SC के जजों ने SIR पर उठाए सवाल, तो विपक्ष को मिला 'बूस्टर': कांग्रेस ने रखी 3 मांगें, चिदंबरम बोले- भक्त चुप हो जाएंगे
एसआईआर प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए और चुनाव में वोटों की धांधली का ओरोप लगाते हुए विपक्ष देश के मुख्य चुनाव आयुक्त की इस्तीफे की मांग कर रहा है. इस बीच एसआईआर की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस नरीमन ने अपनी पक्ष रखा है. इसके बाद सियासी पारा हाई होने लगा है.
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए विपक्ष सड़कों पर है. इंडी गठबंधन के नेता एसआईआर प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं और उनका कहना है कि इससे वोटर लिस्ट में हेरफेर की गई है, जिससे बीजेपी को फायदा पहुंचा है. यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है, जहां पर इसपर सुनवाई हुई. इंडी गठबंधन के नेताओं का दावा है कि एसआईआर की प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में वैलिड वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं.
इस बीच सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने एसआईआर को लेकर बड़ा बयान दिया. वहीं, विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर लामबंद है और शहर-दर-शहर सरकार को घेरने को लिए विरोध प्रदर्शन कर रहा है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस की केवल तीन मांगे हैं, जिसके लिए उनके कार्यकर्ता सड़कों पर हैं.
कांग्रेस की तीन मांगे
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार (5 अक्टूबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि कांग्रेस तीन मांगे लेकर सड़क पर उतर रही है. खरगे ने कहा कि तीनों मांगों में कमी की गुंजाइश नहीं है. एक्स पोस्ट में खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की 3 मांगे Non-Negotiable हैं. इसमें पहली ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, दूसरी SIR को रद्द करना और तसरी Ballot Paper पर चुनाव कराना. देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के साथी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर हैं.
सुप्रीम कोर्ट के जज ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने एसआईआर को लेकर एक अहम बयान दिया है. उनकी ओर से कहा गया कि अगर किसी भी प्रक्रिया के कारण भारत के लाखों नागरिक अपने वोट देने के अधिकार से वंचित रह जाते हैं, यह प्रक्रिया अपनेआप में मनमानी होगी. उनकी ओर से कहा गया कि इस प्रकार की स्थिति को किसी भी तरीके से अगर-मगर करके सही नहीं कहा जा सकता है. देश के कई हिस्सों में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चल रहे सियासी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बीच इस बयान को अहम माना जा रहा है.
इधर, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने राजकोट में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मतदाता सूची से लोगों के नाम गैर-तरीके से हटाने के कारण नागरिकों के वोट देने का अधिकार खतरे में पड़ गया है. जस्टिस नरीमन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में मौजूद समस्या पर भी बात की और कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में आगे बढ़ते हुए सिस्टम की कमियों को दूर करना चाहिए.
सिंघवी ने जजों की बातों को ठहराया सही
नागरिकों के वोट देने के अधिकार और एसआईआर के मामले पर विपक्ष लामबंद है और चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश कर रहा है. वरिष्ठ वकील और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने SC जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां के विचारों और जस्टिस नरीमन की टिप्पणियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेता सिंघवी ने कहा कि और जज, तीनों ही भूमिकाओं में बहुत विद्वान व्यक्ति माने जाते हैं. जस्टिस भुइयां हमारे सबसे सम्मानित और बेबाक लोगों में से एक हैं, जो बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात रखते हैं.
'भारत का हर वर्ग इस विषय पर अपनी बात रखेगा'
कांग्रेस नेता ने कहा कि जस्टिस नरीमन एक ऐसे विषय पर बोल रहे थे, जिसके शीर्षक में 'आम आदमी' शब्द शामिल था. जस्टिस भुइयां NALSAR यूनिवर्सिटी में युवाओं की एक सभा को संबोधित कर रहे थे. दोनों न्यायाधीशों ने देश के नागरिकों की वोट की अहमियत कम होने और वोट खत्म होने के बारे में बात की है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि भारत में सिविल सोसाइटी के और भी कई वर्ग हैं, जिन्हें इस विषय पर अपनी बात रखनी चाहिए.
चिदंबरम ने कहा- भक्त चुप्पी साधे लेंगे
सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया और लिखा कि राजकोट में रिटायर्ड जस्टिस नरीमन और हैदराबाद में मौजूदा जस्टिस भुइयां की बातें पढ़ें. 22 मार्च, 2026 को इंडियन एक्सप्रेस और दूसरे अखबारों में मेरा कॉलम 'मिलियंस ऑफ सिटिज़न नॉन-वोटर्स' (लाखों नागरिक जो वोट नहीं देते) पढ़ें. मुझे उम्मीद है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट इस मौके पर आगे आएगा और संविधान व लोकतंत्र को बचाएगा. मुझे यह भी उम्मीद है कि 'भक्त' खामोश रहेंगे.