दहकते स्वास्तिक पर थिरके कदम: क्या है 'अग्नि साथिया रास', जिसे देखकर दंग रह गए लोग
जामनगर में नवरात्र की चौथी रात को यहां पारंपरिक 'अग्नि साथिया रास' का आयोजन किया गया, जिसमें 7 युवाओं ने जलते हुए स्वास्तिक के बीच नृत्य करके दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
गुजरात के गरबा और डांडिया डांस काफी लोकप्रिय है. अब तो नवरात्र में पूरे देश में डांडिया खेला जाता है. डांडिया और गरबा के साथ-साथ गुजरात में 'अग्नि साथिया रास' भी काफी प्रसिद्ध है. नवरात्र में इस डांस का भी खास आयोजन किया जाता है. जामनगर से 'अग्नि साथिया रास' का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है. जानकारी के मुताबिक, शहर के कडियावाड इलाके में पिछले 52 वर्षों से इस अनोखी परंपरा के साथ नवरात्र त्योहार मनाया जाता है. यहां 'श्री रंडल अंबिका गरबी मंडल' की ओर से 'अग्नि साथिया रास' (आग के साथ नृत्य) का आयोजन किया जाता है. इस बार 17 युवाओं ने दहकते स्वास्तिक के बीच लगातार 45 मिनट तक नृत्य करके दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
जामनगर के साथ-साथ देश-विदेश से लोग इस परंपरा को देखने आते हैं, जो पिछले 52 वर्षों से चली आ रही है. आग के बीच होने वाली इस अनोखी कलात्मक प्रस्तुति को देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध रह जाते हैं. शहर के कडियावाड इलाके में 'श्री रंडल अंबिका गरबी मंडल' की यह अनोखी परंपरा आज भी बिना रुके जारी है. नवरात्र की चौथी रात को यहां पारंपरिक 'अग्नि साथिया रास' का आयोजन किया गया, जिसमें गरबी मंडल के मैदान में लाल-लाल दहकते अंगारों से एक बड़ा स्वास्तिक (साथिया) बनाया गया. 17 युवाओं ने इन जलते हुए अंगारों के बीच लगातार 45 मिनट तक मनमोहक नृत्य करते हैं.
क्या है 'अग्नि साथिया रास'?
इस डांस में आस्था, साहस और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. इसमें दहकते अंगारों के बीच में डांस किया जाता है. आग के बीच संतुलन और लय को बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है. इस नृत्य को केवल पुरुष कलाकार ही करते हैं जिन्हें खैलैया कहा जाता है. नर्तक इसमें गुजरात की पारंपरिक वेशभूषा पहनकर आग के बीच या आग के साथ नृत्य करते हैं. इस नृत्य के दौरान आसपास पूरा अंधेरा कर दिया जाया है. इसके बाद यह नृत्य काफी मनमोहक नजर आता है. कहते हैं कि जामनगर में इसकी शुरुआत साल 1957 में पटेल युवक गरबी मंडल ने की थी, तब से ही देवी की आराधना के लिए इस परंपरा को जीवंत रखा गया है.
नवरात्र पर खूब खेला जाता है नृत्य
इस नृत्य की एक खास बात यह है कि जैसे ही प्रस्तुति शुरू होती है, कार्यक्रम स्थल की सभी लाइटें बंद कर दी जाती हैं. घने अंधेरे के बीच, चमकते हुए 'अग्नि साथिया' और उसके अंदर नृत्य करते युवाओं का दृश्य दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण बन जाता है. इस प्रकार, आज के आधुनिक युग में भी जामनगर के कडियावाड इलाके में 52 साल पुरानी यह परंपरा नवरात्र की शोभा बढ़ा रही है और आस्था, संस्कृति व लोक कला के अनोखे संगम के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है.