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'कॉकरोच जनता पार्टी' की तरह अब 'मक्खी जनता पार्टी' मैदान में उतर चुकी है. खास बात यह है कि इस संगठन का जन्म भी सीजेआई सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद हुआ है. दरअसल, SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP ने हाल ही में दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन को लेकर सरकार ने दिल्ली मेट्रो, रेलवे और सार्वजनिक परिवहन पर रोक लगा दी थी. जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो सीजेआई सूर्यकांत ने इस फैसले के विरोध में टिप्पणी की थी कि 'मक्खी को मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता'. माना जा रहा है कि सीजेआई सूर्यकांत की इसी टिप्पणी के विरोध में सोशल मीडिया पर मक्खी जनता पार्टी (MJP) का जन्म हुआ है. अब एमजेपी का दावा है कि उसने उसने इंस्टाग्राम पर महज 72 घंटे में 40 लाख से ज्यादा व्यूज और 3.30 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटाए हैं.
MJP को अपने प्रवक्ताओं की तलाश
एमजेपी ने अपने एक पोस्ट में सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी का विरोध किया है. एमजेपी ने लिखा कि जब CJI ने ही कहा कि ‘Can’t use hammer to kill a fly!’ तो अब मक्खी भी बोलेगी, हम भी किसी से कम नहीं. इस संगठन की ओर से अपने प्रवक्ताओं की तलाश शुरू कर दी गई है.
मंगलवार (13 अक्टूबर) को संगठन ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक स्टोरी लगाकर इसकी जानकारी दी. एमजेपी ने सोशल मीडिया पर AISA अध्यक्ष की नेहा बोरा के प्रदर्शन का सपोर्ट किया है. इतना ही नहीं एमजेपी ने दावा किया कि वह 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) से संपर्क कर रही है, ताकि आपसी सहमति के आधार पर चीजों को बदला जाए.
इंस्टाग्राम पर MJP का इतिहास
जानकारी के मुताबिक इंस्टाग्राम पर एमजेपी पेज का गठन जून 2021 में हुआ था. ‘makhijantaparty.ig’ नाम अपनाने से पहले करीब 8 बार इसका यूजरनेम बदला गया था. हालांकि, इस संगठन का दावा है कि उसने महज 72 घंटे में 40 लाख से ज्यादा व्यूज और 3.30 लाख से अधिक फॉलोअर्स हासिल किए हैं.
कैसे हुआ था CJP का गठन?
बता दें कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' का जन्म भी सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी के खिलाफ ही हुआ था. 15 मई 2026 को सीजेआई सूर्यकांत ने कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर 'कॉकरोच' से कर दी थी. उनकी इस टिप्पणी के खिलाफ अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर CJP पेज का निर्माण किया.
उन्होंने देश के युवाओं को सीजेआई की टिप्पणी के खिलाफ सोशल मीडिया पर एकजुट किया. बाद में उन्होंने पेपर लीक जैसे मुद्दे को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक आंदोलन किया, जिसे देशभर के युवाओं का समर्थन हासिल हुआ और अंत में धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था.