बीते 48 घंटों के भीतर दिल्ली से कश्मीर जाने वाली दो बसों पर अचानक हमला होता है. पहला हमला 17 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में रात 10 बजकर 45 मिनट पर हुआ और इसके ठीक अगले दिन, दूसरा हमला पंजाब के खन्ना में रात 11 बजकर 15 मिनट पर हुआ. दोनों ही घटनाओं में बसें दिल्ली से श्रीनगर जा रही थीं और दोनों ही बसें एक ही ट्रैवल कंपनी 'स्टार वर्ल्ड एडवेंचर' की थीं.
लगातार दो दिनों तक श्रीनगर जाने वाली बसों पर हुए इन हमलों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या कश्मीर जाने वाली बसों को किसी सोची-समझी साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है? या फिर इन घटनाओं को तूल देकर कोई सियासी एजेंडा सेट किया जा रहा है?
ये मुद्दा अब सिर्फ एक सड़क विवाद तक सीमित नहीं रह गया है. अब ये नफरती आग की आंच जम्मू-कश्मीर तक पहुंच चुकी है, जहां मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला तक इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जता रहे हैं. इसीलिए सबसे पहले आपको ये समझना चाहिए कि ग्राउंड जीरो पर असल में हुआ क्या था.
करनाल के एक ढाबे पर जब ये बस रुकी, तो वहां कुछ लोगों ने अचानक बस पर हमला बोल दिया. ईंट-पत्थर चले, बस के शीशे तोड़ दिए गए. इस पूरे हंगामे में बस में सवार एक बुजुर्ग यात्री घायल हो गए और आरोप है कि बस के ड्राइवर के साथ भी मारपीट की गई.
इस घटना के बाद बस के ड्राइवर और स्टाफ ने जो दावा किया, उसने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया. ड्राइवर और बस के स्टाफ ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनकी बस को 'दहशतगर्द की गाड़ी' कहा. और यही वो शब्द है, जिसने ये नैरेटिव गढ़ा कि श्रीनगर जा रही बस को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.
जब करनाल से निकली ये बस श्रीनगर पहुंची, तो ये खबर भी घाटी में फैल गई. बात मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तक पहुंची और उन्होंने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में एक पोस्ट लिखा. उन्होंने लिखा, "ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं होनी चाहिए थी. मुझे उम्मीद है कि नायब सिंह सैनी और हरियाणा पुलिस आरोपियों को पकड़ेगी और ऐसा एक्शन लेगी कि ऐसी घटना भविष्य में दोबारा न हो."
पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने भी इस मामले पर सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा, "ऐसे लोग हैं जो मुल्क में तूफान उठाना चाहते हैं. नहीं तो हालात खराब हो सकते हैं."
इस पूरी घटना पर जिस तरह से सियासी बयानबाजी तेज हुई है और कश्मीर की राजनीति में उबाल आया है, उसके बाद यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के नेताओं की प्रतिक्रिया क्या है.
करनाल की इस घटना की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अगले ही दिन इसी कंपनी की एक और बस पर पंजाब के खन्ना में पथराव हो गया. रात के अंधेरे में हुए इस हमले के वक्त बस में 40 यात्री सवार थे. बस के शीशे टूटे, लेकिन गनीमत ये रही कि कोई घायल नहीं हुआ.
लगातार दो दिनों तक दो बसों पर रात के वक्त हमला, ड्राइवर को दहशतगर्द कहने का आरोप और कश्मीर की बसों को हरियाणा न आने की धमकी. ये दावे इतने गंभीर थे कि ज़ी मीडिया की टीम ने खुद इन दोनों मामलों की तह तक जाने का फैसला किया. हमने ये पड़ताल की कि क्या वाकई कश्मीरी होने की वजह से इन बसों को टारगेट किया जा रहा है या फिर मामला कुछ और है?
करनाल में जो हमला हुआ, उसके बारे में जब हमने ढाबे के सुपरवाइजर से बात की, तो सुपरवाइजर इस कहानी का एक अलग एंगल बता रहे हैं. उनका कहना है कि आरोपी नशे में थे.
यानी एक तरफ बस के ड्राइवर का दावा है कि उन्हें कश्मीरी होने के कारण निशाना बनाया गया, लेकिन ढाबे के सुपरवाइजर का कहना है कि ये पूरा झगड़ा शराबियों ने पार्किंग के विवाद को लेकर किया था.
हैरानी की बात ये है कि बस स्टाफ ने खुद पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई. लेकिन हरियाणा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया. वो जिस कार में बैठकर शराब पी रहे थे, उस गाड़ी को भी जब्त किया.
पुलिस की जांच में जो सच सामने आया है, वो किसी साजिश का नहीं, बल्कि शराबियों के हुड़दंग का है. पुलिस ने जब 'दहशतगर्द' वाले बयान की जांच की, तो क्या सच निकला, ये भी जांच का अहम हिस्सा है.
पुलिस की जांच साफ इशारा कर रही है कि करनाल की घटना शराब के नशे में पार्किंग को लेकर हुई एक झड़प थी. रही बात पंजाब के खन्ना में हुए हमले की, तो वहां हमलावर और वजह दोनों फिलहाल अज्ञात हैं और पुलिस जांच कर रही है. अब तक की जांच में इन दोनों हमलों के बीच कोई कनेक्शन स्थापित नहीं हो पाया है.
ऐसे में सिर्फ एक धारणा के आधार पर ये कह देना कि 'श्रीनगर जाने वाली बसों को निशाना बनाया जा रहा है', पूरी तरह से गलत होगा. हां, किसी भी आम नागरिक को 'आतंकवादी' या 'दहशतगर्द' कहना निंदनीय है, लेकिन शराब के नशे में धुत एक व्यक्ति की अभद्र टिप्पणी को पूरे राज्य की भाषा मान लेना और उस पर राजनीति करना भी उतना ही खतरनाक है.