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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 'सनातन रथ यात्रा' बुधवार देर रात टीकमगढ़ जिले के बड़गांव इलाके में पहुंची. इस यात्रा के स्वागत के लिए सड़कों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े. उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री और उनके साथ मौजूद कथावाचक अनिरुद्धाचार्य पर फूलों की मालाएं बरसाईं. इस दौरान रथ से स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि, जाति व्यवस्था स्वीकार्य है लेकिन छुआछूत नहीं होनी चाहिए.
पूज्य सरकार के सनातन रथ यात्रा में सम्मलित हुए पूज्य अन्निरुधाचार्य जी महाराज ने क्या कहा ? #shorts #reels #hinduekta #rathyatra #aniruddhacharyajimaharaj #bageshwardhamsarkar #bageshwardham https://t.co/aqoOzBdh7F
— Bageshwar Dham Sarkar (Official) (@bageshwardham) October 14, 2026
लोगों को संबोधित करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र हम चारों एक ही पिता की संतान हैं, इसलिए हमें मिलजुलकर रहना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हम सनातनी इकठ्ठे नहीं रहे तो तो हमारे भाई को कोई और ले जाएगा और धर्मांन्तरण कराकर हमारे खिलाफ ही उसे खड़ा कर देगा लड़ने के लिए. उन्होंने पूछा कौन प्रतिज्ञा करेगा हाथ उठाओ. छुआछूत की करो विदाई हम सब हिन्दू भाई-भाई. हालांकि, अनिरुद्धाचार्य के इस बयान से एक अहम सवाल खड़ा होता है. क्योंकि जब तक समाज में वर्ण और जाति व्यवस्था बनी रहेगी, तब तक छुआछूत और सामाजिक असमानताएं भी बनी रहेंगी. इसलिए एक बार फिर उनका ये बयान चर्चा पर बना हुआ है.
इस मौके पर धीरेंद्र शास्त्री ने अपने रथ से लोगों को संबोधित करते हुए कहा- बड़गांव धसान के हिंदुओं, जागो! भाइयों, हम दो उद्देश्यों के साथ यह रथ यात्रा निकाल रहे हैं. पहला, बड़गांव में हिंदुओं को एकजुट करना और दूसरा, बड़गांव में शराब (पववा) को बंद करवाना. यह यात्रा दोपहर 1:30 बजे टीकमगढ़ पहुंची, जहां देर रात तक लोग सड़कों पर इस यात्रा का स्वागत करने के लिए जमा थे. बुधवार रात यह पदयात्रा टीकमगढ़ शहर के पीजी कॉलेज में रुकी. रात में विश्राम के बाद, आज सुबह यह पदयात्रा जिले के जतारा और पलेरा कस्बों से होकर गुजरेगी और कल शाम तक वापस छतरपुर जिले पहुंच जाएगी, जहां यह 'सनातन यात्रा' संपन्न होगी.
इससे पहले सागर में धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू युवतियों को सावधान करते हुए कहा था कि, गरबा में कुछ लोग कालनेमि की तरह रूप बदलकर आते हैं. उन्होंने गढ़ा कोटा और सागर को लव जिहाद मुक्त बनाने की बात भी कही.
बुंदेलखंड में निकाली जा रही यह 'सनातन रथ यात्रा' न केवल धार्मिक एकता के संदेश पर जोर दे रही है, बल्कि नशाबंदी और आपसी भाईचारे जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है. देर रात तक जुटी भीड़ यह दर्शाती है कि बड़ी संख्या में लोग संतों के इस अभियान से जुड़ रहे हैं.