'सोच वाली जहर' के युवा हुए शिकार: दिमागी नक्सलियों पर RSS की 'नारी शक्ति' का करारा प्रहार
आरएसएस की महिला विंग यानी राष्ट्रीय सेविका समिति ने कहा है कि दिमागी नक्सली देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं. अराजकता फैला रहे हैं. ये लोग महिलाओं के मन में भी अशांति पैदा कर रहे हैं.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महिला विंग राष्ट्र सेविका समिति की चीफ वी शांताकुमारी ने कहा कि दिमागी नक्सलवाद जहरीले विचारों वाला इकोसिस्टम है. यह जेन जी का ब्रेनवॉश कर रहा है. यह मुद्दा भारत में काफी अस्थिरता पैदा कर रहा है. शांताकुमारी ने कहा, इन असंवैधानिक प्रदर्शनों में शामिल लोगों का मकसद समाज में कोई रचनात्मक बदलाव लाना नहीं है, बल्कि वे केवल अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं. नागपुर में राष्ट्र सेविका समिति के सालाना विजयादशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ये लोग महिलाओं के मन में भी अशांति पैदा कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे की वजह से भारत में काफी अस्थिरता पैदा हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया, 'हमने जंतर-मंतर पर लगातार विरोध प्रदर्शन देखे हैं. इसे हम एक असंवैधानिक विरोध-प्रदर्शन कह सकते हैं. देश में अराजकता का माहौल है. इनका (प्रदर्शनकारियों का) असली मकसद भारत में अस्थिरता पैदा करना और देश की संस्कृति को नष्ट करना है. वे इसी इरादे से ऐसा कर रहे हैं.'
'अपने फायदे के लिए जेन जी का इस्तेमाल'
उन्होंने आगे दावा किया, 'ऐसा नहीं है कि वे समाज में कोई सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं. इसके बजाय, वे अस्थिरता पैदा कर रहे हैं और अपने फायदे के लिए 'जेन Z' का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे भारतीय महिलाओं को भी भड़का रहे हैं.' 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान किया था.
प्रधानमंत्री ने कहा था, 'हम जंगलों से सशस्त्र नक्सलियों को खत्म करने और देश को उस संकट से मुक्त कराने में सफल रहे हैं. हालांकि, सशस्त्र नक्सली तो चले गए हैं, लेकिन 'दिमागी' (बौद्धिक) नक्सली अभी भी आसपास मौजूद हैं.'
आंबेडकर की चेतावनी याद दिलाई
जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए, उन्होंने ने डॉ बीआर आंबेडकर की उस चेतावनी को याद दिलाया, जिसमें उन्होंने आंदोलन के असंवैधानिक तरीकों को अराजकता का व्याकरण कहा था. उन्होंने आरोप लगाया, 'आज हम ऐसे ही तरीके देख रहे हैं. इनका मकसद भारत में अस्थिरता पैदा करना है.'
समिति प्रमुख ने कुछ समूहों पर यह आरोप भी लगाया कि वे भारतीय परंपराओं को चुनिंदा तरीके से इस तरह पेश करते हैं, मानो वे महिलाओं के प्रति दमनकारी हों. प्राचीन विद्वान वराहमिहिर की 'बृहत्संहिता' का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें महिलाओं के गुणों पर लिखा गया अध्याय यह दिखाता है कि भारतीय सभ्यता में महिलाओं को कितना सम्मान दिया जाता था.