Sambhal Violence Case: सुप्रीम कोर्ट से यूपी सरकार को बड़ा झटका लगा है. संभल हिंसा से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है. इसके साथ ही न्यायालय ने इस मामले में मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज की एहतियाती हिरासत को भी रद्द कर दिया और उसपर लगे एनएसए को हटाने का आदेश भी दिया.
दरअसल, संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज को एहतियाती हिरासत में रखा गया था. इसी मामले से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुल्ला अफरोज पर लगाए गए NSA एक्ट को रद्द करने का आदेश दिया. शीर्ष न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को भी पलटा, जिसमें आरोपी मुल्ला अफरोज की प्रिवेंटिव डिटेंशन और NSA की धारा को सही ठहराया गया था.
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट बताती है कि जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने संभल हिंसा से जुड़े इस मामले की सुनवाई की. मंगलवार (29 सितंबर) को हुई इस सुनवाई में दो जजों की बेंच ने कहा कि यूपी सरकार मुल्ला अफरोज की ओर से पुलिस कस्टडी में कथित तौर पर कबूलनामे के आधार पर ऐहतियाती हिरासत का आदेश नहीं दे सकती है. ऐसे में गैर-कानूनी तरीके से प्रिवेंटिव डिटेंशन का आदेश देने की वजह से शीर्ष न्यायालय ने यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है.
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता मुल्ला अफरोज को यूपी पुलिस ने संभल हिंसा मामले में मुख्य आरोपी माना है. संभल में यह हिंसा शादी मस्जिद के कोर्ट-ऑर्डर सर्वे के बाद हुई थी.इस हिंसा में चार लोगों की जान गई थी. मुल्ला अफरोज के खिलाफ NSA के तहत मामला दर्ज किया गया. संभल हिंसा के करीब 54 दिन बाद मुल्ला अफरोज को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी पुलिस कस्टडी में दिए गए कबूलनामे के आधार पर हुई थी. हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुल्ला अफरोज को जमानत दे दी थी.
जानकारी दें कि 13 अक्टूबर 2015 को NSA के तहत मुल्ला अफरोज के खिलाफ डिटेंशन आदेश जारी किया गया. यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, जहां पर न्यायालय ने डिटेंशन को सही करार दिया. इस आदेश के बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से उसे राहत मिली है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि हिंसा के दौरान पुलिस ने पहले गोली चलाई थी, लेकिन इस पहलू की निष्पक्ष जांच नहीं की गई.