नेशनल कॉन्फ्रेंस में घमासान: कैबिनेट विस्तार के बाद असंतोष, आगा रुहुल्लाह ने दी इस्तीफे की धमकी, उमर अब्दुल्ला की बढ़ी मुश्किल
जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कैबिनेट विस्तार ने सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने कई सियासी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. खासकर जम्मू क्षेत्र के प्रतिनिधित्व, वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और विभागों के बंटवारे ने पार्टी में असंतोष बढ़ाया है. वहीं सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के तेवर से पार्टी के नेता हैरान हैं. उनकी धमकी ने पार्टी के सामने पैदा हुए इस संकट को और गंभीर बना दिया है.
कैबिनेट विस्तार के बाद जम्मू-कश्मीर में विभागों का बंटवारे से नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. खासकर कैबिनेट एक्सपेंशन से जम्मू क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को लेकर कई नेताओं की नाराजगी दिख रही है. हालांकि कश्मीर घाटी के नेता भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से असंतुष्ट हैं. पार्टी के प्रमुख सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने तो आगामी तीन नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है. इससे पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली विस्तारित मंत्रिपरिषद के आठ मंत्रियों को विभाग सौंप दिए.
मंत्रालयों का बंटवारा 'ट्रांजैक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स, 2019' के नियम 4(2) के तहत हुआ. इसके लिए श्रीनगर स्थित लोक भवन से सरकारी आदेश संख्या 1690-JK(GAD)-2026 जारी किया गया.
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद में सदस्यों की संख्या नौ हो गई है. यह निर्धारित अधिकतम सीमा है. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुसार, मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं.
चार विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह
27 अक्टूबर को लोक भवन में उपराज्यपाल ने कश्मीर घाटी के नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.
अली मोहम्मद सागर: श्रीनगर की खानयार सीट से विधायक. वह सात बार विधायक रह चुके हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूर्व महासचिव हैं.
मीर सैफुल्ला: कुपवाड़ा जिले की त्रेहगाम सीट से विधायक. वह चार बार विधायक रह चुके हैं.
शमीम फिरदौस: श्रीनगर की हब्बा कदल सीट से विधायक. वह तीन बार विधायक रह चुकी हैं और मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली दूसरी महिला मंत्री हैं.
अल्ताफ अहमद वानी उर्फ कालू: अनंतनाग जिले की पहलगाम सीट से विधायक.
जम्मू क्षेत्र के प्रतिनिधित्व पर सवाल
जम्मू क्षेत्र के निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया है. उनके पास पहले खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले और युवा सेवाएं एवं खेल समेत कई विभाग थे.
इस बदलाव के बाद जम्मू क्षेत्र के मुख्य हिस्से से मंत्रिमंडल में कोई मंत्री नहीं रह गया है. अब जम्मू क्षेत्र का प्रतिनिधित्व उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी और जावेद अहमद राणा कर रहे हैं. ये दोनों पीर पंजाल क्षेत्र से आते हैं.
मुख्यमंत्री समेत मंत्रिमंडल के नौ सदस्यों में से 7 कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस स्थिति ने जम्मू क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष बढ़ा दिया है.
किस मंत्री को मिला कौन-सा विभाग?
उमर अब्दुल्ला (मुख्यमंत्री): पर्यटन, सामान्य प्रशासन, आवास एवं शहरी विकास, सूचना, आतिथ्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी.
सुरिंदर कुमार चौधरी (उपमुख्यमंत्री): लोक निर्माण (सड़क एवं भवन), उद्योग एवं वाणिज्य, श्रम एवं रोजगार और कौशल विकास.
अली मोहम्मद सागर: राजस्व, विद्युत विकास, कानून, न्याय एवं संसदीय मामले, आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण (DMRRR) और चुनाव.
सकीना मसूद इट्टू: स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा और समाज कल्याण.
जावेद अहमद राणा: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, जनजातीय मामले और परिवहन.
जाविद अहमद डार: कृषि उत्पादन, वित्त, खनन और सहकारिता.
मीर सैफुल्ला: योजना, विकास एवं निगरानी, संस्कृति, युवा सेवाएं एवं खेल तथा एआरआई और प्रशिक्षण.
शमीम फिरदौस: स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा और जल शक्ति.
अल्ताफ अहमद वानी उर्फ कालू: वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण, ग्रामीण विकास और पंचायती राज.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इन बदलावों को सकारात्मक बताया है. वहीं, कांग्रेस सरकार से बाहर रही है. उसने सरकार में शामिल होने की शर्त जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने से जोड़ रखी है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस में बढ़ी नाराजगी
मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष को उजागर कर दिया है. जम्मू क्षेत्र के पार्टी नेताओं ने खुले तौर पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि इस क्षेत्र से किसी मंत्री को शामिल नहीं करना उसके साथ अन्याय है.
कश्मीर घाटी में भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कई नेता नाराज हैं. सात बार विधायक रह चुके वरिष्ठ नेता मुबारक गुल समेत कई नेताओं ने अपनी अनदेखी पर निराशा जताई है.
पिछले दो दिनों से मुबारक गुल के समर्थक पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. वे अपने नेता के साथ न्याय किए जाने की मांग कर रहे हैं.
अनंतनाग पश्चिम के विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने भी अल्ताफ अहमद वानी उर्फ कालू को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पार्टी के संगठनात्मक पदानुक्रम में कालू उनसे काफी कनिष्ठ हैं.
3 नवंबर को इस्तीफा देंगे आगा रुहुल्लाह?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के प्रमुख सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी की घोषणा है. श्रीनगर से सांसद रुहुल्लाह ने कहा है कि वह 3 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और लोकसभा की सदस्यता, दोनों से इस्तीफा दे देंगे.
यह तारीख उनके पिता और दिवंगत वरिष्ठ शिया धर्मगुरु आगा सैयद मेहदी की शहादत की बरसी भी है. रुहुल्लाह लगातार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की आलोचना करते रहे हैं. उनका आरोप है कि उमर अब्दुल्ला उन वादों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं, जिनके आधार पर नेशनल कॉन्फ्रेंस को कश्मीर में भारी जनादेश मिला था.
अब सवाल यह है कि क्या पार्टी नेतृत्व विधायकों और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर कर पाएगा? या फिर रुहुल्लाह का इस्तीफा पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं को एकजुट करने का कारण बनेगा? इन सवालों के जवाब से तय होगा कि आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस और उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने किस तरह की राजनीतिक चुनौतियां खड़ी होती हैं.