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Himanta Biswa Sarma Statement on Congress Assets: असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF से संपर्क के कांग्रेस के आरोप पर मुख्यमंत्री डॉक्टर हिमंता बिस्वा सरमा ने पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि एआईयूडीएफ की तुलना में कांग्रेस में उनके ज्यादा लोग हैं. उन्होंने कहा कि 'आज भी असम कांग्रेस में मेरे धुरंधर असेट्स हैं. वक्त आने पर उनका इस्तेमाल करेंगे'. इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी संलग्न किया, जिसमें मीडिया से उनकी बातचीत दर्ज है.
वीडियो में पत्रकारों ने सरमा से गौरव गोगोई के एक आरोप के बारे में पूछा. गोगोई ने कथित तौर पर कहा था कि हिमंत बिस्वा सरमा AIUDF के अभिभावक हैं. इसका जवाब देते हुए सरमा ने स्पष्ट कहा कि अगर ऐसा है तो बीजेपी को जीतना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि एआईयूडीएफ की तुलना में कांग्रेस में उनके ज्यादा लोग हैं.
आज भी असम कांग्रेस में मेरे धुरंधर assets हैं। वक़्त आने पर उनका इस्तिमाल करेंगे
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) September 28, 2026
उन्होंने कांग्रेस के पूर्व नेता प्रद्युत बोरदोलोई का जिक्र करते हुए पूछा कि वे कहां शामिल हुए. प्रद्युत बोरदोलोई कुछ महीने पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे. सरमा ने आगे कहा कि पंचायत चुनावों में कांग्रेस की मदद से जीतने वाले कई लोग अब कहां हैं. वे अब बीजेपी में अपना भविष्य ढूंढ रहे हैं. मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा कि बीजेपी में एआईयूडीएफ के लोग ज्यादा शामिल नहीं हुए, बल्कि कांग्रेस से ज्यादातर लोग आए हैं. इसलिए गौरव गोगोई ने उनके लोगों को कांग्रेस में बनाए रखा है.
कांग्रेस पर तंज कसते हुए सरमा ने कहा कि वे जाल फेंकने का इंतजार कर रहे हैं और समय आने पर सभी को समेट लेंगे. प्रतीकात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा, 'जाल डालो. अगर रोहू खाना है तो रोहू खाओगे, अगर बोराली खाना है तो बोराली खाओगे. है ना?'
बताते चलें कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा प्रचंड बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता में आए हैं. बीजेपी में शामिल होने से पहले हिमंता खुद कांग्रेस में थे. बीजेपी में आने के बाद वे पहले राज्य में मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री बनाए गए. उनके नेतृत्व में बीजेपी न केवल असम बल्कि समूचे उत्तर पूर्व में मजबूत हो रही है.
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक, हिमंता का यह बयान सोची-समझी रणनीति का एक हिस्सा है. वे ऐसा अक्सर करते रहते हैं. इस रणनीति के जरिए वे विपक्ष को कमजोर दिखाने, अपने समर्थकों को उत्साहित करने और संभावित दल-बदल की अफवाहों को हवा देने का काम करते हैं.
इस बार भी सरमा ने संदेश दिया है कि वे विपक्षी दलों के अंदर भी प्रभाव रखते हैं और वक्त आने पर कांग्रेस के नेता उनके कहने पर पार्टी छोड़कर बीजेपी में आ सकते हैं. हालांकि, कांग्रेस ने उनके इन दावों को खारिज कर दिया है और इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है.