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भारतीय सेना में हर दिन तकनीक के लिहाज से नए-नए बदलाव हो रहे हैं. ताजा खबर आई है कि जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में सरहदों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए रोबोटिक डॉग को तैनात किया गया है. इन रोबोटिक डॉग्स में कई खास तकनीक मौजूद हैं, जिनकी मदद से ये जवानों के काम को आसान करेंगे. हाल ही में भारतीय
इन डॉग्स की खासियत यह है कि ये मुश्किल पहाड़ी रास्तों और उन इलाकों में भी काम कर सकते हैं, जहां सैनिकों के लिए लगातार निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है. इनमें लगे कैमरे और सेंसर आसपास की गतिविधियों की जानकारी रियल टाइम में जवानों को उपलब्ध कराने में मदद करेंगे. सेना इनका इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ एंबुश ऑपरेशन में करेगी.
सीधे शब्दों में कहें तो एंबुश ऑपरेशन का मतलब घात लगाकर हमला करना होता है. सैन्य भाषा में कहें, तो जब फौजी किसी दुश्मन की संभावित आवाजाही वाले रास्ते पर छिपकर उसकी गतिविधियों का इंतजार करते हैं और सही मौका मिलने पर अचानक हमला करते हैं, तो इसे एंबुश यानी घात लगाकर हमला करना कहते हैं.

रोबोटिक डॉग्स की एक खासियत यह भी है कि इनकी मदद से सामान भी ढोया जा सकता है. संसद टीवी की 24 फरवरी 2026 की रिपोर्ट में एक रोबोटिक डॉग का वजन 51 किलोग्राम है और पेलोड क्षमता 10-15 किलोग्राम बताई गई है. ऐसे में जरूरत पड़ने पर इनकी मदद से गोला-बारूद और दूसरे जरूरी सामान को अग्रिम चौकियों तक पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी.
Akhnoor, Jammu and Kashmir: The Indian Army has deployed robotic mules to strengthen surveillance and security along the border. Equipped to provide real-time intelligence, these robots are being used for patrolling, ambush operations and monitoring enemy activity, even in difficult terrain.
— IANS (@ians_india) November 7, 2026

भारत ही नहीं, इस दिशा में दुनिया की अन्य सेनाएं भी तेजी से कदम बढ़ा रही हैं. इनमें सबसे प्रमुख नाम चीन का है. चीन सैन्य अभ्यासों में रोबोटिक डॉग और मानवरहित वाहनों की क्षमताओं को परख रहा है. साथ ही यूक्रेन में इनका इस्तेमाल युद्ध के दौरान गोला-बारूद पहुंचाने और घायल सैनिकों को निकालने में हो रहा है. यूक्रेन में अक्टूबर 2026 में ऐसे रोबोटों ने 31398 मिशन पूरे किए.