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उत्तराखंड की शांत पहाड़ियों के बीच जब भी अंकिता भंडारी का नाम गूंजता है, तो एक परिवार के बिखरे सपनों और कभी न खत्म होने वाले दर्द की तस्वीर आंखों के सामने आ जाती है. 19 साल की एक मासूम लड़की, जिसने अपने परिवार की मदद करने के लिए रिसेप्शनिस्ट की नौकरी शुरू की थी, आज न्याय की प्रतीक बन चुकी है. उसकी असमय मौत को लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन उसके माता-पिता आज भी इन्साफ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं.
उत्तराखंड का अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर से सुर्खियों में है. अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले फिर सियासी में बयानबाजी शुरू हो गई हैं. कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के मामले को लेकर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक चिट्ठी लिखी है. राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर इस चिट्ठी को साझा किया है.
राहुल गांधी ने अपने पत्र में अंकिता के माता-पिता की पीड़ा को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने लिखा कि उत्तराखंड की इस बेटी के साथ जो हुआ, उसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था. एक गरीब परिवार ने अपनी बेटी को बड़े अरमानों से पढ़ाया-लिखाया था, लेकिन उसकी ईमानदारी और स्वाभिमान की कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी. देश की किसी भी बेटी के साथ अन्याय होना पूरे समाज की विफलता है. राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से अपील की कि वे इस मामले का संज्ञान लें ताकि अंकिता के परिजनों को बिना किसी दबाव और देरी के इन्साफ मिल सके.
राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रपति को लिखे गए इस पत्र ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है. यह पत्र केवल एक राजनीतिक बयान या औपचारिकता नहीं है, बल्कि उन हजारों-लाखों आम लोगों की भावना का प्रतीक है जो अंकिता के लिए इन्साफ की आस लगाए बैठे हैं. अब सवाल यह उठता है कि क्या राष्ट्रपति कार्यालय के इस हस्तक्षेप से जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी? क्या उस बेबस मां-बाप को आखिरकार वह सुकून मिल पाएगा, जिसके लिए वे हर दिन लड़ाई लड़ रहे हैं? देश आज भी अपनी बेटी अंकिता के लिए सच और न्याय की राह देख रहा है. राहुल की चिट्ठी से परिवार न्याय के लिए उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है.
अंकिता भंडारी सिर्फ 19 साल की थीं, जब 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी. अंकिता ऋषिकेश के पास वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं. रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को इस मामले में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुना दी है. वहीं अंकिता के परिवार और जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ. भारी विरोध-प्रदर्शनों के बाद, इस साल जनवरी में उत्तराखंड सरकार ने यह सवाल सीबीआई (CBI) के हवाले किया. अंकिता को मुकम्मल इंसाफ दिलाने के लिए जांच आज भी जारी है.