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बुंदेलखंड को नशामुक्त बनाने और समाज को जोड़ने के उद्देश्य से निकाली गई बाबा बागेश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की पांच दिवसीय 'सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा' छतरपुर में भव्य रूप से संपन्न हो गई. इस यात्रा का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को नशा मुक्त बनाना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना था. लगभग 500 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान यह रथ यात्रा करीब पांच जिलों से होकर गुजरी और हजारों गांवों व कस्बों के लोगों तक पहुंची. यात्रा के दौरान कई जगहों पर जनसभाएं आयोजित की गईं, जिनमें लोगों से जातिगत भेदभाव को भुलाकर एकजुट होने और नशा छोड़ने का संकल्प लेने का आग्रह किया गया.
छतरपुर में यात्रा के समापन पर हनुमान चालीसा का एक विशाल सामूहिक पाठ आयोजित किया गया. इस अवसर पर बाबा बागेश्वर ने अपने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों को यात्रा की सफलता पर संदेह था, उन्हें सनातन धर्म के अनुयायियों ने अपनी एकता और सहयोग के माध्यम से करारा जवाब दिया है. एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले व्यक्ति को अपने घर-परिवार को जगाना चाहिए, तभी राष्ट्र जागृत होगा. इसके अलावा, उन्होंने बेटियों को सशक्त बनाने के महत्व पर जोर दिया और सनातन धर्म के अनुयायियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे इतने अपार स्नेह के कर्ज को कभी नहीं चुका पाएंगे.
पांच जिलों से गुजरते हुए यह यात्रा हजारों गांवों और कस्बों तक पहुंची. वहां जनसभाओं के जरिए हिंदुओं को एकजुट रहने, जातिगत भेदभाव खत्म करने और नशा मुक्त होने की शपथ दिलाई गई. यात्रा के सफल समापन पर बाबा बागेश्वर ने कहा कि, विरोधियों को लगा था कि यह यात्रा पूरी नहीं हो पाएगी, लेकिन सनातनियों के सहयोग से यह यात्रा सफल रही. उन्होंने कहा कि देश को बाद में जगाना चाहिए, पहले हमें अपने घरों को जगाना होगा. उन्होंने बेटियों को सशक्त बनाने का भी आह्वान किया. साथ ही, सनातनियों के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि वे अपने पूरे जीवन में भी इस प्रेम के कर्ज को नहीं चुका पाएंगे. अंत में उन्होंने जयघोष करते हुए कहा कि, बालाजी तेरे राज में, धक-धक धरती पर, बागेश्वर बालाजी का वाई-फाई चले.'
इससे पहले कथावाचक अनिरुद्धाचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की 'सनातन रथ यात्रा' में शामिल हुए थे. इस दौरान उन्होंने छुआछूत की प्रथा को लेकर एक बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि, हम सभी हिंदू भाई-भाई हैं. छुआछूत की करो विदाई हम सब हिन्दू भाई-भाई. इसके माध्यम से उन्होंने सनातन परंपरा के अनुयायियों को एकजुट करने का संदेश दिया.