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साहिल और मुस्कान के बाद अब मेरठ के एक दूसरे बहुचर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में कोर्ट ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया. दोपहर 3 बजे के बाद जज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश की गई मृतक की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई.
इस हत्याकांड में पत्नी रविता ने प्रेमी के साथ मिलकर पहले पति की हत्या कर दी थी और फिर उसके बिस्तर पर सांप डालकर नई साजिश रची थी. शुक्रवार को कोर्ट में आखिरी दलीलें हुईं. जिसके बाद जेल में बंद रविता और अमरदीप का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष सुना और दोनों को सजा-ए-मौत का ऐलान किया.
3 मार्च 2025 की रात को मुस्कान ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या कर उसे नीले ड्रम में डाल दिया था. ये मामला सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा था कि इसके लगभग 40 दिन बाद ही 12 अप्रैल को एक और ऐसा ही मामला सामने आया था, जिसमें पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी थी. इस हत्याकांड को छिपाने के लिए पत्नी रविता ने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर एक साजिश भी रची थी, जिसमें उन्होंने पति के बिस्तर पर सांप छिपा दिया था. इसके बाद सुबह ये बात फैला दी गई थी कि पति को सांप ने काट लिया, जिससे उसकी मौत हो गई.
इस हत्याकांड को शुरू में जहरीले सांप के काटने की वजह से नेचुरल डेथ का रूप देने की कोशिश की गई थी.हत्याकांड को अंजाम देने वाली पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को शुरू में ऐसा लग रहा था कि वो कानून को धोखा देने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन जब पति अमित की हत्या के बाद उसकी डेडबॉडी का पोस्टमॉर्टम करवाया गया, तो पता चला कि पति की मौत सांप के जहर से नहीं, बल्कि दम घुटने से हुई है. इसके बाद पुलिस ने पत्नी को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया.
12 अप्रैल 2025 की रात अमित कश्यप के घर में जो हुआ, उसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया. अमित की पत्नी रविता ने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर अपने ही पति की गला घोंटकर हत्या कर दी. इस खौफनाक साजिश की वजह दोनों का अवैध संबंध था, जिसके रास्ते में अमित रोड़ा बन रहा था. हत्या को महज एक हादसा साबित करने के लिए दोनों ने बेहद शातिराना चाल चली. अमित के शव के पास जहरीला सांप रख दिया गया, ताकि देखने वालों को लगे कि मौत सांप के काटने से हुई है. शुरुआत में मामला साधारण लग रहा था, लेकिन जब पुलिस जांच आगे बढ़ी, तो सच की परतें खुलने लगीं.