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राज्य सरकार ने स्वामित्व योजना को लागू करने में सरकारी तंत्र की ओर से दिखाई गई सुस्ती को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. राज्य के ग्रामीण इलाकों में 50 लाख निजी संपत्तियों के मुफ्त रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब तक महज एक-चौथाई यानी 12.87 लाख रजिस्ट्रियां ही पूरी हो सकी हैं. योजना को गति देने और तय समय में लक्ष्य हासिल करने के लिए अब जनप्रतिनिधियों को सीधे मैदान में उतारा जा रहा है.
6 नवंबर (धनतेरस) से राज्य के मंत्री, सांसद और विधायक स्वयं गांव-गांव का दौरा करेंगे और अपनी मौजूदगी में ग्रामीणों की रजिस्ट्रियां पूरी करवाएंगे. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के प्रभारी मंत्रियों और विधायकों के साथ बेहतर तालमेल बिठाएं, ताकि इस काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सके.
राज्य सरकार ने अगले दो हफ्तों के लिए एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है, जिसमें 15 नवंबर तक कुल 20 लाख पंजीकरण पूरे करने का नया लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे प्रभारी मंत्रियों और स्थानीय विधायकों के साथ समन्वय करें ताकि यह काम पूरा हो सके. इसके अलावा, इस पहल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने घोषणा की है कि जिन गांवों में 100% पंजीकरण पूरे हो जाएंगे, वहां जश्न और उत्सव मनाए जाएंगे.
राजस्व विभाग के अनुसार, 1 नवंबर तक प्रदेश में 12 लाख 87 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं. सरकार ने गांवों में करीब 50 लाख निजी संपत्तियों की फ्री में पक्की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य रखा है. 2 जून 2026 को कैबिनेट ने इस योजना के लिए 3800 करोड़ रुपए की मंजूरी दी थी. योजना के तहत अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं, जिनमें से 48.32 लाख निजी संपत्तियों के हैं.
स्वामित्व योजना केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की एक बड़ी योजना है, जिसे राज्य में राजस्व विभाग द्वारा लागू किया गया है. इस योजना का मकसद गांवों में लोगों के घरों और जमीन का ड्रोन से सर्वे करना है और उन्हें उनकी जमीन का कानूनी कागज यानी स्वामित्व कार्ड देना है.