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SIR ट्रिब्यूनल के जज का त्यागपत्र: खराब सड़क और लंबे सफर से परेशान, जज ने कर दिया इस्तीफे का ऐलान

SIR ट्रिब्यूनल से जुड़े एक जज ने घर से ऑफिस तक खराब रास्ते और लंबे सफर के कारण इस्तीफा देने का ऐलान किया है. उन्होंने अपना त्यागपत्र कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र विट्ठलराव घुगे को दिया है.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 01, 2026, 01:18 PM IST | Updated: Oct 01, 2026, 03:49 PM IST
Image Credit: SIR ट्रिब्यूनल से जुड़े जज ने किया इस्तीफे का ऐलान. (फोटो- एआई)
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पश्चिम बंगाल में SIR ट्रिब्यूनल से जुड़े एक जज ने अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही है. कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और SIR ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश इंद्रजीत चटर्जी ने कहा कि वह खराब सड़क और प्रतिदिन कोर्ट तक पहुंचने में लगने वाले समय से परेशान हैं. जज  ने अपना इस्तीफा कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र विट्ठलराव घुगे को सौंप दिया.

उनके इस्तीफे की वजह ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. बताया जा रहा है कि जज मुर्शिदाबाद से जुड़े एसआईआर मामलों की अपील पर सुनवाई कर रहे थे.उन्होंने इस दौरान बताया कि उनके इस्तीफे की वजह खराब सड़क और रोज का लंबा सफर है, जिस कारण वह अपना काम अच्छे से नहीं कर पा रहे हैं.

70 किलोमीटर का सफर और 4 घंटे का वक्त

जज की मानें, तो उन्हें प्रतिदिन साल्ट लेक स्थित अपने घर से जोका में बने ट्रिब्यूनल कार्यालय तक जाना पड़ता है. यह कुल दूरी 70 किलोमीटर के करीब की है, लेकिन खराब रास्ते के कारण कम से कम 4 घंटे का वक्त लगता है. जज का कहना है कि लंबे समय तक इतना सफर करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है.  यही कारण है कि उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया. अपने इस्तीफे की जानकारी उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दी है।

क्या हैं SIR ट्रिब्यूनल

गौरतलब है कि एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के अंतर्गत मतदाता सूची की जांच और उससे जुड़े मामलों पर काम किया जा रहा है. इसी प्रक्रिया से जुड़े मामलों की अपील सुनने के लिए अलग-अलग ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं. बंगाल के मुर्शिदाबाद से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए जज का ट्रिब्यूनल कार्यालय जोका में है. हालांकि, उनका घर साल्ट लेक में हैं. ऐसे में दोनों जगहों के बीच का सफर उनके लिए एक बड़ी परेशानी का कारण बन गया है.

चुनाव आयोग से की ये अपील

कोलकाता हाईकोर्ट को सौंपे अपने त्यागपत्र में न्यायमूर्ति चटर्जी ने कहा कि सुबह ट्रिब्युनल पहुंचने में घंटों का वक्त लगता है और शाम को काम समाप्त होने के बाद भी घर पहुंचने में देर हो जाती है. इस काम के लिए उन्हें टैक्स काटकर प्रतिदिन 2,133 रुपये मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद में 7,47,621 अपीलें लंबित होने के कारण उनके काम का बोझ अन्य न्यायधीशों की तुलना में अधिक है. उन्होंने एक विकल्प के तौर पर कहा कि यदि ट्रिब्युनल का स्थान साल्ट लेक स्थित उनके घर के 12 किलोमीटर के दायरे में रहे, तो वह अपने दायित्व का निर्वहन कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग की ओर से 21 दिनों के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता है, तो उनका इस्तीफा स्वीकार माना जाएगा. 

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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