देश में सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मुंबई में एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हमले के बीच एक ऐसी घटना भी हुई है, जिस पर नेशनल मीडिया में ज्यादा चर्चा नहीं हुई है. असल में, खुद को स्मित जॉनसन बताने वाले एक व्यक्ति ने महानायक अभिताभ बच्चा और सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ पर हमले की धमकी दी है. BMC को ईमेल से भेजी धमकी में अमिताभ बच्चन के मुंबई वाले आवास पर 31 अक्तूबर और दिलजीत दोसांझ की ओर से 27 नवंबर को मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में होने वाले कॉन्सर्ट में आत्मघाती हमले की चेतावनी दी गई है. सवाल है कि लाखों लोगों के दिलों की धड़कन अमिताभ बच्चन और दिलजीत दोसांझ ने आखिर ऐसा क्या किया है कि वे खालिस्तानी समर्थकों के निशाने पर बने हुए हैं.
असल में इस घटना के तार 1984 के दंगों से जुड़े हुए हैं. एक ही शहर प्रयागराज से जुड़े होने की वजह से अमिताभ बच्चन और गांधी परिवार के रिश्ते शुरू से बहुत अच्छे थे. वर्ष 1984 में जब तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की उनके 2 सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी तो दिल्ली में सिखों के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क उठा था. उन सिख विरोधी दंगों में काफी लोग मारे गए थे.
खालिस्तानी समर्थक समूहों का आरोप रहा है कि उन दंगों को भड़काने में अमिताभ बच्चन का भी काफी हाथ रहा है. वे उस वक्त तक देश में सुपरस्टार बन चुके थे और राजीव गांधी के बेहद करीबी दोस्त थे. खालिस्तानी समूहों के अनुसार, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद अमिताभ बच्चन ने कथित तौर पर खून का बदला खून से लेंगे का नारा लगाया था. जिसके बाद दिल्ली के लोग भड़के और बदले की आग में कई बेगुनाह सिख मारे गए.
इस आरोप का अमिताभ बच्चन कई बार खंडन कर चुके हैं. इसके बावजूद खालिस्तानी समर्थक अपने इस आरोप को लगातार हवा देते रहे हैं. वर्ष 2011 में इस विवाद ने दोबारा तूल पकड़ा, जब तत्कालीन पंजाब सरकार के न्योते पर अमिताभ बच्चन ने अमृतसर में होने वाले 'विरासत-ए-खालसा' हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन में आने के लिए हामी भरी. इसका पता चलता ही खालिस्तानी तत्वों ने अमिताभ के खिलाफ फिर से सिख विरोध नैरेटिव छेड़ना शुरू कर दिया.
खालिस्तानी समर्थकों के दबाव को देखते हुए अकाल तख्त के जत्थेदार गुरबचन सिंह ने अमिताभ बच्चन से कार्यक्रम में शामिल न होने का हुक्म दिया. इसके बाद अमिताभ बच्चन ने जत्थेदार को पत्र लिखा और खुद पर लगे आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए आहत होने की बात कही.
अपने पत्र में अमिताभ ने कहा कि 1984 के दंगों में सिखों के खिलाफ माहौल बनाने के लिए उनकी कथित संलिप्तता के आरोपों ने उन्हें गहरा दुख पहुंचाया है. लेकिन अकाल तख्त ने उनकी चिट्ठी में दी गई सफाई पर कोई फैसला करने के बजाय उसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया. जिससे खालिस्तानियों को हमेशा के लिए एक मुद्दा हाथ लग गया.
इस घटना के बाद यह मुद्दा धीरे-धीरे इतिहास की गर्त में दबता जा रहा था. ऐसे लग रहा था कि खालिस्तानी समर्थकों का प्रोपेगेंडा अब दम तोड़ गया है. तभी पिछले साल अक्टबर 2025 में पंजाब के लोकप्रिय सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ ने केबीसी में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने 50 लाख रुपये जीते और उसे पंजाब के बाढ़ पीड़ितों को दान करने का एलान कर दिया. उन्होंने भरे मंच पर सम्मान के रूप में अमिताभ बच्चन के पैर भी छुए और सदी के महानायक ने उन्हें पंजाब का पुत्तर कहकर संबोधित किया.
इस घटना के तमाम खालिस्तानी समर्थक भड़क गए. अमेरिका में छिपे खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन SFJ ने इस मुलाकात की आलोचना करते हुए इसे 1984 के हिंसा पीड़ित सिखों का अपमान बताया. उसने अमिताभ बच्चन और दिलजीत दोसांझ के खिलाफ हमले की धमकियां भी दीं.
इसके बाद दिलजीत दोसांझ कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि वे केबीसी में कोई पैसा कमाने नहीं बल्कि देश के लोगों का ध्यान पंजाब में आई बाढ़ के प्रति आकर्षित करने के लिए गए थे और वहां पर उन्होंने कोई भी राजनीतिक बात नहीं की. इसके बावजूद खालिस्तानी इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने के मूड में नजर नहीं आते हैं. जिसकी वजह से दोनों कलाकारों की सुरक्षा पहले से ज्यादा मजबूत कर दी गई है.