J&K विधानसभा में भारी हंगामे के बीच पूर्ण राज्य का प्रस्ताव पास, BJP का वॉकआउट, CM उमर बोले- 'हम भिखारी नहीं हैं'
28 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव भारी हंगामे के बीच पास हुआ है. बीजेपी विधायकों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए जमकर बवाल काटा और विरोध में वॉकआउट कर दिया. आइए जानते हैं पूरा मामला...
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए लाया गया प्रस्ताव पास कर दिया गया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव सदन में रखा था, ताकि केंद्र पर जम्मू-कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य बनाने का दबाव बनाया जा सके. अब इसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा. करीब तीन घंटे चली तीखी बहस के बाद यह प्रस्ताव बहुमत से पास हुआ है. बीजेपी को छोड़कर बाकी सभी दलों ने इसका समर्थन किया.
विधानसभा में प्रस्ताव पर बहस के दौरान बीजेपी विधायक अपनी सीटों पर खड़े होकर विरोध जताते रहे. आखिर में विरोध करते हुए सदन से बाहर चले गए. उन्हें प्रस्ताव में साल 2000 के स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) और नवंबर 2024 के विशेष दर्जे वाले फैसलों का जिक्र होने पर सख्त ऐतराज था. इससे पहले साल 2000 में भी फारूक अब्दुल्ला सरकार ऐसा ही प्रस्ताव लाई थी, जिसमें 1953 से पहले वाले दर्जे की मांग की गई थी.
उमर अब्दुल्ला ने केंद्र पर साधा निशाना
प्रस्ताव पास होने पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर को किसी के अहसान की जरूरत नहीं है, हम भिखारी नहीं हैं.' उन्होंने कहा, 'हमारा अपमान किया जा रहा है और हम पूर्ण राज्य के दर्जे का अपना अधिकार मांग रहे हैं. यह केंद्र सरकार का कोई अहसान नहीं है. केंद्र सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए. यह सदन केंद्र सरकार से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करता है.'
संशोधन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद बहुमत से मंजूरी
कई विधायकों ने प्रस्ताव में धारा 370, 35A और साल 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को मजबूती से जोड़ने के लिए 10 बदलाव (संशोधन) रखे, जिन पर बारी-बारी से चर्चा हुई. सुझाव देने वाले विधायकों ने अपनी बात पर जोर तो दिया, लेकिन साथ ही मुख्य प्रस्ताव का समर्थन भी किया. वोटिंग के समय बीजेपी विधायक सदन से बाहर चले गए और इसके बाद यह प्रस्ताव बहुमत से पास हो गया.
बीजेपी विधायक ने स्पीकर पर लगाए पक्षपात के आरोप
बीजेपी विधायक आर.एस. पठानिया ने स्पीकर अब्दुल रहीम राथर पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्रस्ताव पेश किया और इसे संविधान के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि विधानसभा न तो संसद को नया कानून बनाने का हुक्म दे सकती है और न ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट सकती है. पठानिया ने दो टूक कहा, 'यह प्रस्ताव सीधे कूड़ेदान में जाएगा. आप जम्मू-कश्मीर की जनता को धोखा क्यों दे रहे हैं?' उन्होंने आरोप लगाया कि स्पीकर ने सदन की गरिमा को गिराया है, इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजेपी लीडर सुनील शर्मा ने विधानसभा में पास हुए प्रस्ताव पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने स्पीकर को पद से हटाने की भी मांग की है. उन्होंने कहा कि बीजेपी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के बिल्कुल पक्ष में है, इस बात पर सरकार से कोई मतभेद नहीं है, लेकिन उन्हें इस बात पर सख्त आपत्ति है कि प्रस्ताव में 1953 से पहले वाली स्थिति, धारा 370 और 35A को क्यों घसीटा गया. उन्होंने कहा कि राज्य के दर्जे की मांग को इन पुराने मुद्दों से जोड़ना पूरी तरह गलत है. सुनील शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की याद दिलाते हुए कहा कि धारा 370 को दोबारा जिंदा करने की कोई कानूनी जगह नहीं है.
(इनपुट सैयद खालिद हुसैन)