडिंग करके नए-नए फीचर्स तैयार करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, जिन 250 लोगों की नौकरी गई है, उनमें से ज्यादातर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम्स के हिस्से थे. कर्मचारियों के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा था क्योंकि अभी कुछ ही महीने पहले, यानी अक्टूबर में कंपनी ने 14,000 लोगों को निकाला था. जब जनवरी में बड़ी छंटनी हुई थी, तब कंपनी की पीपल एक्सपीरियंस एंड टेक्नोलॉजी की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बेथ गैलेटी (Beth Galetti) ने कहा था कि इसका मकसद कंपनी में नौकरशाही (bureaucracy) को खत्म करना और काम में तेजी लाना है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि कंपनी का हर कुछ महीनों में बड़ी कटौती करने का कोई प्लान नहीं है, लेकिन हर टीम अपनी जरूरतों के हिसाब से बदलाव करती रहेगी. और देखिए, 3 महीने भी नहीं बीते कि फिर से वही कहानी दोहरा दी गई.
एक तरफ मातम, तो दूसरी तरफ नए Alexa डिवाइसेज का जश्न
जिस दिन 250 डेवलपर्स को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी, ठीक उसी दिन अमेजन अपनी नई टेक्नोलॉजी का ढोल पीट रहा था. कंपनी ने 5 नए Alexa-पावर्ड डिवाइसेज लॉन्च किए ताकि वह Apple और OpenAI जैसे दिग्गजों को टक्कर दे सके.
लॉन्च किए गए गैजेट्स की लिस्ट काफी लंबी और फैंसी है:
Echo Show 16: 16-इंच की बड़ी स्क्रीन, इन-बिल्ट फायर टीवी और नाइट विजन वाले कैमरे के साथ इसकी कीमत $499.99 (लगभग ₹42,000) रखी गई है.
New Echo Studio: $249.99 की कीमत वाला यह नया स्पीकर कमरे में रखी चीजों को पहचान सकता है और कैमरे के जरिए दूर बैठकर भी रूम पर नजर रखी जा सकती है.
Echo Dot ($99.99): इस बार इसमें इन-बिल्ट स्मार्ट होम हब और वाई-फाई एक्सटेंडर भी दिया गया है.
Echo Time ($199): यह एक बेडसाइड क्लॉक है जो बिना किसी वियरेबल डिवाइस के आपकी नींद को ट्रैक करती है और हल्की नींद में ही आपको जगा देती है.
Alexa Photo Frame ($199.99): यह आपके अमेजन फोटोज से अपने आप तस्वीरें सिंक करता है.
सोचने वाली बात यह है कि जो डेवलपर्स इन शानदार प्रोडक्ट्स को बनाने में लगे हुए थे, उन्हें ही प्रोडक्ट्स लॉन्च होने के दिन कंपनी ने अलविदा कह दिया.
अमेजन का इंजीनियर्स को खुला मेमो: "AI सीखो वरना पीछे छूट जाओगे"
छंटनी के इस नाटक के बीच एक और चीज सामने आई जिसने टेक वर्ल्ड में हलचल मचा दी है. अमेजन ने अपनी वेबसाइट पर एक पुराना मेमो पब्लिश किया जो सितंबर में उसके इंजीनियरिंग लीडरशिप द्वारा अपने सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को भेजा गया था. इस मेमो का टाइटल था: 'Update from Amazon engineering leadership on the role of the developer in the age of AI'.
इस मेमो में साफ़-साफ़ शब्दों में लिखा गया है कि अब यह मायने नहीं रखता कि डेवलपर कौन-सा टूल यूज कर रहा है, बल्कि सबसे ज्यादा मायने रखता है 'रिजल्ट' यानी आउटकम. मेमो में चेतावनी भरे लहजे में लिखा था: "हम सभी को इस बदलाव को अपनाना होगा और इसे सीखने के लिए समय निकालना होगा, वरना हम पीछे छूट जाने का जोखिम उठा रहे हैं. हम सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग पर AI के प्रभाव की सिर्फ शुरुआत देख रहे हैं. भविष्य की बेस्ट प्रैक्टिसेस चाहे जो भी हों, हम पक्का जानते हैं कि AI सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के केंद्र में होगा."
क्या AI सच में निगल रहा है आईटी सेक्टर की नौकरियां?
अमेजन की इस हालिया छंटनी और उनके इंजीनियरिंग मेमो को अगर एक साथ रखकर देखें, तो तस्वीर साफ हो जाती है. टेक कंपनियां अब उन कामों के लिए इंसानों पर निर्भरता कम कर रही हैं जिन्हें AI आसानी से कर सकता है. कोडिंग और टेस्टिंग जैसे बेसिक काम अब AI टूल्स मिनटों में निपटा रहे हैं.
जब कंपनियों को कम लोगों से ज्यादा आउटपुट मिलने लगता है, तो वे सबसे पहले सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीम्स का साइज छोटा करती हैं. यही वजह है कि 250 डेवलपर्स की यह छंटनी सिर्फ एक आंकड़े की बात नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में टेक इंडस्ट्री में टिके रहने के लिए डेवलपर्स को खुद को री-स्किल करना ही पड़ेगा.