App

बालाघाट में 32 बच्चों की मौत पर घिरी सरकार, कार्रवाई पर भी उठे सवाल, अधिकारी को हटाने की फॉर्मेलिटी क्यों?

बालाघाट के दक्षिण बैहर में 32 बच्चों की मौत ने सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कुपोषण, टीकाकरण से लेकर तमाम अव्यवस्थाओं की कमी के आरोपों के बीच कार्रवआई को लेकर भी विवाद है. हालांकि, सरकार ने इसे गंभीरता से देखने की बात कही है. वहीं कांग्रेस ने भी सरकार को घेरने की तैयारी कर दी है.

बालाघाट में 32 बच्चों की मौत पर घिरी सरकार, कार्रवाई पर भी उठे सवाल, अधिकारी को हटाने की फॉर्मेलिटी क्यों?
Image Credit: Balaghat malnutrition case

बालाघाट जिले के आदिवासी इलाके दक्षिण बैहर में बैगा समुदाय के बच्चों की मौत का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है. इलाके में अब तक करीब 32 बच्चों की मौत हो चुकी है. जबकि 65 से ज्यादा बच्चों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. इससे पहले लगभग 500 से ज्यादा बच्चों को ठीक किया जा चुका है. इन सभी बच्चों की मौत के पीछे मलेरिया, मीजल्स और कुपोषण जैसी बीमारियां बताई जा रही हैं. इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य से लेकर पूरे सरकारी सिस्टम पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

32 बच्चों की मौत मामले में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से की गई कार्रवाई भी सवालों के घेरे में है. आरोप लग रहे हैं कि अभी तक इतने बड़े मामले में किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई हैं. जिस मलेरिया अधिकारी डॉक्टर मनीषा जुनेजा को कार्रवाई के तौर पर पद से हटाकर तबादला कर दिया गया था, उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है. बताया यह भी जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से हाईकोर्ट में इस स्टे का कोई विरोध भी नहीं किया गया है. ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं, कि यदि विभाग अधिकारियों की लापरवाही को लेकर गंभीर था, तो कोर्ट में कार्रवाई को लेकर मजबूती से पक्ष क्यों नहीं रखा.

निलंबन पर भी उठे सवाल
इतने बच्चों की मौत मामले में जिस CMHO परेश उपर को भी पद से हटाया गया है, उसे भी बालाघाट में ही तैनात किया गया है. इसको लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई है. वहीं विपक्ष और स्थानीय स्तर पर भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या केवल फॉर्मेलिटी के लिए पद बदलना ही पर्याप्त करवाई है, या फिर जवाबदेही तय करते हुए निलंबन और सख्त कदम भी उठाए जाने चाहिए.

डिप्टी सीएम पहुंचे अस्पताल
इस मामले में विवाद उस समय और बढ़ गया, जब तत्कालीन CMHO परेस उपल, BMO हर्ष चौबे, नए टीकाकरण अधिकारी पिरतोष शुक्ला एक दूसरे को मिठाई खिलाते नजर आए. बताया यह भी जा रहा है कि यह तस्वीर उस समय की बताई जा रही है, जब बच्चों की मौत की समीक्षा करने के लिए मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल बालाघाट जिला अस्पताल पहुंचे. बताया यह भी जा रहा है कि इस दौरान डॉक्टरों ने इसकी तस्वीर भी अपने एक ग्रुप में शेयर की है. इस तस्वीर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

सरकार पूरी तरह से गंभीर
वहीं इसको लेकर डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने पक्ष रखते हुए कहा कि कुपोषण से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह से गंभीर है. उन्होंने कहा कि बालाघाट को नक्सल मुक्त करने में सरकार को सफलता मिली है. उन्होंने कहा कि अब आदिवासी इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. अलग-अलग तरह की सरकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों का जीवन स्तर सुधारने का काम किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि कुपोषण से निपटने के लिए बच्चों को पोषण आहार के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का काम लगातार जारी है.

सरकार को घेरने की तैयारी
कांग्रेस ने भी 32 बच्चों की मौत मामले पर सरकार को घेरने के लिए बालाघाट पहुंचे. जहां पर उन्होंने उन बच्चों के परिवारों से मुलाकात की है, जिनकी मौत कुपोषण के चलते हुई है. इस दौरान उन्होंने एक अंबेडकर चौक जनसभा को संबोधित किया. इसके अलावा, कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव भी किया. दक्षिण बैहर में बैगा जनजाति के बच्चों की मौत का मामला सिर्फ बीमारी ही नहीं रह गया है, बल्कि कुपोषण पोषण आहार की कमी, टीकाकरण व्यवस्था, मलेरिया और मीजल्स के मामलों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही भी जांच के दायरे में है.

ये भी पढ़ेंः बालाघाट के दक्षिण बैहर में 30 बच्चों की मौत: कुपोषण, गंदा पानी या टीकाकरण में चूक? अब उठ रहे बड़े सवाल

विधायक ने भी उठाए सवाल
इससे पहले बैहर के विधायक संजय उइके ने भी बच्चों की मौत को कुपोषण की वजह वजह बताया था. उनका कहना है कि आदिवासी इलाके में बच्चों को समय पर पोषण आहार नहीं मिल पाया. विधायक का कहना है कि मार्च महीने से लगातार तीन से चार महीने तक बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार नहीं दिया गया. उन्होंने आगे बताया कि अगस्त महीने से दोबारा पोषण आहार वितरण शुरू किया गया है. ऐसे में सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि अगर बच्चों को समय पर पोषण नहीं मिलेगा, तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर कैसे होगी. वहीं उन्होंने टीकाकरण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए थे.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

Manish Kushawah

Manish Kushawah

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
Read More