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भारतीय टीवी पत्रकारिता में कई कई ऐसे नाम रहे हैं, जिन्होंने अपनी धारदार एंकरिंग और राजनीतिक विश्लेषण से अपनी पहचान बनाई है. निधि राजदान भी ऐसे ही पत्रकारों में से एक रही हैं. वे NDTV के प्राइम-टाइम शो 'लेफ्ट, राइट एंड सेंटर' और 'द बिग फाइट' को होस्ट करती थीं. अपनी सटीक शैली, बेबाक सवालों और संतुलित नजरिए की वजह से वे करीब दो दशकों तक पत्रकारिता जगत में छाई रहीं. अब वे एक बार फिर लाइमलाइट में हैं. हालांकि अब उनके चर्चा में रहने की वजह पत्रकारिता नहीं बल्कि जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ उनका निकाह है. खास बात ये है कि यह दोनों की ही दूसरी शादी है. आइए, आपको विस्तार से निधि राजदान के पारिवारिक जीवन, करियर और विवादों के बारे में बताते हैं.
निधि राजदान मूलरूप से कश्मीरी पंडित हैं. उनका परिवार मूल रूप से जम्मू कश्मीर के बडगाम का रहने वाला है. हालांकि, उनका जन्म 1977 में दिल्ली में हुआ. पत्रकारिता एक तरह से उन्हें विरासत में मिली थी. इसकी वजह ये है कि उनके महाराज कृष्ण राजदान प्रमुख न्यूज एजेंसी 'प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया' के प्रधान संपादक रह चुके थे.
नई दिल्ली के एपीजे स्कूल से पढाई के बाद निधि राजदान ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध लेडी श्री राम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद 1998 में IIMC से रेडियो और टीवी पत्रकारिता में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा हासिल कर 1999 में एनडीटीवी से अपने करियर की शुरुआत की.
यह वो दौर था, जब देश में टीवी न्यूज चैनल देश में तेजी से पैर पसार रहे थे. उसी दौर में निधि ने टीवी न्यूज चैनल में ज्वाइन किया और वे टीवी पत्रकारिता में छा गईं. करीब 21 साल तक एनडीटीवी में रहने के दौरान उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर कवरेज की.
वे अपनी मेहनत से NDTV 24x7 में एग्जीक्यूटिव एडिटर बनने में कामयाब रहीं. 'शोर-शराबे' वाली डिबेट्स के उलट निधि राजदान संजीदा तरीके से और तथ्यों के आधार पर सवाल पूछती थी. डिबेट में वे राजनीतिक प्रवक्ताओं से तीखे और बिना लाग-लपेट वाले सवाल पूछने के लिए जानी जाती थीं.
निधि राजदान इससे पहले भी एक बार खबर बन गई थीं. असल में निधि राजदान ने जून 2020 में अचानक सोशल मीडिया पर एक बड़ा एलान किया, जिससे सब चौंक उठे. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि उन्हें दुनिया की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के 'फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज' में पत्रकारिता की 'एसोसिएट प्रोफेसर' के पद पर नियुक्त किया गया है. इसके चलते वे 21 साल बाद एनडीटीवी छोड़कर जा रही हैं.
उनकी पोस्ट पर सब लोगों ने उन्हें बधाई दी और भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं. लेकिन कुछ महीने बाद जो सच सामने आया, उसने सबको हिला दिया. निधि राजदान की पोस्ट के करीब 7 महीने बाद जनवरी 2021 में एक पब्लिक स्टेटमेंट जारी कर अपने साथ हुई धोखाधड़ी का खुलासा किया. उन्होंने कहा कि वे 'फिशिंग अटैक' का शिकार हुई थीं और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में उनकी नौकरी का प्रस्ताव पूरी तरह से फर्जी था. उन्हें सुनियोजित तरीके से फर्जी ऑफर लेटर जारी करके फंसाया गया था.
निधि राजदान ने बताया कि नवंबर 2019 में उन्हें एक इवेंट में बोलने के लिए बुलाया गया था. वहां पर उन्हें कुछ लोग मिले, जिन्होंने खुद को हार्वर्ड से जुड़ा प्रतिनिधि बताकर उनसे संपर्क किया. इसके बाद उन्हें यूनिवर्सिटी का फर्जी आधिकारिक डोमेन नेम और लोगो दिखाकर 90 मिनट लंबा ऑनलाइन इंटरव्यू आयोजित किया. वह इंटरव्यू देखने में पूरी तरह से पेशेवर और असली लग रहा था. इसके बाद उन्हें सिलेक्ट होने की बधाई देते हुए जाली ऑफर लेटर भी भेजा गया.
वे बताती हैं कि इसके बाद साइबर अपराधियों ने उन्हें वर्क-फ्रॉम-होम और क्लासेस आयोजित करने के शेड्यूल भी भेजे.हालांकि, जब कई महीने बीतने के बाद भी पेरोल की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो उन्हें शक हुआ. इसके बाद निधि ने सीधे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया.
हार्वर्ड प्रशासन ने बताया कि उनकी ओर से ऐसा कोई ऑफर लेटर जारी नहीं किया गया था और निधि नाम की किसी प्रोफेसर की नियुक्ति भी नहीं हुई है. इसके बाद निधि राजदान ने दिल्ली पुलिस के साइबर सेल और जम्मू-कश्मीर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाकर मामले की जांच अमेरिकी जांच एजेंसी FBI से कराने की भी अपील की.
इस घटना का पता चलने पर वे सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हुईं. लोगों ने सवाल उठाया कि उन्होंने ऑफर लेटर की असलियत जानने के लिए सीधे हार्वर्ड से संपर्क क्यों नहीं किया. बाद में निधि ने भी अपनी इस गलती को स्वीकार किया और कहा कि वेरिफिकेशन करने में उनसे लापरवाही हुई.
इस बड़े झटके के बाद निधि ने फिर से मीडिया जगत में वापसी की. उन्होंने एनडीटीवी में कुछ समय के लिए फिर से एंकरिंग की और बाद में जनवरी 2023 में चैनल छोड़ दिया. इसके बाद वे कई मीडिया संस्थानों मे गेस्ट लेक्चरर के रूप में काम करती हैं. अब वे लायड इंस्टिट्यूट में पत्रकारिता विभाग में डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं.