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दिल्ली के मयूर विहार से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. वहां के लवली पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली तीसरी क्लास की छात्रा (9 साल) की हार्ट अटैक से मौत हो गई. स्पोर्ट्स पीरियड के बाद क्लास में वापस लौटी बच्ची अच्छी भली सी क्लास में खड़ी थी. तभी अचानक से वो जमीन पर धड़ाम से गिर गई. बच्ची के गिरते ही क्लास में मौजूद टीचर और बच्चों ने उसे दौड़कर उठाया. लेकिन कुछ ही देर में बच्ची बेजान हो गई. स्कूल का स्टाफ उसे तुरंत ही अस्पताल लेकर गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. उसकी मौत की वजह हार्ट अटैक को माना जा रहा है.
यह पहला मामला नहीं है, जब किसी छोटे बच्चे में इस तरह हार्ट अटैक देखने को मिला हो. नवंबर 2026 में कंपोज़िट स्कूल में चौथे क्लास के बच्चे निहाल की मौत हो गई थी. फरवरी 2026 में गोटन कस्बे में 5वीं क्लास की बच्ची दिव्या की मौत भी ऐसे ही हुई थी. सितंबर 2024 में लखनऊ में तीसरी क्लास की छात्रा मानवी की मौत हुई थी. दिसंबर 2024 में बागपत में 7 साल की बच्ची अपेक्षा
की मौत हो गई थी.
इस मुद्दे पर जी न्यूज ने सीनियर कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. संकेत गर्ग से पैनल चर्चा कर इस तरह बच्चों की जान जाने की वजह जानने की कोशिश की. आइए, आपको बताते हैं कि डॉक्टर ने इन मामलों की क्या बड़ी वजह बताई और इनसे बचने के लिए क्या तरीके सुझाए?
सवाल 1. अगर कोई बच्चा अचानक बेसुध हो जाए तो क्या सीपीआर देना ठीक रहता है?
जवाब: सीपीआर के बारे में हर किसी को जानना चाहिए. यह संकट में आपकी जान बचा सकता है. इससे नाजुक समय में बच्चे की सांस वापस लौटाई जा सकती है. जिससे उसे समय रहते अस्पताल तक पहुंचाने और वहां पर इलाज का समय मिल जाता है.
सवाल 2. इतने छोटे बच्चे में हार्ट अटैक की समस्या क्यों आई. क्या इसमें स्कूल ओर से लापरवाही हुई?
जवाब: ऐसे मामलों में लापरवाही की बात कहना मुश्किल है. इस तरह के अधिकतर मामले में बच्चों को जन्म से ही दिल में कोई बीमारी हो रही होती है. उसके दिल में इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस होती है. इसके साथ ही एचओसीएम के मामले भी बच्चों में हार्ट अटैक के जिम्मेदार होते हैं. इस मामले में संभावना है कि उसे शायद बचपन से ही दिल से जुड़ी कोई बीमारी रही होगी. जिसका वक्त रहते पता नहीं लग पाया होगा.
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— Zee News (@ZeeNews) November 4, 2026
सवाल 3. छोटे बच्चों में दिल से जुड़ी बीमारी का पता कैसे लगाया जा सकता है?
जवाब: अगर बच्चे में किसी तरह के लक्षण न दिखे तो हरेक छोटे बच्चों की स्क्रीनिंग करवाना बहुत मुश्किल होता है. लेकिन अगर उसके शरीर पर नीले निशान पड़ते हैं या सांस लेने में दिक्कत हो तो हार्ट स्पेशलिस्ट के पास ईको जांच करवा कर इसका पता लगा सकते हैं.
सवाल 4. बच्चों को इस तरह के हार्ट अटैक से बचाने के लिए पैरंट्स क्या करें?
जवाब: अगर बच्चों में कभी बिना वजह चक्कर आए तो वे इसे इग्नोर न करें. यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. ऐसे मामलों में किसी स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए. ईको जांच के बाद काफी हद तक स्थिति क्लियर हो जाती है.
सवाल 5. क्या लाइफस्टाइल में बदलाव से बच्चों को ऐसी घटना से बचाया जा सकता है?
जवाब: बच्चों को खेलकूद के लिए प्रोत्साहित तो करें लेकिन ज्यादा फोर्स न करें. बच्चों को बिना वार्म अप से ऐसे खेल खेलने को न कहें, जिन्हें खेलने से दिल पर ज्यादा दबाव पड़ता है. खान-पान में बदलाव करें और जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक और ट्रांस फैट के सेवन से बचाएं. बच्चों को खूब नींद लेने दें और पढ़ाई के लिए उसे तनाव भरा दबाव न बनाएं.