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तालाब से प्रकट हुईं मूर्तियां: कोटा के वीर बालाजी धाम की अनोखी कहानी, दर्शन और अर्जी लगाने दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु

Veer Balaji Dham: राजस्थान के कोटा में केशवरायपाटन रोड स्थित वीर बालाजी प्रेतराज सरकार मंदिर धाम अपनी मान्यताओं और श्रद्धालुओं की आस्था के लिए जाना जाता है. मंदिर के इतिहास को लेकर मान्यता है कि यहां स्थापित मूर्तियां तालाब के भीतर से प्रकट हुई थीं. इसी मान्यता के चलते इस धाम से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. यहां कोटा, बूंदी सहित राजस्थान के कई जिलों से भक्त वीर बालाजी और प्रेतराज सरकार के दर्शन करने पहुंचते हैं. श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अर्जी भी लगाते हैं.

तालाब से प्रकट हुईं मूर्तियां: कोटा के वीर बालाजी धाम की अनोखी कहानी, दर्शन और अर्जी लगाने दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु
Image Credit: Kota Veer Balaji Dham

मंदिर के पुजारी देवेंद्र व्यास के अनुसार, शुरुआती दौर में मंदिर तक पहुंचने का रास्ता काफी संकरा था. उस समय श्रद्धालुओं को पानी के बीच से होकर मंदिर तक जाना पड़ता था. समय के साथ मंदिर का विकास हुआ और यहां आने-जाने की व्यवस्थाएं बेहतर होती गईं. धीरे-धीरे मंदिर का स्वरूप विकसित हुआ और आज यह धाम क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है.

परिसर में कई धार्मिक स्थल
वीर बालाजी और प्रेतराज सरकार के दरबार के अलावा मंदिर परिसर में शीतला माता, सती माता, भोलेनाथ और सागर जी महाराज से जुड़े धार्मिक स्थल भी हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु अलग-अलग मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं. भक्त परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. पुजारी देवेंद्र व्यास बताते हैं कि मंदिर में रोजाना श्रद्धालु आते हैं, लेकिन शनिवार को भक्तों की संख्या में खासा इजाफा होता है.

कोटा-बूंदी के अलावा दूसरे जिलों से भी आते हैं भक्त
इस धाम में केवल कोटा और बूंदी के ही श्रद्धालु नहीं पहुंचते, बल्कि छबड़ा, छीपाबड़ौद, झालावाड़, भीलवाड़ा, भवानीमंडी और रावतभाटा सहित दूर-दराज के इलाकों से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं. धार्मिक आयोजनों के दौरान मंदिर में विशेष उत्साह देखने को मिलता है. इन कार्यक्रमों में श्रद्धालु बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और पूजा-पाठ करते हैं.

नवरात्र और सावन में होते हैं विशेष आयोजन
मंदिर में नवरात्र के दौरान रामायण पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. वहीं, श्रावण मास में पूरे महीने अखंड रामायण पाठ होता है. इन आयोजनों के दौरान भक्त धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं. हनुमान जयंती पर भी मंदिर में विशेष आयोजन किया जाता है. इस अवसर पर 101 दीपक जलाए जाते हैं और हनुमान चालीसा के साथ सुंदरकांड का पाठ होता है.

सेवा भाव से शुरू हुआ मंदिर का विकास
पुजारी देवेंद्र व्यास के मुताबिक, मंदिर के निर्माण और विकास की शुरुआत सेवा भाव से मन में आए एक विचार के बाद हुई थी. इसके बाद धीरे-धीरे मंदिर का स्वरूप विकसित होता गया. आज यह धाम श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले भक्त वीर बालाजी और प्रेतराज सरकार के दर्शन कर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.
 

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About the Author

Ansh Raj

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अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
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