8000 करोड़ से इजरायल बनाएगा आसमानी 'पेट्रोल पंप', भारत को मिलेंगे 6 नए रीफ्यूलिंग विमान, पाक-चीन हलकान
भारतीय वायुसेना में 6 नए रीफ्यूलिंग टैंकर विमान शामिल होने वाले हैं. सबकुछ ठीक रहा तो साल 2028 से 2030 के बीच इन विमानों की डिलीवरी शुरू होने की संभावना है. भारतीय वायुसेना इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ एक बड़ी डील की ओर बढ़ रही है.
IAF Aerial Refuelling Aircraft Deal: आने वाले समय में रक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा सौदा देखने को मिल सकता है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत भी बढ़ेगी. भारतीय वायुसेना (IAF) अपने बेड़े को और आधुनिक बनाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत IAF को 6 नए रीफ्यूलिंग विमान मिलने वाले हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की कंपनी इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) के साथ एक बड़ी डील होगी. IAF के साथ यह कंपनी डील हासिल करने के बेहद करीब पहुंच चुकी है.
दरअसल, अगर आईएएफ और आईआएई के बीच यह सौदा होता हो, तो वास्तव में एक बड़ा कदम होगा. यह डील कुल 905.7 मिलियन डॉलर (लगभग 8,000 करोड़ रुपये ) के करीब की है. बताया जाता है कि इस भारी-भरकम डील के तहत भारत को कुल 6 रिफ्यूलिंग टैंकर मिलेंगे. जिससे भारतीय वायुसेना के विमानों के लड़ाकू विमानों की रिफ्यूलिंग हवा में ही हो सकेगी. इससे लड़ाकू विमान देर तक हवा में यात्रा कर पाएंगे.
कई देशों ने दिखाई थी दिलचस्पी
इस सौदे को लेकर शुरुआत में दुनिया के कई देशों ने दिलचस्पी दिखाई थी. रूस और यूरोप की कई कंपनियां भी इस रेस में आगे रहीं, लेकिन उनके प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के कड़े मानकों पर करे नहीं उतरे थे. इसके बाद वह डील की प्रक्रिया से बाहर हो गईं. ऐसे में इजरायल की आईएआई ही एकमात्र योग्य कंपनी बची है. आईएआई इजरायल की सरकारी कंपनी है और यह सैन्य और नागरिक उपयोग के लिए बेहतरीन एयरोस्पेस सिस्टम बनाती है.
'मेक इंन इंडिया' के तहत खास पहल
इस डील का दूसरा पहलू भी सामने आया है, जो इसको खास बनाना है. इस लड़ाकू विमान से जुड़ी डील को लेकर क्लियर किया गया है कि टैंकर बनाने का कम से कम 30 फीसदी काम भारत में ही किया जाएगा. इससे 'मेक इन इंडिया' को बल मिल सकेगा. कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस काम के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को भारतीय साझेदार बनाया जा सकता है.
बता दें कि अगर यह डील होती है, तो भारत में लोक सिस्टम इंटीग्रेशन का काम पूरा किया जाएगा. वहीं, विमान की वायरिंग और स्ट्रक्चरल अपडेट भी इंडिया में ही होंगे. तय प्लान के अनुसार सबकुछ रहा, तो साल 2028 से 2030 के बीच इन विमानों की डिलीवरी होने की संभावना है.
मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट की खासियत जानिए
जानकारी के अनुसार, ये नए टैंकर विमान काफी एडवांस हैं और इन्हें IAI का 'मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट' भी कहा जाता है. इजरायली कंपनी IAI का 'बेडेक एविएशन ग्रुप' पैसेंजर विमानों को लड़ाकू टैंकर में बदलने का काम करता है. बता दें कि भारतीय वायुसेना इस समय 'इल्युशिन II-78' विमानों का इस्तेमाल करती है, जो रूस के बने हुए हैं. हालांकि, अब यह विमान पुराने हो गए हैं.
भारतीय वायुसेना के बेड़े में नए रिफ्यूलिंग टैंकरों के शामिल होने के बाद वायुसेना की मारक क्षमता के बढ़ने की उम्मीद है. राफेल और सुखोई (Su-30MKI) जैसे खतरनाक लड़ाकू विमान हवा में ही अपना टैंक फुल करा पाएंगे. इससे वह बार-बार जमीन पर उतरे बिना ही लंबी दूरी तक उड़ान भर