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जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट: मारे गए हाशिम मूसा के ठिकाने से मिला राशन का बैग, जंगलों में छिपे 40 आतंकियों के सफाए की तैयारी

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के मारे जाने के 5 दिन बाद पुलिस ने उसके लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज कर दी है.

Written By Khalid Hussain Edited By Bhoopendra Rai
Published: Oct 05, 2026, 05:29 PM IST | Updated: Oct 05, 2026, 05:37 PM IST
Image Credit: हाशिम मूसा के एनकाउंटर वाली जगह मिला खाने-पीने की चीजों का बैग
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बडगाम जिले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप कमांडर हाशिम मूसा का खात्मा हो चुका है. उसके एनकाउंटर के 5 दिन बाद कवन जंगल इलाके में पलमैदान के पास दवाइयों और खाने-पीने की चीजों से भरा एक बैग बरामद किया गया है, जिसके बाद पुलिस ने उसके लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज कर दी है. इनपुट है कि पीर पंजाल के जंगलों में 35-40 और विदेशी आतंकवादी सक्रिय हैं.

बैग मिलने के बाद सुरक्षा बलों का मानना है कि छिपे हुए आतंकवादियों को मदद देने वाला एक अच्छी तरह से संगठित स्थानीय नेटवर्क एक्टिव है. अगर इस स्थानीय नेटवर्क को पकड़ लिया जाता है, तो छिपे हुए आतंकवादियों को खत्म करना आसान हो जाएगा.

गृह मंत्रालय ने मूसा के खात्मे को जम्मू-कश्मीर में LeT नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका बताया है. मारा गया मूसा LeT कमांडरों के चार सदस्यीय समूह का आखिरी जीवित सदस्य था, जो 2022 से इस क्षेत्र में एक्टिव था और कई बड़े हमलों में शामिल था. उसकी मौत के साथ ही पूरा समूह खत्म हो गया है. इससे पहले उसके तीन साथियों को खत्म किया जा चुका था. जुनैद भट को 3 दिसंबर 2024 को दाचीगाम में मारा गया था, जबकि सुलेमान को 28 जुलाई 2025 को मौत के घाट उतारा गया था और 4 सितंबर 2026 को तीसरे साथी यासिर को ऑपरेशन असधर के तहत ढेर किया गया था.

29 सितंबर को ढेर हुआ था मूसा

दरअसल, 29 सितंबर की रात बडगाम के कवन जंगलों में सुरक्षा बलों ने मूसा को ढेर कर दिया था. यह कार्रवाई सटीक खुफिया इनपुट मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के SOG, सेना और CRPF ने मिलकर की थी. अगली सुबह तलाशी के दौरान पलमैदान इलाके से उसकी लाश और भारी मात्रा में हथियार-गोला-बारूद बरामद हुआ था. यह कार्रवाई पीर पंजाल के घने जंगलों में छिपे विदेशी आतंकियों और उनके मददगारों को साफ करने के लिए चल रहे बड़े अभियान का हिस्सा थी.

चार बड़े आतंकियों के खतरनाक गिरोह का खात्मा

गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह आतंकी गिरोह कश्मीर में हुए कई बड़े हमलों में शामिल रहा है, जैसे कंडी, हालन, डेरा की गली, शिव खोरी, गगनगीर और बैसारन के हमले. इसके अलावा, अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में भी मूसा का नाम सीधे तौर पर सामने आया था.

घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती

मूसा के खात्मे के बाद जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है. खुफिया जानकारी से पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर इस नुकसान से बौखलाकर जवाबी हमले की कोशिश कर सकते हैं.
श्रीनगर को अन्य जिलों से जोड़ने वाली प्रमुख सड़कों और रास्तों पर सुरक्षा वाहन और जवान तैनात किए गए हैं. वाहनों की तलाशी और रात में चेकिंग शुरू कर दी गई है. वहीं संवेदनशील इलाकों में गश्त दोगुनी कर दी गई है, ताकि संभावित घुसपैठ न हो पाए.

धार्मिक स्थलों, VVIPs और बाजारों पर कड़ी नजर

एजेंसियों को जानकारी मिली है कि अपने टॉप कमांडर के मारे जाने के बाद बौखलाए पाकिस्तानी आतंकी अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए धार्मिक स्थलों, VVIPs, बाजारों और प्रवासी मजदूरों को निशाना बना सकते हैं. इस बड़े इनपुट के बाद सेना, पुलिस और CRPF ने मिलकर सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और चौकसी कई गुना बढ़ा दी है. सुरक्षा बलों का पूरा फोकस घाटी में छिपे करीब 35-40 विदेशी आतंकियों और आतंकियों को छिपकर मदद देने वाले उनके लोकल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने पर है.

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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