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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) ने राजनीतिक पंडितों को चौंकाते हुए एक बड़ा सरप्राइज दिया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी के बेटे धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतारा है. अखिलेश यादव की मौजूदगी में धनराज परिमल नथवानी ने नामांकन भी दाखिल कर दिया है. धनराज परिमल नथवानी गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और राजनीति में उनका डेब्यू हो रहा है. अगर धनराज परिमल नथवानी चुनाव जीत जाते हैं तो एक ही समय में राज्यसभा में बाप और बेटे मौजूद होंगे. राज्यसभा के इतिहास में अभी तक ऐसा मौका नहीं आया है, जब पति-पत्नी, बाप-बेटे, बाप-बेटी एक साथ सदस्य रहे हों. इस तरह आने वाले समय में राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान नथवानी परिवार की दो पीढ़ियों के एक साथ मौजूद रहने का दुर्लभ मौका देखने को मिल सकता है.
परिमल नथवानी ने कांग्रेस के प्रणव झा को हराया था
इससे पहले इसी साल 18 जून, 2026 को परिमल नथवानी ने बतौर निर्दलीय झारखंड से राज्यसभा का चुनाव जीता था. उन्हें एनडीए का समर्थन हासिल था. बहुमत का आंकड़ा न होने के बाद भी परिमल नथवानी ने यह चुनाव जीत लिया था और अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के प्रणव झा को मात दी थी. चुनाव में परिमल नथवानी ने पहली वरीयता के निर्धारित 28 वोट हासिल किए थे, जिससे उनकी जीत सुनिश्चित हो गई थी. प्रणव झा को पहली वरीयता के केवल 20 वोट मिले थे. परिमल नथवानी का कार्यकाल 22 जून, 2026 से शुरू हुआ. उन्होंने 25 जून, 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी.
धनराज जीते तो बाप एनडीए से और बेटा इंडिया से
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और उसी दिन शाम को मतगणना होगी. इसके लिए समाजवादी पार्टी की ओर से धनराज परिमल नथवानी ने नामांकन दाखिल कर दिया है. अगर वे जीत जाते हैं तो राज्यसभा में पिता और पुत्र अलग-अलग खेमों में नजर आएंगे. पिता एनडीए की ढाल के रूप में सदन में मौजूद रहेंगे तो बेटा इंडिया ब्लॉक की ओर से चाल चलते दिखाई देगा.
विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया
परिमल नथवानी और धनराज परिमल नथवानी की तरह लोकसभा में कभी मां और बेटे की जोड़ी सुर्खियां पाती थीं. जनसंघ या भारतीय जनता पार्टी की ओर से विजयाराजे सिंधिया लोकसभा में होती थीं तो कांग्रेस की ओर से उनके बेटे माधवराव सिंधिया मोर्चा संभालते थे. एक नहीं, कई बार विजयाराजे सिंधिया और उनके बेटे माधवराव सिंधिया एक ही समय पर लोकसभा सांसद रहे थे.

सोनिया गांधी और राहुल गांधी
विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया की तरह सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी एक साथ कई लोकसभा चुनावों में सांसद चुने गए और एक साथ कार्यवाही में भाग लेते रहे. खास बात यह रही कि विजयाराजे सिंधिया और माधवराव सिंधिया की तरह ये दोनों अलग-अलग दलों से नहीं थे. दोनों ने लोकसभा में एक साथ कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व किया.

2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में सोनिया गांधी रायबरेली से तो राहुल गांधी अमेठी से चुने गए थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी रायबरेली से तो राहुल गांधी केरल के वायनाड सीट से चुने गए थे. 2024 में सोनिया गांधी राज्यसभा के लिए चुनी गईं तो राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव जीते. अभी दोनों सांसद तो हैं, लेकिन अलग-अलग सदन के.
शरद पवार और सुप्रिया सुले
शरद पवार और सुप्रिया सुले की बात करें तो दोनों एक बार एक साथ लोकसभा के सदस्य रहे थे. 2009 के लोकसभा चुनाव में शरद पवार माढ़ा से तो सुप्रिया सुले बारामती से लोकसभा के लिए चुनी गई थीं.

2006 से 2009 के बीच शरद पवार लोकसभा में बारामती से सांसद रहे तो बेटी सुप्रिया सुले राज्यसभा की सांसद रही थीं. 2014 में शरद पवार राज्यसभा के लिए चुने गए तो सुप्रिया सुले बारामती से लोकसभा के लिए चुनी गई थीं.

रामविलास पासवान और चिराग पासवान
बाप और बेटे की एक और जोड़ी 16वीं लोकसभा में एक साथ मौजूद रही थी. वो जोड़ी थी रामविलास पासवान और चिराग पासवान की. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में रामविलास पासवान हाजीपुर सीट से चुनाव लड़े थे तो चिराग पासवान जमुई से मैदान में उतरे थे और जीत भी गए थे. बाप बेटे की इस जोड़ी ने 2014 से 2019 तक एक साथ लोकसभा की कार्यवाही में भाग लिया था.

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव
इसी तरह, 14वीं लोकसभा के लिए 2004 में हुए चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी तो बेटे अखिलेश यादव ने कन्नौज सीट से जीत दर्ज थी. इस दौरान बाप बेटे की जोड़ी लोकसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेती रही. मुलायम सिंह यादव 2009 में हुए 15वीं लोकसभा मैनपुरी सीट से फिर से चुने गए थे तो अखिलेश यादव भी कन्नौज सीट से दोबारा निर्वाचित हुए थे. 2019 के लोकसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव मैनपुरी से जीते तो अखिलेश यादव ने आजमगढ़ सीट से फतह किया था.

मेनका गांधी और वरुण गांधी
सोनिया गांधी और राहुल गांधी की तरह मेनका गांधी और वरुण गांधी भी एक ही समय पर कई बार लोकसभा सांसद रहे थे. पारिवारिक राजनीति का विरोध करने वाली भारतीय जनता पार्टी में मेनका गांधी और वरुण गांधी का केस अपवाद है. 2009 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी आंवला सीट से तो वरुण गांधी पीलीभीत सीट जीतकर सदन में गए थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी पीलीभीत से तो वरुण गांधी सुल्तानपुर से भाजपा सांसद चुने गए थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में मां और बेटे ने सीटें आपस में बदल ली थीं. वरुण गांधी पीलीभीत से तो मेनका गांधी सुल्तानपुर से सांसद चुनी गई थीं.

सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर
2019 के लोकसभा चुनाव में पंजाब के बादल परिवार के दो सदस्य भी एक साथ चुने गए थे: सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर. सुखबीर सिंह बादल फिरोजपुर सीट से तो हरसिमरत कौर बठिंडा सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. तब हरसिमरत कौर को केंदीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री बनाया गया था. तीन कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था.
जोआकिम अल्वा और वायलेट अल्वा
सबसे पहले पति और पत्नी के रूप में लोकसभा और राज्यसभा सांसद बनने का रिकॉर्ड जोआकिम अल्वा और वायलेट अल्वा के नाम है. 1952 में वायलेट अल्वा राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं तो जोआकिम अल्वा लोकसभा के सदस्य चुने गए थे.