डल झील में अब नहीं चलेगी मनमानी: मोटरबोट और जेट स्की पर ब्रेक, हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
डल झील में जाने वाले सैलानी अब मोटरबोट और जेट स्की नहीं चला सकेंगे. जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने डल झील के अलावा पर्यावरण को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए सख्त टिप्पणी करते हुए प्रतिबंधों की सख्ती से पालना सुनिश्चित कराने के आदेश दिए हैं,
कश्मीर की मशहूर डल झील को पर्यावरणीय नुकसान से बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने झील में मोटर से चलने वाले शिकारों और ईंधन से चलने वाली जेट स्की के इस्तेमाल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द सौर ऊर्जा और बिजली से चलने वाले विकल्पों पर विचार करें. मुख्य न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की खंडपीठ ने गुरुवार को ये कड़े निर्देश जारी किए.
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बेंच ने जम्मू-कश्मीर लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी, पर्यटन विभाग और पुलिस को आदेश दिया कि वे इन निर्देशों का तुरंत और पूरी तरह पालन सुनिश्चित करें. कोर्ट ने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने पर इसे 'अदालत की अवमानना' माना जाएगा. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे बिना अनुमति चल रही ऐसी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें.
न्यायाधीशों ने कहा, 'पर्यटन और झील के अस्तित्व के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सौर ऊर्जा और बिजली से चलने वाली नावें एक समाधान हो सकती हैं.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच तालमेल बिठाना बेहद जरूरी है.
इकोसिस्टम बचाना जरूरी
हालांकि, यह प्रतिबंध उन मोटर चालित नावों पर लागू नहीं होगा, जिनका इस्तेमाल प्रशासन आपातकालीन सेवाओं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने या आपदा प्रबंधन के कार्यों के लिए करता है.
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पूरे क्षेत्र में झीलों का पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) एक बड़ी पर्यावरणीय चिंता बन गया है. इसके लिए स्पष्ट और एकसमान नियमों की जरूरत है, जो प्रदूषण को रोकने के साथ-साथ जिम्मेदार पर्यटन को भी बढ़ावा दें. बेंच ने कहा कि झील की नाजुक पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के संबंध में नीति बनाते समय निष्पक्षता और एकरूपता बनाए रखना बेहद जरूरी है.
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील बी.ए. बशीर और अधिवक्ता फलक बशीर ने तर्क दिया कि मोटरबोट, जेट स्की और ईंधन से चलने वाले अन्य जलयान डल झील के पारिस्थितिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं. उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करने और झील को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए पारदर्शी, एकसमान और पर्यावरण के अनुकूल नियम बनाए जाएं.
डल झील को लेकर बढ़ी चिंता
यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब डल झील की बिगड़ती स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. डल झील कश्मीर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है और श्रीनगर की पहचान का अहम हिस्सा है. लंबे समय से यह झील अतिक्रमण, किनारों पर निर्माण कार्य और जल क्षेत्र के सिकुड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रही है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि 2007 से 2020 के बीच झील के खुले जल क्षेत्र में 10.15 प्रतिशत की कमी आई है. यह क्षेत्र 15.40 वर्ग किलोमीटर से घटकर 12.91 वर्ग किलोमीटर रह गया है.
इस नए निर्देश के साथ हाई कोर्ट ने अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट कर दी है: प्रतिबंध को सख्ती से लागू करें और प्रदूषण-मुक्त बोटिंग तकनीकों की सक्रिय रूप से तलाश करें. संदेश बिल्कुल साफ है कि डल झील में पर्यटन जारी रह सकता है, लेकिन झील को नुकसान पहुंचाकर नहीं.