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देश के सबसे अहम औद्योगिक प्रतिष्ठानों और संस्थानों की सुरक्षा में चौबीस घंटे मुस्तैद रहने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के करीब 2.2 लाख जवानों और अधिकारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है. अब बल के रोजमर्रा के प्रशासनिक और दफ्तर से जुड़े काम पूरी तरह 'पेपरलेस', बेहद पारदर्शी और मोबाइल पर 24 घंटे आसानी से उपलब्ध होने जा रहे हैं.
इस दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सीआईएसएफ ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत आने वाले 'डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन' (DIC) के साथ एक अहम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. दो साल तक चलने वाली इस आधुनिकीकरण योजना के तहत DIC बल के मौजूदा आईटी सिस्टम को अपग्रेड करने में एक मजबूत रणनीतिक साझेदार की भूमिका निभाएगा.
देश के सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में सीआईएसएफ ने हमेशा तकनीक के मोर्चे पर अगुवाई की है. जवानों की छोटी-बड़ी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बल ने पहले ही खुद मेहनत करके 40 से ज्यादा इन-हाउस ऐप्स और 30 से अधिक डिजिटल मॉड्यूल तैयार किए हैं, जो आज रोजमर्रा के कामों में बेहद मददगार साबित हो रहे हैं:
इन सबके अलावा आयुष्मान योजना, मेस फीडबैक, वेलफेयर लोन और डीजी स्कॉलरशिप जैसे पोर्टल्स ने जवानों की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है. अकेले 'लीव मैनेजमेंट System' ने अपने लॉन्च से लेकर अब तक 95 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं.
भले ही ये सारे सिस्टम अपने आप में शानदार काम कर रहे हैं, लेकिन इन्हें अलग-अलग समय पर बनाया गया था. CISF के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन (IPS) का स्पष्ट विजन था कि इन सभी पोर्टल्स को आपस में जोड़ा जाए ताकि एक 'इंटीग्रेटेड, क्लाउड-रेडी और पूरी तरह सुरक्षित' डिजिटल सिस्टम तैयार हो सके. अगले दो सालों में तीन चरणों में होने वाले इस अपग्रेडेशन से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जवानों को अलग-अलग जगहों पर अपनी जानकारी बार-बार दर्ज नहीं करनी होगी.
सब कुछ एक ही जगह आपस में जुड़ा होगा, जिसकी लाइव ट्रैकिंग की जा सकेगी और मोबाइल पर ऑटोमैटिक अलर्ट भी मिलेंगे. दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिकारियों को हाथ से तैयार होने वाली लंबी-चौड़ी रिपोर्टों के बजाय एक 'रियल-टाइम डैशबोर्ड' मिलेगा. इससे वे मैनपावर, ट्रेनिंग और संसाधनों की सही और सटीक प्लानिंग कर सकेंगे. सबसे अच्छी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बल की मौजूदा डिजिटल सेवाएं बिना किसी रुकावट के लगातार काम करती रहेंगी.
चूंकि मामला देश के एक प्रमुख और संवेदनशील सुरक्षा बल का है, इसलिए डेटा की सुरक्षा सबसे ऊपर रखी गई है. DIC अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के जरिए इस सिस्टम को किसी भी तरह के साइबर हमलों से पूरी तरह सुरक्षित बनाएगा. इसके साथ ही यह बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि पूरे डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण पूरी तरह से केवल सीआईएसएफ के पास ही सुरक्षित रहेगा. सारा तकनीकी काम सीआईएसएफ की अपनी इन-हाउस टीम ही संभालेगी, जबकि DIC उन्हें अत्याधुनिक तकनीक, बेहतरीन ट्रेनिंग और जरूरी मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा.
इस समझौते के अवसर पर सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा, 'हमारी इन-हाउस टीमों ने ऐसे शानदार डिजिटल सिस्टम तैयार किए हैं जिनका बल का हर सदस्य हर रोज इस्तेमाल करता है. अब अगला कदम इन सबको आपस में जोड़ना है ताकि हमारे जवानों का कीमती समय कागजी कार्रवाई में न बर्बाद हो और अधिकारियों को सही वक्त पर सटीक जानकारी मिल सके. DIC की मदद से हम अपने डेटा को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखते हुए प्रशासन को और भी ज्यादा तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएंगे.'
वहीं, DIC के एमडी और सीईओ अखिल कुमार ने इस साझेदारी पर खुशी जताते हुए कहा, 'सीआईएसएफ ने अपने बलबूते पर एक बेहद मजबूत डिजिटल नींव तैयार की है, जो हर साल लाखों ट्रांजैक्शन संभालती है. हम इन सभी सिस्टम्स को आपस में जोड़ने, इनकी साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने तथा इन्हें भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने में सीआईएसएफ की पूरी मदद करेंगे. यह समझौता भारत सरकार के 'डिजिटल इंडिया' के सपने का एक बेहतरीन उदाहरण है.'
जैसे-जैसे साइबर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं, देश के अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने वाले इस बल के लिए एक सुरक्षित और एकीकृत आईटी सिस्टम अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जरूरत बन चुका है. यह नई साझेदारी सीआईएसएफ को एक ऐसा अभेद्य और 'साइबर-रेडी' सिस्टम देगी, जो बल के हर एक जवान को और अधिक सशक्त बनाएगा.