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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच तनाव कम होने के आसार जताए जा रहे हैं. एक दिन पहले तेजी से ऊपर की तरफ भागने वाला क्रूड ऑयल गुरुवार को अचानक धड़ाम हो गया. सवाल यह है एक तरफ हूती विद्रोही मिसाइलें दाग रहे हैं, दूसरी तरफ तेल के दाम में गिरावट क्यों आ रही है? क्या परदे के पीछे अमेरिका और ईरान की कोई बड़ी डील हो रही है? ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 82 सेंट्स गिरकर 114.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. दूसरी तरफ WTI क्रूड 1.04 डॉलर गिरकर $101.74 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. एक दिन पहले ब्रेंट और WTI क्रूड में एक से 3 फीसदी की तेजी देखी गई थी.
ऑयल मार्केट में इस गिरावट के पीछे का सबसे बड़ा कारण अमेरिका की तरफ से शुरू की गई डिप्लोमेसी. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान की सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रजाई को एक चिट्ठी भेजी है. चिट्ठी का मकसद दोनों देशों के बीच रुकी हुई शांति वार्ता को फिर से शुरू करना है. जैसे ही यह खबर बाजार में आई ट्रेडर्स को लगा कि शायद अब जंग के बादल छंट सकते हैं. नोमुरा सिक्योरिटीज के सीनियर इकोनॉमिस्ट युकी तकाशिमा का कहना है कि बाजार में बिकवाली केवल इसलिए दिख रही है क्योंकि लोगों को लगता है कि शांति वार्ता फिर से पटरी पर लौट सकती है.
कागजों पर भले ही शांति को लेकर बातचीत चल रही हो लेकिन मिडिल ईस्ट के आसमान में बारूद की गंध बाकी है. यमन के हूती विद्रोहियों ने अपने हमलों को तेज कर दिया है. गुरुवार तड़के सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि उसने किंगडम के पूर्वी इलाके की तरफ दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया. इससे एक दिन पहले यानी हूतियों ने यमन के अदन एयरपोर्ट पर हमला बोला था.
हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी पर मिसाइल दागी है. यह रिफाइनरी रोजाना 5.50 लाख बैरल तेल प्रोसेस करने की कैपेसिटी रखती है. हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने इस हमले की तुरंत कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस खबर ने तेल बाजार की धड़कनें बढ़ा दी थीं.
इस बीच मीडिएशन कराने में माहिर कतर भी एक्शन में आ गया है. कतर के मध्यस्थों ने ईरान के सामने नया ड्राफ्ट पेश किया, ताकि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रही जंग को खत्म किया जा सके. ईरान के एक सीनियर अधिकारी ने प्रस्ताव को खारिज करते हुए बताया जो किसी ठोस ऑफर के बराबर नहीं है. इसके बावजूद, ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान कूटनीति को पूरा मौका देना चाहता है. उन्होंने संकेत दिए कि अगर उनके सात दिवसीय प्लान को मंजूरी मिलती है तो काम एक हफ्ते से भी कम समय में पूरा हो सकता है.
ऑयल ट्रेडर्स के मन में अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म इलेक्शन को लेकर भी सवाल चल रहा है. 3 नवंबर को होने वाले इन चुनाव के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपना सकता है या सीधे हमला कर सकता है. यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत हुई तो होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल की सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है.