मंगलवार को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) का विजयादशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम में नागपुर में आयोजित किया गया. आज का यह कार्यक्रम इसलिए भी खास है, क्योंकि संघ ने अपनी स्थापना के कुल 101 साल पूरे कर लिए हैं. नागपुर में RSS चीफ मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की, इसके बाद उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित किया. आरएसएस चीफ ने अपने संबोधन के दौरान बंगाल के राज नायारण बसु का जिक्र किया. उनके जन्म के 200 साल पूरे हो रहे हैं.
दरअसल, विजयादशमी का दिन आरएसएस के लिए खास होता है. साल 1925 में विजयादशमी के दिन ही RSS की स्थापना की गई थी. इस खास दिन पर आरएसएस से जुड़े स्वयंसेवक शस्त्रों की पूजा करते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी उत्सव भी मनाया जाता है. नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों के परेड को सलामी दी. वहीं, उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जब भी हम डरे, तो दुर्बल हो गए. हमें यह डर रहा कि हम रहेंगे की नहीं. दुर्बल व्यक्ति खुद को दरवाजों में बंद कर लेता है.
RSS के विजयादशमी समारोह में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जब हमारा देश विदेशी हमलावरों के हमलों से जूझ रहा था, जब वे यहां 'स्वधर्म' का पालन करने वालों पर आतंक फैला रहे थे, और यहां आतंक का माहौल था, तब संत रविदास ने 'स्वधर्म निष्ठा', सामाजिक सद्भाव और भक्ति का संदेश फैलाया. अपने जीवन के उदाहरण से उन्होंने उस समय के समाज को दिलासा दिया और उनका हौसला बढ़ाया, साथ ही उनकी खूबियों को बनाए रखा.
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: At RSS' Vijayadashami celebrations, RSS chief Mohan Bhagwat says, "When our country was reeling under the attacks of foreign invaders, when they were unleashing terror on those who followed 'svadharma' here, and there was an atmosphere of terror here, Sant Ravidas spread the message of 'svadharma nishtha', social harmony, and devotion. With the example of his own life, he gave comfort to the society of the time and boosted their morale, while upholding their quality..." (Video: RSS)
— ANI (@ANI) October 20, 2026
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में अलग-अलग पंथ, प्रांत, जातियां, भाषाएं, खानपान और रीति-रिवाज हैं. लेकिन भारत को एकजुट होकर आगे बढ़ना है. भागवत ने कहा कि देश पहले भी एक होकर आगे बढ़ा है और भविष्य में भी इसी एकता के साथ आगे बढ़ता रहेगा. आरएसएस चीफ ने कहा कि यह हमारी सनातन काल से चली आई परंपरा है. सृष्टि में विविधता है. यह बिल्कुल स्वाभाविक है. विविधता जितनी स्वाभाविक और परिवर्तनशील है, उतनी ही संपूर्ण अस्तित्व की एकता का सत्य अचल, अटल और शाश्वत है.'
RSS चीफ मोहन भागवत ने कहा कि संघ का काम, जो 100 साल से चल रहा है, वह 'स्व' को जगाता है। उसी 'स्व' के सिद्धांत के आधार पर, भारत को एक करने और उसे मजबूत बनाने की कोशिशें हो रही हैं.'स्वबोध' संविधान की प्रस्तावना में दिखता है, हम, भारत के लोग. 'हम', 'स्व' की वह भावना हमारा इमोशनल जुड़ाव है जिससे इतना अलग-अलग तरह का देश पुराने समय से हमेशा एक देश, एक समाज, एक राष्ट्र रहा है. जब हम यह भूल गए, तो हमने गिरावट देखी, हम बंट गए और कमजोर हो गए, हम इतने नीचे गिर गए कि हमें सैकड़ों साल का गुलामी का दंश झेलना पड़ा.
#WATCH | Nagpur, Maharashtra: At RSS' Vijayadashami celebrations, RSS chief Mohan Bhagwat says, "...Sangh's works, which have been ongoing for 100 years, are something that awakens 'sva'. On the basis of the ethos of that 'sva', efforts are being made to unite India and make it stronger...'Svabodh' is reflected in the Preamble of the Constitution - "We, the people of India." That sense of 'we', 'sva' is our emotional bonding with which such a multidiverse country has always been one country, one society, one nation since ancient times...When we forgot this, we saw a downfall — we got divided and weakened, we dropped so low that we had to endure hundreds of years of colonialism." (Video: RSS)
— ANI (@ANI) October 20, 2026
अपने संबोधन में फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि एक पश्चिम से आंधी चली है, जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था और संस्कार का विरोध करती है और उसको नष्ट करना चाहती है. उन्होंने कहा कि देखिए आज फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश में क्या हुआ. वे कहते हैं, रिजीम चेंज करने से परिस्थित बदलेगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ, आज भी नहीं होगा.