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न गोली, न दवा का इंजेक्शन, 5 फीट ऊपर उड़ा हेलीकॉप्टर और पकड़े गए फसलों को तबाह करने वाले हिरण; जानिए कैसे काम करती है ये तकनीक?

मध्य प्रदेश में किसानों की फसल बचाने और वन्यजीवों के सुरक्षित संरक्षण के लिए बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. शाजापुर जिले में खेतों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे काले हिरणों को पकड़ने के लिए हेलीकॉप्टर से हांका दिया जा रहा है और दक्षिण अफ्रीका से आई विशेषज्ञों की टीम हिरणों को पकड़ने में जुटी है.

न गोली, न दवा का इंजेक्शन, 5 फीट ऊपर उड़ा हेलीकॉप्टर और पकड़े गए फसलों को तबाह करने वाले हिरण; जानिए कैसे काम करती है ये तकनीक?

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे काले हिरणों से निजात दिलाने के लिए एक अनोखा और बेहद प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. किसानों की लंबे समय से यह शिकायत थी कि हिरणों के झुंड उनकी खेतों की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए वन विभाग ने एक खास रणनीति अपनाई है, जिसमें किसी भी वन्यजीव को बेहोश करने वाली गन या दवा के इंजेक्शन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. हिरणों को खास अफ्रीकी तकनीक के जरिए पकड़ा जा रहा है.

किसानों की फसल बचाने और वन्यजीवों के सुरक्षित संरक्षण के लिए दक्षिण अफ्रीका से आई विशेषज्ञों की टीम हिरणों को पकड़ने में जुटी है. काले हिरणों को पकड़ने के लिए हेलीकॉप्टर से हांका दिया जा रहा है. लंबे समय से हिरणों के झुंड से परेशान किसानों को राहत देने के लिए उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़कर कान्हा नेशनल पार्क में शिफ्ट करने की योजना पर काम किया जा रहा है.

अब तक किया गया 176 हिरणों का रेस्क्यू

शाजापुर जिले के कालापीपल विधानसभा में चल रहे हिरणों के रेस्क्यू का काम लगातार जारी है. क्षेत्र के हन्नुखेड़ी गांव में 3 दिन तक हेलीकॉप्टर की मदद से हांका देकर रेस्क्यू किया गया. दक्षिण अफ्रीका से आई टीम विधानसभा के पांचदेरिया गांव में बोमा तकनीक का उपयोग कर हिरणों का रेस्क्यू कर रही है. कई दिनों तक चलाए गए अभियान के दौरान अब तक कुल 176 हिरणों को रेस्क्यू कर अभयारण्य में पहुंचाया जा चुका है.

2000 हिरणों को सुरक्षित स्थान पहुंचाने का लक्ष्य

कालापीपल विधानसभा क्षेत्र में चलाया जा रहा यह अभियान 9 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 31 अक्टूबर तक चलाने की योजना है. इस बार 2,000 वन्यजीवों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. ग्रामीणों से संयम बनाए रखने और वन विभाग की टीम सहित अभियान में जुटे दक्षिण अफ्रीकी दल का सहयोग करने की अपील की.

जानिए कैसे काम करती है ये तकनीक?

हिरणों को पकड़ने के लिए दक्षिण अफ्रीका की 'बोमा' तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें करीब एक किमी लंबा गलियारा बनाया जाता है. इसका आकार V साइज की तरह होता है, जिसमें मुंह चौड़ा और अंतिम सिरा संकरा होता है. इसकी दीवारों के लिए लोहे के बजाय हरे-काले पर्दों, घास और झाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद हेलीकॉप्टर को जमीन से महज 2 से 5 फीट ऊपर उड़ाया जाता है. फिर हिरणों के झुंड को गलियारे की तरफ बढ़ाया जाता है  और सुरक्षित तरीके से ट्रकों के अंदर पहुंचाया जाता है.

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Pramod Sharma

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प्रमोद शर्मा ज़ी न्यूज़ में एसोसिएट एडिटर हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें एक दशक से अधिक का अनुभव है. अपनी बेबाक, तथ्यपरक और जमीनी रिपोर्टिंग के लिए पहचाने जाने वाले प्रमोद शर्मा ने देश के कई संवेदनशील मुद्दों पर ऐसी खोजी रिपोर्टें की हैं, जिन्होंने व्यापक जनचर्चा के साथ-साथ लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. उनकी चर्चित रिपोर्टों में बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति और उन पर होने वाले अत्याचार, पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के कथित अर्धधर्मांतरण जैसे विषय प्रमुख रहे हैं.प्रमोद शर्मा ज़ी न्यूज़ के लोकप्रिय चुनावी शो 'चुनावी दूरबीन' के होस्ट भी हैं. इस कार्यक्रम के माध्यम से वे चुनावी राज्यों की राजनीतिक नब्ज़, ज़मीनी समीकरण, मतदाताओं का मूड और सत्ता की वास्तविक तस्वीर दर्शकों तक सरल और तथ्यात्मक अंदाज में पहुंचाते हैं. उन्होंने पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार, जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ सहित देश के कई राज्यों में व्यापक ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन किए हैं. उनकी कई खोजी रिपोर्टों ने प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को उजागर किया और संबंधित सरकारों व एजेंसियों को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया.यदि आप प्रमोद शर्मा से सीधे जुड़ना चाहते हैं, तो उन्हें ईमेल कर सकते हैं: Pramod2.sharma@zeemedia.com. इसके अलावा इंस्टाग्राम (@Zee_Pramod) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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