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झारखंड में चल रहे चुनाव आयोग की तरफ से SIR के तहत मतदाताओं का चिह्नीकरण जारी हैं. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान बड़ी संख्या में आ रहे दावा आपत्ति आवेदन की सुनवाई हो रही हैं, जिसकी संख्या 63 लाख हैं. मतदाताओं का चिह्नितकरण में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस दौरान दावे-आपत्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया में जाति, टाइटल और जन्म अंतर को लेकर राज्य के लोग बहुत परेशान नजर आ रहे हैं. इस बीच झारखंड तंजीम का एक प्रतिनिधि मंडल शमशेर आलम के नेतृत्व में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी झारखंड से मुलाकात किया है.
झारखंड तंजीम का एक प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात के दौरान मांग पत्र सौंपा. मांग पत्र में SIR के तहत मतदाताओं का चिह्नितकरण जारी हैं, जिस दौरान बड़ी संख्या में आ रहे दावा आपत्ति आवेदन की सुनवाई हो रही हैं, जिसकी संख्या 63 लाख हैं और इतने मतदाताओं का चिह्नितकरण 30 सितम्बर तक संभव नहीं है, इसलिए समय सीमा बढ़ाया जाए.
झारखंड तंजीम के प्रतिनिधि मंडल की तरफ से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग की गई. मुलाकात के बाद झारखंड तंजीम के अध्यक्ष शमशेर आलम ने बताया कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने सभी मांगों पर विचार करते हुए समय सीमा बढ़ाने और प्रक्रिया को सरल बनाने का आश्वासन दिया है. साथ ही एक भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं काटने का भरोसा भी दिया है.
शमशेर आलम ने झारखंड के पड़ोसी राज्य में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के अनुभव के आधार पर विदेशी नागरिक के नाम पर मुसलमानों को टारगेट किए जाने का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि झारखंड में विदेशी नागरिक के नाम पर अल्पसंख्यक मुसलमानों को अगर परेशान किया जाएगा, तो झारखंड तंजीम चुप नहीं बैठेंगी.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी झारखंड से मुलाकात के दौरान झारखंड तंजीम के प्रतिनिधि मंडल में फहीम अहमद सरवर, आलम महबूब आलम, तनवीर गद्दी और अब्दुल रहमान शामिल हुए. प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व शमशेर आलम ने किया. जो झारखंड तंजीम के अध्यक्ष हैं.
रिपोर्ट: कामरान जलीली