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न तंबाकू, न शराब... MP के इस गांव में नहीं बिकता एक भी नशे का सामान, हर घर में है सरकारी नौकरी!

MP News: नीमच जिले के जनकपुर गांव में नशा वर्जित है. यहां किसी भी किराने की दुकान पर तंबाकू या उससे जुड़े उत्पाद नहीं बेचे जाते हैं. इसी वजह से यह गांव शिक्षा और नशा-मुक्ति के क्षेत्र में देश के लिए एक बेहतरीन मिसाल बन गया है.

न तंबाकू, न शराब... MP के इस गांव में नहीं बिकता एक भी नशे का सामान, हर घर में है सरकारी नौकरी!
Image Credit: MP के इस गांव में नहीं बिकता एक भी नशे का सामान- (Photo Ai)

मध्य प्रदेश के नीमच जिले में स्थित जनकपुर गांव अपनी अनोखी खूबियों की वजह से आजकल पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. लगभग 1,200 की आबादी वाला यह छोटा सा गांव शिक्षा में कामयाबी, ऊंचे ओहदे वाली पेशेवर नौकरियों और नशे से पूरी तरह आजाद होने का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो बड़े और विकसित महानगरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है. इस गांव की पहचान यहां के पढ़े-लिखे लोगों से है. यहां हर घर में कम से कम एक व्यक्ति सरकारी शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर या सिविल सर्वेंट है. खास बात यह है कि कहा जाता है कि इस गांव का कोई भी निवासी किसी भी तरह का नशा नहीं करता है.

हर घर में है सरकारी नौकरी
इस गांव की एक खास बात यह है कि यहां लगभग हर घर का कोई न कोई सदस्य सरकारी नौकरी में है. उदाहरण के तौर पर, इसी गांव के युवराज पाटीदार वर्तमान में भोपाल में जीएसटी विभाग में डिप्टी कमिश्नर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां का कोई भी निवासी किसी भी तरह का नशा नहीं करता. हैरानी की बात तो यह है कि पूरे गांव में एक भी ऐसी किराने की दुकान नहीं है जहां तंबाकू या तंबाकू से बनी नशे की कोई चीजें बिकती हों.

गांव में नहीं बिकता एक भी नशे का सामान
जहां केंद्र और राज्य सरकारें नशा-विरोधी अभियान चलाने के लिए काफी कोशिशें कर रही हैं, वहीं जनकपुर गांव के लोगों ने बिना किसी बाहरी दबाव के नशे की लत को अपनी ज़िंदगी से कोसों दूर रखा है. गांव की अनोखी खूबियों और वहां के लोगों के अनुशासन को देखकर आने वाले लोग हैरान रह जाते हैं. शिक्षा, ऊंचे करियर और पूरी तरह से नशा-मुक्त जीवनशैली की यह शानदार कहानी अब ज़ी मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंच रही है. जो यह साबित करता है कि अगर कोई समुदाय ठान ले, तो बदलाव की शुरुआत घर और गांव से ही हो सकती है.

नशे से दूर है गांव-  युवराज पाटीदार
जी मीडिया से बातचीत में स्टेट जीएसटी भोपाल में पदस्थ डिप्टी कमिश्नर युवराज पाटीदार ने बताया कि,  गांव की आबादी करीब 1200 है और यहां लगभग 700 घर हैं. गांव की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यहां हर घर से कोई न कोई सरकारी नौकरी में है. कोई शिक्षक है, तो कोई डॉक्टर, इंजीनियर और अफसर. गांव के युवा एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग से लेकर एग्रीकल्चर, सिविल सर्विसेज, इनकम टैक्स, बैंक और इंश्योरेंस जैसे सेक्टर में काम कर रहे हैं. खास बात यह है कि सभी ने पढ़ाई गांव के ही स्कूल से की है. इस गांव की दूसरी बड़ी खासियत नशामुक्ति है. पूरे गांव में बीड़ी, सिगरेट, शराब या बियर की एक भी दुकान नहीं है. गांव के लोग नशे से कोसों दूर रहते हैं. युवराज पाटीदार ने कहा कि सरकार नशे के खिलाफ अभियान चलाती है, लेकिन यह गांव पहले से ही पढ़ा-लिखा होने के कारण नशे से दूर रहा है.
 

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Ranjana Kahar

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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