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क्यों हर साल दशहरे पर RSS करता है शस्त्र पूजा, साल में मनाता है सिर्फ 6 त्योहार? कब और कैसे शुरू हुई परंपरा

दशहरा के खास मौके पर RSS चीफ मोहन भागवत ने नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय में शस्त्र पूजा की. आज RSS के शताब्दी महोत्सव का समापन कार्यक्रम भी है. 101 साल पहले विजयादशमी के दिन ही संघ की स्थापना हुई थी. आरएसएस साल में केवल 6 त्योहार मनाता है.

Written Byabhinav tripathi
Published: Oct 20, 2026, 08:21 AM IST|Updated: Oct 20, 2026, 08:42 AM IST
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क्यों हर साल दशहरे पर RSS करता है शस्त्र पूजा, साल में मनाता है सिर्फ 6 त्योहार? कब और कैसे शुरू हुई परंपरा
Image Credit: नागपुर में आरएसएस चीफ ने की शस्त्र पूजा. फोटो- एक्स

About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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नागपुर में RSS मुख्यालय पर विजयादशमी कार्यक्रम शुरू हो चुका है. इस खास मौके पर शस्त्र पूजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने RSS के संस्थापक डॉ हेडगेवार को श्रद्धांजलि देकर की. इसके बाद उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित किया. इस कार्यक्रम में कई खास मेहमानों को बुलाया गया है, जिसमें पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच शामिल हैं.

दरअसल, साल 1925 में विजयादशमी के दिन ही संघ की स्थापना हुई थी. ऐसे में दशमी के दिन शस्त्र पूजन का विधान है. इस खास दिन पर संघ के सदस्य हवन में आहूति देकर विधि-विधान से शस्त्रों की पूजा करते हैं. संघ के स्थापना दिवस कार्यक्रम में हर साल शस्त्र पूजा का विशेष महत्व होता. आरएसएस के कुल 101 साल पूरे होने पर संघ की ओर से आज संघ शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है.

शस्त्र पूजा करने की वजह भी जानिए  

ऐसा कहा जाता है कि दशहरा के खास मौके पर शस्त्रधारियों के लिए हथियारों के पूजन का खास महत्व है. इस विशेष दिन पर शस्त्रों की पूजा घरों और संगठनों की ओर से भी की जाती है. बता दें कि मां दुर्गा की नौ दिन की उपासना के बाद 10वें दिन विजय की कामना के साथ शस्त्रों की पूजा की जाती है. विजयादशमी पर शक्तिरूपा दुर्गा, काली की पूजा के साथ शस्त्र पूजा की परंपरा हिंदू धर्म में आदि काल से रही है.

RSS और शस्त्र पूजा का इतिहास

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से प्रति वर्ष शस्त्र पूजन पूरे विधि-विधान से किया जाता है. इस दौरान स्वयंसेवकों को इस बात से रुबरू कराया जाता है कि आखिर शस्त्र धारण करना क्यों जरूरी है. सनातन धर्म के देवी-देवाओं की तरफ से धारण किए गए शस्त्रों का जिक्र करते हुए एकता के साथ अस्त्र-शस्त्र धारण करने की हिदायत दी जाती है.

बता दें कि शस्त्र पूजन के दौरान भगवान के सामने शस्त्रों को रखा जाता है. दर्शन करने वाले बारी-बारी से भगवान के आगे फूल चढ़ाते हैं और फिर शस्त्रों पर फूल चढ़ाते हैं. इस दौरान शस्त्रों पर जल छिड़क-कर पवित्र किया जाता है और महाकाली स्तोत का पाठ कर शस्त्रों पर कुमकुम, हल्दी का तिलक लगाते हैं. फूल चढ़ाने के बाद धूप-दीप मीठे का भोग भी लगाया जाता है. ये पूजा विजयादशमी पर पूरे दिन चलती है.

क्यों साल में केवल 6 त्योहार मनाता है RSS 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपना संगठनात्मक उद्देश्य और समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के लिए साल में केवल 6 त्योहार मनाता है. बताया जाता है कि RSS के प्रकाशन ‘संघ उत्सव’ में इन त्योहारों के महत्व के बार में उल्लेख किया गया है. कहा जाता है कि संघ की ओर से केवल ऐसे पारंपरिक त्योहारों को चुना गया है, जिसको हिंदू धर्म के लोग काफी पहले से मनाते आए हैं. माना जाता है कि इन आयोजनों के माध्यम से संघ स्थानीय समुदायों से संपर्क स्थापित करने और अपनी गतिविधियों से उन्हें परिचित कराने की कोशिश करता है. आरएसएस की ओर से मनाए जाने वाले त्योहार में विजयादशमी, मकर संक्रांति, वर्ष प्रतिपदा, हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव, गुरु पूर्णिमा और रक्षा बंधन शामिल है. 

101 साल पहले हुई थी संघ की स्थापना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव हेडगेवार की ओर से की गई थी. बता दें कि हेडगेवार ने अपने घर पर ही 17 लोगों के साथ गोष्ठी में संघ के गठन की योजना बनाई थी. फिलहाल संघ के मुखिया मोहन भागवत हैं.  साल 1975 में जब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने देश में आपातकाल की घोषणा की, तो उस वक्त संघ पर भी प्रतिबंध लगाया गया था. इसके बाद धीरे-धीरे संगठन का राजनैतिक महत्व बढ़ा. आज के समय में बीजेपी को संघ की राजनैतिक शाखा के तौर पर देखा जाता है. 

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