'हमें इंसाफ मिला, बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी'...कातिल बहू को फांसी की सजा पर आया मां का बयान
पति की हत्या करके सांप से डसवाने वाली रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा हो चुकी है. जिस वक्त यह फैसला आया उस वक्त मृतक अमित की मां कोर्ट रूम में मौजूद रहीं. बाहर आते ही उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया है.
मेरठ जिला कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. पति की हत्या करने वाली रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा हुई है. दोनों ने मिलकर अमित का कत्ल किया था, फिर उसे सांप से डसवाने की साजिश रची थी. इस मामले में कोर्ट ने 547 दिन बाद दोनों को मौत की सजा का फैसला सुनाया है. शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जब जज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों से सवाल पूछा तो रविता सिर्फ अपने तीन मासूम बच्चों की दुहाई देते हुए फूट-फूट कर रोने लगी. इस फैसले का मृतक अमित की मां मुनेश ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा अदालत के इस न्याय से उनकी आत्मा को शांति मिली है.
फांसी की सजा का फैसला आने के बाद अमित की मां मुनेश ने कहा, 'बस मैं यही कहना चाहूंगी कि उन्हें फांसी की सजा मिल गई. इससे हमारी आत्मा को शांति मिली है और हमारे बच्चे को भी इंसाफ मिला है, हमें उम्मीद थी कि अदालत हमें न्याय देगी, अदालत ने सही फैसला सुनाया.'
'अमित के तीनों बच्चे को पालूंगा'
अमित के तीन बच्चों को लेकर किए गए सवाल पर मां मुनेश ने कहा, 'अब मैं अमित के तीनों बच्चों को कैसे पालूंगी, क्या करूंगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन मैं उन्हें पालूंगी, जैसे भी मुझसे हो सकेगा. जब उन्होंने मेरे बच्चे के बारे में नहीं सोचा, तो मैं उनके बच्चों को जरूर पालूंगी, हम अपने केस के फैसले से बहुत खुश हैं कि उन्हें फांसी की सजा मिली.'
अमित के भाई ने क्या कहा?
अदालत के फैसले का अमित के भाई सोनू ने भी स्वागत किया है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं अदालत के फैसले से बहुत खुश हूं, आरोपियों ने जिस तरह का अपराध किया, उसके लिए उन्हें फांसी की सजा ही मिलनी चाहिए थी, ताकि भविष्य में ऐसा अपराध करने से पहले कोई भी सौ बार सोचे.'
सोनू ने यह भी बताया कि अगर दोषी इस फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हैं, तो परिवार आगे भी कानूनी लड़ाई लड़ेगा, वे हत्यारों को फांसी की सजा दिलाने के लिए अंत तक लड़ेंगे. उन्होंने बताया कि अमित की दो बेटियां और एक बेटा है, जिनका भरण-पोषण परिवार के लोग और उनके चाचा मजदूरी करके कर रहे हैं.
जज के सवाल पर फूट फूट कर रोए दोषी
शुक्रवार को अदालत में सजा सुनाने से पहले कोर्ट ने रविता और अमरदीप का पक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुना. जज ने दोनों से पूछा कि तुम दोनों को हत्या का दोषी ठहराया गया है, क्या सजा चाहते हो?
जज के सवाल पर रविता ने कहा, 'मेरे 3 छोटे-छोटे बच्चे हैं, उनका ख्याल रखा जाए', फिर वह चुप हो गई. वहीं अमरदीप ने कहा, 'मेरे मां-बाप बूढ़े हैं, उनकी सेवा करने वाला कोई नहीं है, उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे.' इसके बाद दोनों फूट-फूट कर रोने लगे.
फैसले के बाद पुरानी बैरक में भेजे गए दोनों दोषी
मौत की सजा का फैसला आने के बाद चौधरी चरण सिंह जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा का बयान भी सामने आया है. उन्होंने बताया कि फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद रविता और अमरदीप रो रहे हैं, उन्हें पुरानी बैरक में भेजा गया है, अब जैसे ही जजमेंट की कॉपी मिलेगी तो उन्हें सजायाफ्ता कैदियों की बैरक में शिफ्ट किया जाएगा.
अब जान लीजिए पूरा मामला क्या है?
मामला 17 अप्रैल 2025 की रात का है. जब रविता ने अमरदीप के साथ मिलकर पति अमित कश्यप का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतारा था. फिर सांप डसने से मौत दिखाने के लिए बिस्तर पर सांप छोड़ दिया था. हालांकि ये साजिश पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उजागर हुई थी. जब अमित के शव का पोस्टमार्टम कराया गया तो शरीर पर सांप के डसने के 10 निशान मिले थे. पांच दिन बाद आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अमित की मौत सांप के काटने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई थी.
अमित के शरीर पर सांप के डसने के निशान थे तो सभी को लगा कि उसकी मौत सांप के काटने से हुई है. इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने शक के आधार पर रविता को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अमरदीप का नाम बताया. फिर दोनों से सख्ती से पूछताछ हुई तो दोनों ने जुर्म कबूल किया. जांच में यह भी सामने आया कि सांप जहरीला नहीं था और उसके दांत भी नहीं थे.
पति को पत्नी के अफेयर का पता चला
दरअसल, अमित कश्यप मेरठ के अकबरपुर सादात गांव के रहने वाले थे, जो टाइल्स-पत्थर लगाने का काम करते थे. अमरदीप उनके साथ ही काम करता था, जिसका घर आना-जाना था. इसी दौरान अमरदीप और अमित की पत्नी रविता के बीच प्रेम संबंध बने. जब अमित को इस बात का पता चला तो दोनों ने मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची.
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों ने अमित को ठिकाने लगाने के लिए एक सपेरे से 1,000 रुपये में सांप खरीदा था. फिर 17 अप्रैल 2025 की रात अमित के सोने के बाद रविता ने अमरदीप को घर बुलाया. दोनों ने मिलकर अमित की हत्या की और बिस्तर पर सांप छोड़ दिया. वारदात के बाद अमरदीप वहां से चला गया और रविता दूसरे कमरे में सोने चली गई. सुबह घरवालों ने अमित को मृत पाया.
87 तारीखें, 12 से ज्यादा गवाह और 551 दिन बाद फैसला
इस पूरे मामले में हत्या के 60 दिन बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी, एसीजेएम जयवीर सिंह नागर की कोर्ट में 551 दिन में 87 तारीखें और 12 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए. फिर 7 अक्टूबर को कोर्ट ने रविता और अमरदीप को दोषी करार दे दिया और अब फांसी की सजा का फैसला आया है.
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